This website about Treatment and use for General Problems and Beauty Tips ,Sexual Related Problems and his solution for Male and Females. Home treatment,Ayurveda treatment ,Homeopathic Remedies. Ayurveda treatment tips in Hindi and also you can read about health Related problems and treatment for male and female

1 जुलाई 2017

एंजाइटी डिसऑर्डर(Anxiety disorder)क्या है

By
आज के वर्तमान समय में पैसा कमाने के लिए प्रतियोगिताओं का दौर चल रहा है बस इसी चक्कर में मनुष्य ने अपनी जीवन शैली में खान-पान और रहन-सहन को भी काफ़ी हद तक बदल डाला है आज इंसान अपने कामों में इतना उलझा चुका है कि वो बाकी दुनिया से अपने आप को भावनात्मक रूप से भी अपने आप को कब अलग कर चुका है इस बात का उसे पता भी नहीं चलता है मनुष्य हर पल किसी न किसी परीक्षा से गुज़र रहा होता है-

एंजाइटी डिसऑर्डर(Anxiety disorder)

जब कोई भी इंसान अपने व्यवहार और अपनी भावनाओं के साथ-साथ सोचने की शक्ति पर सही तरीके से नियन्त्रण नहीं कर पा रहा हो तो फिर इस अवस्था को ही चिंता मानसिक रोग(Anxiety disorder)कहते हैं इस अवस्था में वो चीज़ों और बाकी इंसानों को सही तरीके से देख और समझ नहीं पाता है और धीरे-धीरे जब यह प्रक्रिया स्थाई होती चली जाती है तो व्यक्ति अपने जीवन को सामान्य तौर पर नहीं जी पाता है

मानसिक रोग(Anxiety disorder)होने के कोई निश्चित लक्षण नहीं होते हैं इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि सम्बन्धित व्यक्ति की परिस्थितियां कैसी हैं क्यूंकि हालातों के हिसाब से सभी में इसके लक्षण अलग-अलग होते हैं इसी वजह से हमें अक़सर पता भी नहीं चल पाता है कि हमारे नजदीकी भी कब इस रोग के प्रभाव में आप आ चुके हैं-

मानसिक रोग चूँकि सोचने-समझने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है आपका खान-पान भी इसमें काफ़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है यह रोग किसी को भी कभी भी हो सकता है इसमें उम्र का कोई बंधन नहीं है लेकिन चिंता रोग(Anxiety disorder)का मतलब यह कभी नहीं होता कि सम्बन्धित व्यक्ति में किसी तरह की कोई कमी है बस रोगी यदि चाहे तो सही तरीके से अपना इलाज़ करवाकर ख़ुशहाल ज़िन्दगी जी सकता है-

मानसिक रोगों के प्रकार-


अब तो लोग इस समस्या पर धीरे-धीरे लोग बात भी करने लगे हैं जिससे की नए-नए मानसिक विकार सामने आ रहे हैं इनमें प्रमुख रूप से जो मानसिक विकार है उनकी चर्चा करते है-

एंजाइटी डिसऑर्डर(Anxiety disorder)क्या है-


एंजाइटी को हम सामान्य भाषा में चिंता कह सकते हैं व्यक्ति इसमें ज़रुरत से ज़्यादा किसी बात या परिस्थिति को लेकर सोचने लगता है और धीरे-धीरे यही सिलसिला बरकरार रहने पर व्यक्ति एंजाइटी(Anxiety)का शिकार हो जाता है एंजाइटी में कुछ व्यक्ति सम्बन्धित ऑब्जेक्ट या सिचुएशन के बारे में जब सोचते हैं तो उनकी हार्ट बीट असंतुलित हो जाती है तथा कुछ लोगों में इस समय तेज़ पसीना भी आने लगता है सम्बन्धित सिचुएशन में व्यक्ति अगर सामान्य व्यवहार नहीं कर पाता है तो फिर इसका मतलब वो एंजाइटी का शिकार हो सकता है सामान्यत इसमें जनरलाइज़ड एंजाइटी, पैनिक डिसऑर्डर, सोशल एंजाइटी डिसऑर्डर और स्पेसिफिक फ़ोबिया आदि शामिल किये जाते हैं-

मनोदशा(Mood Disorder)का उत्तेजित विकार-


इसमें अचानक से मनुष्य ख़ुश होते हुए दुखी महसूस करने लगता है उसी तरह जब दुखी होता है तो अचानक ही अपने आप को ख़ुश महसूस करने लगता है सबसे आम मनोवस्था संबंधी विकार(Mood Disorders)में डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और साइक्लोथैमिक विकार(Cyclothymic Disorder)को रखा जाता है-

मानसिक-असंतुलन-विकार(Mental-Imbalance-Disorder)- 


इस प्रकार का व्यक्ति विकृत विचारों में खोया रहता है इस बीमारी में इंसान को अनावश्यक वहम होते रहते हैं तथा इसमें व्यक्ति को अजीबोगरीब आवाजें सुनाई देती है और साथ ही अजीब-अजीब दृश्य भी दिखाई देते हैं लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ होता नहीं है विखंडित-मनस्कताग्रस्त(Schizophrenia)इसका सबसे आम प्रकार है-

भोजन विकार(Eating Disorders)-


इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति खाने-पीने और वजन को लेकर काफ़ी उत्तेजित भावनाएं दिखाता है Anorexia Nervosa और Binge Eating Disordres Eating Disorder इसके सबसे कॉमन रूप हैं-

आवेग नियंत्रण और व्यसन विकार(Impulse Control and Addiction Disorders)-


इसमें व्यक्ति किसी स्पेसिफ़िक चीज़ का एडिक्ट हो जाता है इस वजह से वो अपने रिश्तों और ज़िम्मेदारियों पर ध्यान देना भी छोड़ देता है जैसे चोरी करना आग लगाना और जुआ खेलना इसके उदाहरण हैं-

पर्सनालिटी डिसऑर्डर्स(Personality Disorders)- 


इस प्रकार का रोगी व्यक्ति हमेशा दृढ़ और उत्तेजित रहता है वो अपने इस व्यवहार की वजह से अपने आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करने लगता है असामाजिक विकार(Antisocial Disorder),पागल व्यक्तित्व विकार(Paranoid Personality Disorder)इसमें सबसे कॉमन है-

जुनूनी-बाध्यकारी-विकार(Obsessive-Compulsive-Disorder)-


आज के जमाने में सबसे कॉमन मेंटल डिसऑर्डर(OCD)है इसमें इंसान के दिमाग में किसी चीज़ को लेकर ऐसे विचार आने लगते हैं जिससे उसको लगता है वह चीज़ उसके लिए हानिकारक हो सकती है इस तरह के विचारों को स्थिर-विचार(Obsessions)कहा जाता है इसके बाद व्यक्ति उन चीज़ों से बचने के लिए बेतुके उपाय करने लगता है जिनकी वजह से वो कई तरह के एक्शन लेता है इन एक्शन्स को बाध्यता(Compulsions)कहते हैं- उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को रोगाणु(Germs)को लेकर कोई डर पैदा हो जाये और इससे बचने के लिए वो बार-बार पानी से हाथ धो कर आता है और आगे चल कर क्रोनिक अवस्था में फिर वह घंटो पानी के नीचे लगा रहता है भले ही उसके हाथ की उँगलियाँ गलने लगी हो-

अभिघातज के बाद का तनाव विकार(Post-Traumatic Stress Disorder)-


जैसा कि आप नाम से ही समझ सकते है कि PTSD में व्यक्ति अपने साथ हुए किसी दर्दनाक हादसे की यादों को सोच-सोच कर परेशान हो रहा होता है इन सबके अलावा भी कुछ मानसिक विकार हैं जो आजकल सामने आ रहे हैं-

तनाव-प्रतिक्रिया-सिंड्रोम(Stress-Response-Syndromes)-


इस विकार को पहले एडजेस्टमेंट डिसऑर्डर(Adjustment Disorder)के नाम से जाना जाता था यह ज़्यादा तर तब होता है जब व्यक्ति अपने साथ हुई किसी घटना से स्ट्रेस में चला जाता है इसका प्रभाव घटना के लगभग 3 महीने बाद शुरू होता है जो कि सामान्यत 6 महीने में खत्म हो जाता है-

असहनीय विकार(Dissociative Disorders)-


इसे आमतौर पर मल्टीप्ल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के नाम से भी इसेजाना जाता है इसमें व्यक्ति अपने अनुभवों की वजह से अपने आस-पास के वातावरण को अलग नज़रिए से देखने लगता है और धीरे-धीरे इस चीज़ का प्रभाव उसकी ख़ुद की पर्सनालिटी पर भी पड़ने लगता है वह अपनी पहचान को कई रूपों में देखने लगता है-

कृत्रिम विकार(Factitious Disorders)-


यह बीमारी काफ़ी अजीब है इसमें व्यक्ति अपने आस-पास के लोगों या रिश्तेदारों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए किसी बीमार की तरह व्यवहार करने लगता है उदाहरण के लिए-पेट दर्द, सिर दर्द-जबकि वह इन समस्याओं से वास्तविक रूप से प्रभावित नहीं होता है-

सेक्सुअल और जेंडर डिसऑर्डर्स(Sexual and Gender Disorders)-


इसमें व्यक्ति अपने सेक्स के प्रति विचारों में अंतर्विरोध(Contradiction)महसूस करने लगता है उसके सेक्स के अनुसार जैसा उसका व्यवहार होना चाहिए उनमें काफ़ी बदलाव आ जाता है-

सोमेटिक सिम्पटम डिसऑर्डर्स(Somatic symmetry disorders)-


पहले इस डिसऑर्डर को मानसिक विकार(Psychosomatic Disorder)या सोमैटोफॉर्म विकार(Somatoform Disorder)के नाम से जाना जाता था इसमें व्यक्ति अपने आप को किसी शारीरिक समस्या से ग्रसित महसूस करता है जबकि वास्तविकता में उसे कुछ भी नहीं हुआ होता है-

टिक विकार(Tic Disorders)-


इसमें व्यक्ति अजीब आवाजें निकालने लगता है असामान्य बिहेव करने लगता है लेकिन यह सब उसके कंट्रोल में नहीं होता है-

इन सबके अलावा पागलपन(Dementia) अल्जाइमर रोग(Alzheimer's Disease)के कुछ मामलों को भी मेंटल इलनेस में शामिल कर लिया जाता है-

Whatsup No- 8779397519

Read Next Post-


Upcharऔर प्रयोग-

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें