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ल्यूकोडर्मा(Leukoderma)होने के कारण और लक्षण

हर मनुष्य की स्किन के अंदर एक वर्णक होता है जिसे मेलेनिन(Melanin)कहते हैं इसी मेलेनिन के कारण आपकी स्किन का रंग निर्धारित होता है जादा वर्णक होने से आपका रंग काला होता है और इसकी कमी के कारण आपका कलर गोरा या साफ़ रंग का होता है यही मेलेनिन(Melanin)आपकी स्किन और आपकी बॉडी के दूसरे अंगों को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचा कर आपको स्किन कैंसर जैसे बीमारी से भी बचाता है-

ल्यूकोडर्मा(Leukoderma)

विटिलिगो तब होता है जब मेलेनिन उत्पादन करने वाली कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं या और अधिक मेलेनिन उत्पादित नहीं करतीं हैं जिसके कारण त्वचा पर असमान आकृति के धीमे-धीमे बढ़ते हुए सफ़ेद दाग दिखाई देते हैं यही विटिलिगो(Vitiligo)या ल्यूकोडर्मा(Leucoderma)होने के पीछे का कारण होता है इस मेलेनिन की कमी होने के लिए कई कारण और कारक जिम्मेदार होते हैं-आइये जानते है मुख्य कारण और लक्षण के बारे में-

वैसे इस चर्म रोग का सही कारण आज भी किसी को नहीं पता है लेकिन कुछ लोग इसे ख़राब खान-पान  ग़लत फ़ूड कम्बीनेशन(food combination)के कारण भी होना मानते हैं जैसे-मछली के साथ दूध का सेवन, कददू  के साथ दूध पीना,  प्याज़ के साथ दूध पीना आदि-

ऐसा सोचना ग़लत भी नहीं है किसी हद तक ये बात सही भी है कि सही खान पान न होने से भी ये प्राब्लम आपको हो सकती है क्योंकि जो आप खाते हैं उसका असर आपकी त्वचा की सेहत पर भी पड़ता है-

आनुवांशिक या जेनेटिक  कारण-


1- तीस से पैतीस प्रतिशत लोगो में  विटिलिगो(Vitiligo)का कारण आनुवंशिक गुण ही होता है तथा कुछ लोगों में सूर्य की हानिकारक किरणों के कारण भी ये होता है -

2- मानसिक तनाव(Stress), चिंता(Anxiety)और डिप्रेशन(Depression)या स्किन पर चोट लगने से तथा पेट की गड़बड़ी के कारण भी विटिलिगो होता है-

3- लिवर की कार्यक्षमता में कमी या पीलिया (Jaundice)या लिवर प्राब्लम होना या पाचन तंत्र में कीड़े होना भी इसका एक कारण होता है-

4- कुछ लोगों में अत्यधिक पसीना आने से या कार्य पर्णाली में गड़बड़ी होने से भी ये रोग पाया जाता है-

5- मधुमेह, अतिगलग्रंथिता, एडिसन रोग या कोई और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के कारण भी पाया जाता है-

6- जलने के कारण स्किन को होने वाले नुकसान के कारण विटिलिगो(Vitiligo)होता है-

7- खून में खराबी या कैल्शियम की कमी अथवा त्वचा पर टैटू या स्टीकर का प्रयोग करवाना,स्टेरॉयड के इंजेक्शन का प्रयोग,तंग, चुस्त कपड़े पहनना भी इसका एक कारण होता है-

ल्यूकोडर्मा(Leukoderma)या होने के लक्षण-


1- त्वचा पर छोटा सफेद दाग जो समय के साथ बढ़ता जाता हो या बालों का समय के पहले सफ़ेद होना या बालों का झड़ना-

2- सूर्य के प्रकाश के सामने आने पर त्वचा में उत्तेजना का होना-

3- दाग पर स्थित बालों का भी सफ़ेद हो जाना तथा ठन्डक के प्रति संवेदनशीलता,अवसाद तथा कमजोरी और थकावट-

सफ़ेद दाग(Leucoderma)में ध्यान दें-


1- कॉस्मेटिक प्रसाधन जैसे क्रीम और पाउडर के प्रयोग बंद कर दे ध्यान रहें पर्फ्यूम, डियोड्रेंट, हेयर डाई, पेस्टिसाइड को शरीर को सीधे शरीर के संपर्क में आने से बचाएं-

2- तेज केमिकल वाले साबुन और डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें पीड़ित व्यक्ति तनाव से बचे और आराम करे तथा नहाते समय अत्यधिक साबुन के प्रयोग से बचे सुबह के समय 20 से 30 मिनिट धुप का सेवन(धुप स्नान)करे-

3- खाने में लोहतत्व युक्त पदार्थ जैसे मांस, अनाज, फलीदार सब्जियां, दालें व हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करे-

4- खट्टी चीजें जैसे- नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, उड़द दाल न खाएं-

5- सफ़ेद दाग के इलाज के दौरान नमक और खारयुक्त पदार्थों का सेवन भी पूरी तरह बंद रखे-नमक, मूली और मांस के साथ दूध न पीएं तथा मांसाहार और फास्ट फूड भी कम खाएं-

6- नित्यप्रति ताजा गिलोय या एलोविरा जूस पीना चाहिए इससे आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है-

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