Breaking News

खुजली-त्वचा(Itching-skin)सम्बंधित विकार चिकित्सा

आजकल हर एक को सारी सावधानी रखने के बाद भी त्वचा रोग बहुतायात प्रमाण में हो रहे है जिसमे त्वचा पर खुजली, फोड़े फुंसी तथा सर की त्वचा में पपड़ी बनना जैसी समस्या अब एक आम बात हो गई है एलोपैथी से यह समस्या दबा कर कम अवश्य की जाती है पर जब तक अंदरूनी विकृति की चिकित्सा नही होती तब तक इस समस्या से निजात पाना लगभग असम्भव  सा है चूँकि आयुर्वेद के हिसाब से यह त्वचा रोग रक्त विकार से होते है-

खुजली-त्वचा(Itching-skin)सम्बंधित विकार चिकित्सा

आप सभी जानते है कि हमारे शरीर का पोषक माध्यम रक्त ही है जो कि हमारे सारे वाइटल ऑर्गन्स को पोषण देने का कार्य करता है तथा हमारे शरीर के सिंचन में रक्त का कार्य मूलभूत है लेकिन किन्ही कारण-वश जब रक्त में दोष उतपन्न होता है और विकार तथा विषैले तत्वों का उत्सर्जन ठीक से नही होता तब ये रक्त विकार होता है-


खुजली व त्वचा(Itching-skin) सम्बंधित विकार के मुख्य कारण-


शुद्ध हवामान का अभाव
कब्ज,पित्त दोष व अजीर्ण
अशुध्द अन्न,उष्ण तथा बासी,अपरिपक्व,बाजारू ज्यादा मसालेदार व पचने में भारी आहार 
किसी अन्य व्यक्ति का संक्रमण
खरांब व अशुध पानी पीने से रक्त विकार हो सकते है


रक्तविकार(Blood Disorder)के लक्षण-


कब्ज व पेट की गड़बड़ी-
लिवर की कार्यक्षमता में कमी-
त्वचा पर खुजली-
रूखी निस्तेज त्वचा-
घमोरियां व त्वचा पर कही भी चकते, फोड़े -फुंसी, दाद, खाज खुजली-
रक्त उष्ण होने से प्रबल कामेच्छा-
लिवर की कम कार्यक्षमता की वजह से अनिंद्रा,ज्यादा क्रोध तथा चिंता-
रक्तविकार ज्यादा बढ़ जाए तो हठीले त्वचा रोग हो जाते है जो असाध्य होते है-


रक्तविकार(Blood Disorder)में पथ्य अपथ्य तथा सावधानी-



व्यक्तिगत स्वच्छता का पूर्ण पालन करना-
नहाने के पानी मे निम की पत्तियां डालकर नहाना-
त्वचा ज्यादा रूखी लगे और नहाने के बाद खुजली ज्यादा चलती हो तो नहाने के पानी मे एक चमच शुद्ध नारियल तेल डालकर स्नान करे-
सर्वप्रथम कब्ज का यथा योग्य इलाज-
दही,खटाई, तेल मिर्ची मसाले,बासी चीजो से बचे-
गेहूं की घी लगाई हुई फुल्के, शक्कर, घी, गाय का दूध, पुराने चावल, मूंग दाल, परवल, दूधी, अंगूर और किसमिस, मोसम्बी तथा अनार जैसे सौम्य और सात्विक आहार रक्तविकार में पथ्य है-

रक्तविकार(Blood Disorder)के लिए चिकित्सा प्रयोग-


1-सुबह शाम गाय के दूध के साथ 15-15 ग्राम गुलकन्द ले-

2- काली मुन्नका, हरीतकी, सोनामुखी, गुलाब की पंखुड़िया समभाग लेकर 10 ग्राम की मात्रा को क्वाथ बनाकर उसमें मिश्री डालकर सुबह शाम ले-

3- सौफ, गुलाब पंखुड़िया, मुन्नका और जेठीमधु सब सम भाग लेकर 25 ग्राम की मात्रा का कवाथ बना ले इसमे शक्कर डालकर सुबह खाली पेट 7 दिन पिए जिससे कब्ज व पेट की उष्णता निकल जाती है और रक्तविकार में लाभ होता है-

4- हरड़, बहेड़ा, आँवला, सालसा, मंजिष्ठा, नीम की छाल, कटु, चोपचीनी, गोरखमुंडी तथा गिलोय इन सबको सम भाग लेकर तथा अनन्तमूल दुगना लेकर काढ़ा बनाए व सुबह शाम सेवन करने से रक्त दोषों का शमन होता है-

5- टमाटर का रस तथा सेंधा नमक व काली मिर्च डालकर पीने से रक्त शुद्धि होती है-

6- हल्दी तथा मंजिष्ठा समभाग का काढ़ा पीने से रक्तविकार दूर होते है-

7- त्वचा पर केमिकल सोप या डिटरजेंट ना लगाए-

8- खुजली बढ़ने पर शुद्ध नारियल तेल 100 ml में 10 ml नीम तेल तथा कपूर मिलाकर खुजली के स्थान पर लगाने से काफी आराम मिलता है-

प्रस्तुति-

Dr.Chetna Kanchan Bhagat


सम्पर्क पता-

Dr.Chetna Kanchan Bhagat

C- 002 KalpTaru,Opp Old Petrol Pump
Mira Bhayandar Road,
Mira Road
Dist-Thane
Mumbai- 401105(Maharashtra)

Phone Numbers-

08425904420, 08779397519(whatsup&call)

Timing- 11Am To 7 Pm

E-mailbhagatchetna@gmail.com


सम्पर्क करने से पहले-

1-रोगी की परेशानी, उम्र,लिंग,वजन बताए-

2- पैथोलोजिकल रिपोर्ट्स हो तो वह भी बताए-

3- रोगी के मानसिक लक्षण, स्वभाव, पसन्द, नापसन्द,यह सब नोट करके जब भी काल करे तब अवश्य बताए-

4- रोगी की भूख, प्यास,नींद, मल मूत्र नॉर्मल है या नहीं तथा स्त्रियों में माहवारी कम ज्यादा हो तो यह भी बताए-

5- सुबह ब्रश करने से पहले की जीभ की फ़ोटो हमें जीभ बाहर की तरफ निकाल कर भेजे-

आपके द्वारा भेजी गई यह सारी डिटेल्स आपका डायग्नोसिस करने में हमें सहायक होगी-इसलिए फोन और वोट्सएप पर यह फॉरवर्ड करना ही आपको बेहतर होगा अगर आपके पास वॉट्सप की सुविधा ना होतो आप यह सब नोट करके हमे फोन पर भी बता सकते है-दवा आपके पास कोरियर करने की सुविधा भी है-

Whatsup- 8779397519


सभी पोस्ट एक साथ पढने के लिए नीचे दी गई फोटो पर क्लिक करें-



सभी पोस्ट एक साथ पढने के लिए नीचे दी गई फोटो पर क्लिक करें-

कोई टिप्पणी नहीं

//]]>