29 सितंबर 2017

गर्भाशय निकालना के बाद कि समस्याए

Problems after Removing the Uterus-


गर्भाशय या Uterus Removal के बाद अक्सर महिलाए शारीरिक, मानसिक तथा सौंदर्य लक्ष्य की समस्याओं से दो चार होती है तब योग्य सहायता व चिकित्सा की कमी से उन्हें बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है एलोपैथी में इसका कोई स्थायी उपचार संभव नही लेकिन आयुर्वेद और बेच फ्लॉवर्स थेरपी तथा कुछ घरेलू उपचार से भी महिलाए इन जटिल समस्याओं से मुक्ति पा सकती है..

गर्भाशय निकालना के बाद कि समस्याए

जब किन्ही गम्भीर कारणों की वजह से महिला का गर्भाशय(Uterus)निकाल दिया जाता है तथा कभी-कभी कुछेक केसेस में हिस्टेरेक्टॉमी(गर्भाशय-उच्छेदन)के दौरान महिला का अंडाशय(Ovary)भी निकाल दिया जाता है तो उसे बाद में आजीवन कुछ ना कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

यदि कोई महिला सर्जरी से पहले मेनोपॉज़ की स्थिति में नहीं पहुंची है तो सर्जरी के बाद उस महिला में मेनोपॉज़ के कुछ लक्षण जैसे- बहुत ज्यादा गर्मी लगना, मनोस्थिति में तेजी से बदलाव इत्यादि नज़र आ सकते हैं। सर्जरी के बाद शरीर को हॉर्मोन में हो रहे इस बदलाव को स्वीकार करने में थोड़ा समय लग सकता है।

गर्भाशय-उच्छेदन के बाद शरीरिक मानसिक सौन्दर्य बदलाव- 


आयुर्वेद के हिसाब से शरीर का कोई भी अंग फालतू नही है और जब उसे निकाला जाता है उस खाली जगह पर वायु संचित होना शुरू हो जाता है।और वायु संचित होकर शरीर में दोष उत्पन्न करकेे तकलीफे बढ़ाता है और अक्सर महिलाओं को गर्भाशय ओर ओवरीज निकालने के बाद दूसरी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसमे थकान, कमजोरी, कब्ज, गैस ट्रबल, पेट फूलना, पेढु का दर्द, बाल झड़ना ,त्वचा रूखी और निस्तेज होना, योनि में रूखापन, हॉट फ्लेशेस से जांघो में रैशेस या छील जाना, स्तनों में ढीला पन, अनिंद्रा, मूड स्विंग, कमर दर्द, निचले हिस्से में भारी पन, कूल्हों का दर्द आदि..

शारीरक समस्याओं के साथ साथ महिलाओं में मानसिक समस्याए और स्वभाव में भी तेजी से बदलाव पाया जाता है। जिसमे उदासी, आत्मग्लानि, झुंझलाहट, अपनेआप को बिनुपयोगी मानना,नीरसता, डर, कामेच्छा की कमी, आलस्य, अनमना पन, तनाव, पेनिक अटेक्स, आत्मविश्वास की कमी ,चिड़चिड़ापन, जैसी समस्या हो सकती है।

इससे भी ज्यादा चिंतित करने वाली सौंदर्य समस्याए होती है  क्योंकि यह बदलाव महिलाए खुद भी महसूस करती है और लोग भी नोटिस करते है।

सौंदर्य समस्याए जिसमे त्वचा की रंगत फीकी पड़ना, झुर्रियां, डार्क सर्कल्स,दाग धब्बे, कभी कभी फोड़े फुंसियां, बदन में कसाव की कमी, स्तन ढीले हो जाना, पेट फूल जाना, वजन बढ़ जाना, बाल झड़ना, चहेरे पर बाल आना जैसी समस्याए भी हो सकती है।

गर्भाशय निकालना(Removing the Uterus)के बाद की चिकित्सा-


1- आयुर्वेद में लक्षणों के हिसाब से औषधि कर्म से शरीर से संचित दोष निकाले जाते है तथा शरीर को पृष्टि व बल प्रदान करने वाले रसायन औषधि स्वरूप में दिए जाते है।

2- घरेलू चिकित्सा से भी इन समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है जिसमे उचित खानपान, उचित आराम तथा उचित व्यायाम व प्राणायाम से शरीर को स्वस्थ रख सकते है।

3- व्यायाम में उत्तान पादासन, वज्रासन, माँजरासन, हलासन तथा पवनमुक्तासन व सूर्य नमस्कार जैसे आसन बेहद उपयोगी है

4- प्रायनायाम में अनुलोमविलोम, कपाल भाती, शीतली प्राणायाम तथा भ्रामरी प्राणायाम बेहद उपयोगी है।

5- हफ्ते में एक बार शरीर तथा सर की जैतून, तिलनारियल तेल समभाग मिलाकर उसमे 10 बूंदे अश्वगंधा तेल डालकर की हुई मालिश त्वचा को निखरती है साथ साथ मसल्स भी टोंन रखती है।

6- रोज रात को नाभि में 2-3 बूंदे एरंड तेल की डालकर सोने से संचित वायू का शमन होता है।

7- रात को गाय के गर्म दूध में 4-5 बूंद अखरोट के तेल की डालकर पीने से अनिंद्रा, थकावट तथा सरदर्द से राहत मिलती है।

8- भोजन में नियमित अलसी, सहजन, कद्दू, बादाम, अखरोट, मुनक्का, आँवला, गाय का घी, दही, छाछ, मौसमी फल जैसी चीजें अवश्य शामिल करें जिससे शरीर को योग्य पोषण मिले तथा कमजोरी दूर हो।

9- इसी तरह अगर मानसिक तनाव ज्यादा हो तो आप मेडिटेशन कर सकती है। 

10- मानसिक समस्याओं का उत्तम उपचार बेचफ्लॉवर थेरपी में है जो किसी योग्य चिकित्सक की सलाह से आप इन समस्याओं पर काबू पा सकती है


प्रस्तुति-

STJ- Chetna Kanchan Bhagat

Whatsup-8779397519

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