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5 सितंबर 2017

सिहुली(White Spots)की समस्या और उपचार

अक्सर छोटे बच्चों तथा युवावस्था के युवक युवतियों को यह सिहुली(White Spots)की समस्या बहुतायत रूप से देखने को मिलती है यह अचानक से त्वचा पर तथा जब विशेषकर चहेरे पर हो जाते है तब लोगो का तथा रोगी का ध्यान इस समस्या पर जाता है-

सिहुली(White Spots)की समस्या और उपचार

त्वचा पर हल्के सफेद दाग या सिहुली(White Spots)एक या बहुत संख्या में हो जाते है तथा त्वचा Pale या चमकहीन व रूखी ओर शुष्क लगती है लेकिन यह कुष्ठ रोग या सफेद कोढ़ नही होते औऱ उचित देखभाल व इलाज से इस समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है-

एलोपैथी में इसका इलाज एंटी फंगल डोझ देकर किया जाता है लेकिन जब तक इस समस्या का Root Couse याने जड़ का इलाज नही किया जाता तब तक यह बिमारी बारबार होती रहती है और ज्यादा देर हो जाए तब कष्ट साध्य भी होती है लेकिन योग्य समय रहते इसे जड़ से मिटाया जाए तो निश्चित ही स्थायी और लाभदायक परिणाम मिलते है-

सिहुली(White Spots)या पैच(Patches)के लक्षण-


त्वचा पर खास कर चहेरे पर, गालो पर हल्के सफेद दाग या धब्बे हो जाना, त्वचा निस्तेज व शुष्क हो जाना और अगर इसका जल्द इलाज ना करवाए तो सफेद धब्बे की त्वचा शुष्क होने लगती है और खुजली शुरू हो जाती है और खुजलाने से फुंसिया भी निकल आती है जो चहेरे पर हो तो शर्मिंदगी का सबब भी बन जाती है-

सिहुली(White Spots)के कारण-


त्वचा पर ज्यादा समय तक तेज धूप का पड़ना-
पेट व पाचन सम्बंधित बीमारियां या पाचन तंत्र का कमजोर होना-
पेट के कीडे या कृमि होना-
ज्यादा लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाइयां लेना-
शरीर मे अधिक उष्णता होना-
रक्त की खराबी से-
हार्मोन्स या स्त्रियों में माहवारी सम्बंधित गड़बड़ी, थाइरोइड जैसी समस्या से तथा गर्भनिरोधक गोलियों के लंबे समय तक उपयोग से-
विटामिन डिफिशनसी या पोषण की कमी से-
नहाने के साबून, हेयर डाई, ब्लीचिंग क्रीम जैसे कॉस्मेटिक चीजो में रहे हुए केमिकल्स से-
कमजोर रोग प्रतिकारक शक्ति से-
प्रदूषण तथा किसी एलर्जी से तथा मानसिक व भावनात्मक अवसाद, चिंता से यह समस्या हो सकती है-
योग्य चिकित्सक रोगी की जांच और पूरा विवरण जानकर इस रोग की जड़ पहचान कर उसकी योग्य चिकित्सा करते है-

सिहुली(White Spots)की आयुवर्दिक चिकित्सा-


1- सबसे पहले शरीर मे संचित दोष तथा विषाक्त द्रव्यो का उत्सर्जन करवाना जिसमे रोगी को एनीमा अथवा औषधियो द्वारा विरेचन करवाकर आंतो में फंसी संचित मल और वायु जैसी गंदगी को बाहर निकाला जाता है-

2- रोगी को 3 दिन सिर्फ लिक्विड डाइट या फलो के रस तथा विभिन्न सुप पर रखा जाता है और यदि  पेट में कीड़े हो तो उसकी चिकित्सा की जाती है-

3- उसके बाद रोगी को पौष्टिक आहार जिससे उसकी जीवनावश्यक विटामिंस की पूर्ति हो लेने की सलाह दी जाती है साथ मे नमक, अंडे, खट्टे पदार्थ, तीखे मसाले, तली हुई चीजें, मांसाहार, अचार जैसी चीजें तथा धूम्रपान, बीड़ी तम्बाकू, गुटका से परहेज बताया जाता है-

4- भरपूर हरि सब्जियां, मौसमी फल तथा हल्का व सुपाच्य आहार लेने की सलाह दी जाती है-

5- तेज धूप से बचाव तथा व्यक्तिगत साफ सफाई पर बिशेष ध्यान देने को कहा जाता है तथा सुबह जितनी जल्दी हो सके उठकर प्रानायाम करने की सलाह दी जाती है-

सिहुली(White Spots)की घरेलू चिकित्सा-


1- 3 अंजीर, 4बादाम, 8 काली मुन्नका रात को पानी मे भिगो दें तथा सुबह इसे चटनी बनाकर या खूब चबा चबा कर खाए-

2- अलसी, सूरजमुखी के बीज तथा कद्दू के बीज व काले तिल समान मात्रा में लेकर इसे भून कर रख ले सुबह शाम एक एक चमच खूब चबा चबा कर खाए-

3- 6 तुलसी के पत्ते व एक कालीमिर्च सुबह शाम खाए-

4- रोज एक देसी सेब को एक चम्मच शहद के साथ खाए-

5- त्वचा पर दाग पर एलोवेरा का रस तथा तुलसी का रस लगाए-

6- मूली के पत्तो का रस त्वचा पर लगाए- 

7- मूली तथा मूली के पत्तो की सब्जी तील, अजवायन तथा जीरा छौक लगाकर भोजन में अवश्य ले-

8- सप्ताह में कम से कम एकबार करेले की सब्जी तिल ओर सरसों का छौक लगाकर खाए-

9- कद्दू, गाजर, लौकी तथा चुकुन्दर चारो को समान मात्रा में लेकर कद्दूकस करके इसका हलवा बना ले,यह हलवा रोज सुबह शाम 2-2 चमच खाए-

10- व्रण नाशक काढ़ा-

गिलोय- 180ग्राम
अडूलसा- 160 ग्राम
धनिया बीज- 160 ग्राम
मुनक्का- 160 ग्राम

इन सबको मिलाकर रख दे तथा रात को 5 से 10 ग्राम की मात्रा में 2 कप पानी मे भिगोकर रख दे सुबह उबालकर आधी मात्रा याने एक कप बचे तब छानकर इस काढ़े को पीने से रक्तशुद्धिः होकर सिहूरी की समस्या दूर हो जाती है-

प्रस्तुति-

Dr. Chetna Kanchan Bhagat


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