16 सितंबर 2017

भावनाओ के शरीर पर होने वाले परिणाम

Results on Body Of Emotion


मानवीय मन अथवा भावना (Emotion) पृथ्वी पर जितने भी जीवित जीव है उनका मन उनके शरीर से कई गुना ज्यादा सँवेदनशील तथा शक्तिशाली होता है अब तो वैज्ञानिक भी यह मानने लगे है कि इंसान को होने वाले रोग पहले मानसिक स्तर (Mental Level) पर होते है और अगर उन्हें ठीक से उपचारित ना किया जाए तो भयंकर बीमारियों के स्वरूप मे शरीर को अपनी चपेट में ले लेते है-

भावनाओ के शरीर पर होने वाले परिणाम

भावनाओ (Emotion) के शरीर पर होने वाले परिणाम-


इतिहास गवाह है कि फ्रांस की महारानी मेरी एंटोनेटि (1755-1793) को जब उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया तब भय और चिंता की वजह से छोटी सी उम्र में ही उनके सर के बाल रातो-रात सफेद हो गए थे तथा 1535 में अंग्रेज शहीद थॉमस मोरे को जब टावर ऑफ लंदन में फाँसी की सजा सुनाई गई तब एक ही रात में उनके सर के बाल भी सफेद हो गए थे-

इसी तरह विदेश के एक डॉक्टर जो कि बेहद सफल और कामयाब डॉक्टर थे उन्होंने मरणोपरांत प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा में लिखा कि "मेरी व्यावसायिक सफलता में 90% योगदान सिर्फ और सिर्फ केल्शियम कार्बोनेट की बिना दवाई की गोलियों का है " तब तो सारी दुनिया चकित हो गई थी-

मेरे कहने का तातपर्य यही है कि हमारा मन ही प्रमुख कारण है जो शरीर पर अच्छे या बुरे प्रभाव डालता है आयुर्वेद ने भी सदियों पहले ही इस रहस्य को उजागर किया और चिकित्सा प्रणाली तथा जीवनशैली में ध्यान, धारणा, मंत्र चिकित्सा जैसी पद्धितियों का समावेश किया-

पुरातन चिकित्सा-


पुरातन चायनीज चिकित्सा पद्धति में भी शरीर के हर अंदरूनी अंग की अपनी एक भावना (Emotion) होती है यह माना है होमियोपेथी तथा बेचफ्लॉवर चिकित्सा तो मन के विचार, भावनाए तथा स्वभाव को ही आधार बनाकर औषधि का निर्धारण करती है इसलिए आज के दौर में आयुर्वेद, बेचफ्लॉवर या होमियोपैथी की तरफ लोगो का रुझान बढ़ा है क्योंकि यह चिकित्सा पद्धति सिर्फ तन का ही इलाज नही करती किन्तु मन को भी शांत और स्वस्थ बनाती है जिससे रोगी स्थायी रूप से स्वस्थ होता है व प्रसन्न रहता है जबकि एलोपैथी चिकित्सा में रोग का इलाज इस पद्धति से नहीं होता है एलोपैथी में रोग जड़ से समाप्त नहीं होता केवल रोग को दबा दिया जाता है और फिर उस दवा प्रभाव किसी अन्य रोग के रूप में प्रस्तुत हो जाता है जिसे आम भाषा में साइड इफेक्ट कहते है-

हमारे धर्म ग्रँथ भी हमे दया, क्षमा, करुणा, सत्य, प्रेम, दान, त्याग, मैत्री, अपरिग्रह, सूकथन, सुचिंतन, सुभाष्य, तथा सुश्रवण जैसी भावनाए (Emotion) व आदते जीवन मे उतारने का बोध देते है जिसमे पाप पुण्य के हेतु से ज्यादा स्वस्थ जीवन व तंदुरुस्त तन और मन का ही प्रयोजन छुपा है जिसे हर व्यक्ति नहीं समझता है-

भावनाओ (Emotion) का स्वास्थ पर होने वाला प्रभाव-


भावनाओ के शरीर पर होने वाले परिणाम

आइये एक नजर हम मन की नेगेटिव भावनाओ, मानसिक विचार तथा बुरी आदतों का हमारे स्वास्थ्य व शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव को भी जान लेते है

1- हमारा मन, भावना, विचार, आदते तथा स्वभाव ही मिलकर हमारी प्रकृति तय करते है अधीरता, अत्याधिक आवेश, बेसब्री जैसी भावनाए या आदते ह्र्दय को तथा छोटी आंत को नुकसान पहोचाते है-

2- अहंकार या गर्व हड्डियों में कड़ापन लाकर हड्डियां कमजोर बनाते है जिद्दी स्वभाव से पेट के रोग होने की सँभावना बढ़ती है-

3- अत्याधिक क्रोध व चिड़चिड़ापन से लीवर तथा पित्ताशय को हानि पहूँचती है-

4- अत्याधिक तनाव से पेनक्रियाज की कार्यक्षमता घटती है जिससे डायबिटीज होने की सँभावना बढ़ जाती है-

5- भय, दहशत या डर की वजह से किडनी तथा मूत्राशय कमजोर होते है-

6- ईर्ष्या या जलन जैसी वृत्ति से अल्सर, एसिडिटी तथा दाह जैसी समस्या होती है-

7- कपट वृत्ति तथा बदला लेने की भावना से गले तथा फेफड़े के रोग होते है-

8- हर बात मन मे दबाए रखने की आदत अजीर्ण तथा कब्ज उतप्पन करती है-

9- स्वार्थी, दगेबाज तथा क्रूर लोगो को ज्यादा असाध्य बीमारिया होती है-

10- ज्यादा बातूनी स्वभाव वाले व्यक्ति थकावट के शिकार होते है इसलिए वो कर्मठ नही हो पाते हैं-

11- अति लोभी, कंजूस व्यक्ति जिनकी लेने की भावना प्रबल होती है और किसी को कुछ देने की इच्छा नही होती ऐसे व्यक्तियों के मनोभाव शरीर पर भी प्रतिबिंबित होते है और शरीर अपने अंदर के घातक या निरूपयोगी द्रव्यो को भी उत्सर्जित नही करता परिणाम स्वरूप रोग उतपन्न होते है-

12- इसी तरह आनंदित व्यक्तियों को रोग होते भी ही है तो जल्दी मिट जाते है क्यूंकि हँसते मुस्कुराते लोग स्वयम भी प्रसन्न रहते है तथा दूसरों को भी प्रसन्नता देते है तथा साफगोई व स्पष्टवादी लोग अच्छी नींद पाते है-

13- क्षमाशील तथा दूसरों की मदद को तत्पर लोग आत्म संतुष्टि के साथ साथ मजबूत और स्वस्थ दिल रखते है-

14- लचीले स्वभाव के व्यक्ति हर किसी से सामंजस्य बनाए रखते है तथा अच्छी रोग प्रतिकारक शक्ति के धनी होते है-

15- मितभाषी लोगो की आकलन शक्ति तथा निरीक्षण गहरा होता है इसलिए वो अपने शरीर या मन मे होने वाले बदलाव व रोगों की आहट जल्दी भाँप लेते है और समय रहते ही उसका इलाज करवाते है-

16- इस तरह व्यक्ति का मन अच्छे, बुरे हर पहलू से हमे व हमारे शरीर को जोड़ता है मन को प्रसन्न, चिंतामुक्त रखना, क्रोध पर, अहंकार पर, लोभी वृत्ति पर व बुरी आदतों पर तथा व्यसनों पर नियंत्रण रखने का प्रयत्न करना ही स्वस्थ तन, मन और जीवन का असली रहस्य है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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