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12 सितंबर 2017

बाल यौन शोषण से होने वाले दुष्परिणाम-Bad Effects of Child Abuse

Bad Effects of Child Abuse-

आदिल शेख उम्र सात साल थी आदिल को पिछले चार महीनों से डरावने सपने तथा रात को डर कर जग जाना जैसी तकलीफे हो रही थी शैक्षणिक तौर पर भी आदिल ठीक से परफॉर्म नही कर पा रहा था उसका अचानक से उदास रहना तथा अकेले बैठें रहना तथा स्कूल में किसी से बात ना करना जैसे लक्षण उभरकर सामने आ रहे थे आदिल के माता पिता बहुत ही पढे लिखे व उच्च पदों पर कार्यरत है और अपने बच्चों का विशेष ख्याल रखने में हर तरह से सक्षम होने के बावजूद वो आदिल की हालत से परेशान थे तथा स्कूल से भी शिकायत आ रही थी कि आदिल का ध्यान  नाही पढाई में लग रहा है और ना ही खेलकूद में-

बाल यौन शोषण से होने वाले दुष्परिणाम-Bad Effects of Child Abuse

जब आदिल को मेरे पास लाया गया और सारे लक्षणों पर गौर करने तथा आदिल से बात की गई तब मुझे लगा कि बच्चा मन ही मन मे घूट रहा है और उसके मन पर कोई भारी बोझ सा है तब मुझे बाल यौन शोषण(Child Abuse)की आशंका हुई और मैने आदिल कि मम्मी से छुट्टी लेकर कुछ समय आदिल के साथ बिताकर यह बात पता करने को कहा तो कुछ दिन बाद ही आदिल की मम्मी ने बताया कि उनके किसी जानने वाले ने आदिल के साथ यौन दुराचार किया था तथा उसे धमकी भी दि थी कि अगर किसी को बताया तो वो आदिल ओर उसकी मम्मी को मार डालेगा-

आदिल के लक्षणों तथा हकीकत जानने के बाद उसे बेचफ्लॉवर कॉम्बीनेशन 3 महीनों के लिए दिया गया साथ मे आदिल को बाल परामर्श(Child Counseling)के लिए भेजने की तथा उचित यौन शिक्षा(Sex Education)की भी सलाह दी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं टाली जा सके-

बाल यौन शोषण(Child Abuse)से सावधानी-


आज बच्चों के साथ ये अपराध अब बहुत ज्यादा बढ़ने लगे हैं ये आज से पहले भी होते थे लेकिन आज थोडा लोग जागरूक होने लगे है लेकिन अभी और जादा जागरूक होने की आवश्यकता है बाल शोषण को अंजाम वही लोग देते हैं जिन पर आपको सबसे जादा भरोसा होता है हो सकता है कि जो आपके सबसे जादा करीबी हो कोई नौकर या टीचर या कोई पड़ोसी या कोई रिश्तेदार भी हो सकता है इस लिए अब आपको हमेशा सतर्क रहने की भी आवश्यकता है-

आज कल भारत के राज्यों में हुए सर्वे के अनुसार हर दूसरा बच्चा यौन शोषण का शिकार है इनमें से 53 प्रतिशत बच्चे इसे बयां नहीं कर पाते और मानसिक रूप से इस आघात से जूझते रहते हैं और सबसे बड़ी बात ये है कि परिवार में किसी को पता भी नहीं चलता की उनके बच्चों के साथ क्या हो रहा है और वो किस परिस्थिति से गुजर रहें होते हैं और बच्चे भी डर के मारे ये बात सबसे छुपाते जाते हैं और बर्दाश्त किए जाते हैं लेकिन इससे उन्हें मानसिक आघात पहुंचता है और वो आगे चल कर सामान्य जीवन भी नहीं जी पाते है-

बच्चों से यौनाचार या बाल शोषण(Child Abuse)आज एक सामाजिक कलंक है और दुर्भाग्य से भारत बाल शोषण के मामलों में पहले क्रमांक पर है जिसकी सबसे बड़ी वजह जागरूकता की कमी तथा आज भी हमारे समाज मे इन विषयों पर चर्चा करना शर्मनाक माना जाता है या बदनामी के डर से अभिभावक इस पर चर्चा या कड़े कदम नही उठाते क्योंकि अभिभावक वाकई में चाइल्ड अब्यूज से बच्चे के मन और सेहत पर भविष्य में होने वाले भयंकर परिणामो से नावाकिफ है-

अक्सर यह भी होता है कि बच्चा मा बाप को इस बारे में बता दे या शिकायत करे तो भी अभिभावक विश्वास नही करते तथा बच्चों को डाँट देते है जिससे बच्चों के नाजुक मन को दुगनी ठेस पहोचती है या फिर कभी-कभी अभिभावक इसे हल्के में ले लेते है या बदनामी के डर से गुप्त रखते है और सोचते है कि बच्चा बड़े होने पर यह सब भूल जाएगा लेकिन-अभिभावक यह नही जानते कि कुंठा या हीनभावना की जड़े जो अभी बच्चे के मन मे रोपित हुई है वो बच्चा बड़ा होने पर ओर ज्यादा बढ़ेगी तथा बच्चे को आजीवन मानसिक रूप से अस्वस्थ करती रहेगी-

बाल शोषण(Child Abuse)के परिणाम-


1- बच्चों का मन संवेदनशील और कोमल होता है इस वजह से वो अच्छी या बुरी दोनों बातो से जल्दी प्रभावित हो जाता है-

2- अक्सर यौन शोषण करने वाला व्यक्ति पहले बच्चों से दोस्ती करके उन्हें लुभाकर उन्हें चॉकलेट या बिस्किट जैसी चीजें देकर उनका विश्वास जीतता है और जब बच्चा उनपर भरोसा करने लगता है तब उनका शोषण करता है-इससे बच्चों के मन मे कुंठा ओर विश्वास घात की भावना जन्म लेती है फिर बच्चा जल्दी से किसी पर भरोसा नही कर सकता और किसी मे घुलना मिलना बंद कर देता है-

3- यौन शोषण करने वाला व्यक्ति अपनी पोल खुल जाने के डर से बच्चे को डराता धमकाता है जिससे बच्चों में दहशत ओर भय की भावना हावी हो जाती है और वो हर पल भय ग्रस्त होकर जीता है जिससे उसे रात में नींद में भी बुरे सपने देखना, अचानक डर से चीखना, जाग जाना या बिस्तर गीला कर देना जैसी समस्या होने लगती है-

4- जिन लड़कियों का बचपन मे यौन शोषण हुआ हो वे लडकिया बड़ी नारकीय यातनाए सहती है एक तो डर और शर्म के मारे वे किसी को अपनी समस्या बता नही पाती और कुंठा को मन में दबाए रखती है जिसकी वजह से बड़ी होकर भी वो पुरुषों से दूरी बनाए रखती है उसके मन मे पुरुषों के प्रति नफ़रत  के भाव आते है जिसकी वजह से अंतरंग सम्भन्धों में वो अपने को असहजता महसूस करती है जिसका विपरीत असर उसके दाम्पत्य जीवन पर भी पड़ता है-

5- इस तरह बच्चों से यौन हिंसाचार बच्चों को शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक रूप से भी गहरी क्षति पहुचाता है तथा उनसे उनकी मासूमियत व बचपन छीन लेता है तथा उनके मानसिक विकास में अवरोध उत्पन्न करता है इसलिए ऐसी घटनाओं को हल्के में ना लेकर अवश्य ही कानूनी कदम उठाने चाहिए तथा साथ मे बच्चे की योग्य काउंसलिंग तथा चिकित्सा अवश्य करवानी चाहिए-

6- अभिभावकों ने  शर्म और संकीर्ण नजरिया ना रखते हुए अपने बच्चों से इस विषय पर योग्य चर्चा करनी चाहिए तथा बच्चों को योग्य तरीके से इस बारे में जरूर समझाना चाहिए-

प्रस्तुति-

SJT.Chetna Kanchan Bhagat





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