7 जून 2018

बैच फ्लॉवर चिकित्सा क्या है

What is Bach Flower Therapy


आज के युग में बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) एक डिवाइन चिकित्सा है जो मानसिक लक्षणों पर कार्य करती है तथा ये मन मे दबी भावनाओ तथा नेगेटिव इमोशन्स को दूर करके नर्वस सिस्टम को शांत (Calm Down) करती है यह एक बेहतरीन एनर्जी मेडिसिन है जिसके पॉजिटिव वाइब्रेशन मनुष्य मन से नकारात्मकता तथा उसके कुप्रभावों को दूर करता है और शरीर को स्वस्थ बनाता है-

बैच फ्लॉवर चिकित्सा क्या है

बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) क्या है-


बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) पूरी तरह से प्राकृतिक, बिना साइड इफेक्ट के तथा बेहद कारगर है इसलिए छोटे शिशुओं से लेकर वृद्धावस्था के लोग भी इसे बेझिझक उपयोग कर सकते है तथा किसी अन्य पेथी की दवाइयों के साथ भी इसे लिया जा सकता है-

बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) कैसे कार्य करती है-


सबसे पहले रोगी का पूरा विवरण तथा शारीरिक व मानसिक लक्षण पूछे जाते है क्योंकि बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) के एप्रोच से हम पेशंट की हिस्ट्री से पेशंट की वर्तमान मानसिक व शारीरिक स्थिति या रोग के पीछे का कारण जानने की कोशिश करते है याने रोगी की वर्तमान स्थिति ऐसी क्यो हुई यह जानने के लिए ही रोगी के इमोशन्स को डिटेल्स में जानना पड़ता है-

रोगी की हेल्थ तथा स्वभाव में आए बदलाव तथा उसका रुझान, पसन्द, नापसन्द, रोगी की किसी विशेष बात या घटना पर की प्रतिक्रिया व रोगी की जीवनशैली का विस्तृत अभ्यास करके तथा जीभ (जुबान) की फ़ोटो देखकर दवाई सिलेक्ट करके बेचफ्लॉवर कॉम्बिनेशन किया जाता है-

जीभ या जबान हमारे शरीर का आईना है शरीर के सारे Vital Organs की स्थिति का पता जीभ देखकर लगाया जा सकता है शरीर के हर अवयव का अपना एक इमोशन होता है और जीभ देखकर इसका अंदाजा एकदम सटीक तरीके से लगाया जा सकता है-

बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) दवाइयों को कैसे प्रयोग करें-


पेशंट को उसके लक्षण तथा दर्द या रोग की तीव्रता के अनुसार एक दो या तीन कॉम्बिनेशंस दिए जाते है जो लिक्विड याने तरल व गोलियां याने ग्रेन्यूअल के रूप में हो सकते है लिक्विड दवाई की 6 से 8 बूंदे आधे कप पानी मे दिन में 3 बार या रोग की तीव्रता के हिसाब से मात्रा बढ़ाई या घटाई जाती है-इसी तरह गोलियां 8 से 10 गोली दिन में 3या 4 बार लेने को कहा जाता है-

बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) क्या है पूरी प्रोसेस-

1- जैसा कि हम सभी यह जानते है कि मेंटल व इमोशनल असंतुलन ही शाररिक व मानसिक बीमारियों की असली वजह है मनुष्य मन मे 38 प्रकार के भाव या इमोशन्स प्रमुख से देखे जा सकते है इसका किन्ही कारणों से घटना या बढ़ना ही असंतुलन कहा जाता है-

बैच फ्लॉवर चिकित्सा क्या है

2- चिकित्सक अपने ज्ञान तथा अनूभव के आधार पर रोगी के विवरण व समस्या को जानकर बेचफ्लॉवर कॉम्बिनेशन बनाकर रोगी की चिकित्सा थीम को तय करता है लेकिन सबसे कठिन और महत्वपूर्ण कार्य होता है रोगी के मन के मुख्य नेगेटिव इमोशन्स को पहचानना जो नेगेटिव भाव सबसे ज्यादा उभर कर आता है तथा रोगी के मन को असंतुलित ओर रुग्ण बनाता है उस मनोभाव को पहचान कर सबसे पहले उसे दूर किया जाता है-

3- जब वो नेगेटिव इमोशन्स हट जाए या उसकी तीव्रता कम हो जाए तब फिर दूसरे इमोशन्स को कंट्रोल तथा हीलिंग करते है यह एक तरह की सिस्टेमेटिक प्रोसेस है-

4- प्राथमिक प्रोसेस 30 से 40 दिन की होती है इसके बाद फिर रोगी का डिटेल में कंसल्टेशन करके, लक्षणों के आधार पर दवाई का डोज अपग्रेड करते है इस तरह हर महीने एक एक नेगेटिव इमोशन्स को हटाकर शरीर को स्वस्थ किया जाता है तथा बहुत से रोगों की रोगथाम भी की जाती है-

पेशंट का सहयोग-


1- चिकित्सा के दौरान पेशंट का मानसिक तथा शारीरिक सहयोग बेहद जरूरी है-

2- सबसे पहले तो पेशंट को धीरज तथा पोजिटिव एटीट्यूट रखना तथा अपने चिकित्सक पर विश्वास रखना बेहद जरूरी होता है-

3- यह एक निराप्रद औऱ सिस्टेमिक हीलिंग प्रोसेस है यह स्टेप बाय स्टेप अपना कार्य करती है-

4- जब किसी रोगी के भावनात्मक रुकावटें या Emotional Blockage जब ज्यादा हो या समस्या ज्यादा पुरानी हो तब चिकित्सा का असर दिखने में निश्चित ही थोडा समय लग सकता है लेकिन ऐसे समय रोगी का सहयोग तथा धैर्य निश्चित ही लाभदायक सिद्ध होता है-

5- कुछ पेशंट्स थोड़ा सा लाभ मिलते ही दवाइया नियमित लेना छोड़ देते है या एक महीने में ही अगर फर्क पड़ जाए तो दवाई लेना ही बन्द कर देते है जिससे दवाई का सर्कल टूट जाता है और वांछित लाभ नही मिल पाता है क्योंकि जब तक नेगेटिव भाव मन कि गहराइयों में दबे पड़े है तब तक आपको सम्पूर्ण आराम नही मिल सकता  कभी ना कभी भविष्य में वो दबे हुए भाव उभरकर आएंगे और समस्या फिर होने लगेगी इसलिए बैच फ्लॉवर चिकित्सा (Bach Flower Therapy) करने के समय रोगी को नियमित दवा और संयम बना कर पूरा कोर्स करने पर ध्यान देना भी आवश्यक है-

6- कंसल्टेशन के समय रोगी को बेझिझक व निसंकोच होकर अपनी सारी समस्याए तथा स्वभाव व भावनात्मक विवरण  भी चिकित्सक को देनी चाहिए चाहे तो ठीक से याद करके एक कागज पर सारी डिटेल्स को नोट करके बताए ताकि छोटी से छोटी जानकारी भी चिकित्सक को मिल पाए तथा इलाज के दौरान भी बदलने वाले लक्षणों पर भी नजर रक्खे तथा समय समय पर चिकित्सक को अपडेट देता रहे जिससे अगर कुछ और दवा या डोज में परिवर्तन की आवश्यकता होगी तो चिकित्सक स्वयं उस तरह डोज या कम्बीनेशन में परिवर्तन करेगा-

7- चिकित्सा के दौरान पेशंट को अपनी दिनचर्या नियमित रखनी चाहिये तथा भोजन हल्का तथा सुपाच्य लेना चाहिए और बताई गई दवाइयों को नियमित और क्रमबद्ध लेना चाहिए तथा एक बात का विशेष ध्यान दे कि बिना चिकित्सक को पूछे दवाई लेना बंद नही करना चाहिए-

8- शरीर के साथ साथ मन का विश्राम भी बाहोत जरूरी होता है इसलिए चिकित्सा के दौरान थोड़ा ध्यान तथा मौन अवश्य रखना चाहिए-

9- इस तरह से योग्य चिकित्सा तथा धैर्य व सकारात्मक रवैया और उचित जीवनशैली से हर व्यक्ति एक स्वस्थ व संतुलित जीवन जी सकता है और रोग से मुक्त हो सकता है-

अगर आपके समाज या परिवार में कोई रोग या समस्या है तो आप मुझसे निसंकोच मेरे पते पर सम्पर्क कर सकते है नीचे मेरा पता है-

सम्पर्क पता-

Dr.Chetna Kanchan Bhagat

C- 002 KalpTaru,Opp Old Petrol Pump

Mira Bhayandar Road, Mira Road Dist-Thane

Mumbai- 401105 (Maharashtra)

Phone Numbers-

08779397519 (whatsup&call) 

Timing- 11Am To 7 Pm

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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