14 अक्तूबर 2017

डेंगू की प्राकृतिक चिकित्सा तथा रोकथाम


हिंदी में आयुर्वेद उपचार-Ayurveda treatment in Hindi


(अनुभूत प्राकृतिक व निराप्रद योग)


डेंगू बुखार आजकल हर जगह अपना उपद्रव फैलाए हुए है और बड़ी बेहरहमी से छोटे बच्चों से लेकर हर किसी को अपना शिकार बना रहा है बड़े आश्चर्य की बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा भी इसके आगे अपने घुटने टेकने पर मजबूर हो जाती है और सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि डेंगू होने का ठीकरा सिर्फ एडिस एजेप्टि या एडिस एलबोपिक्ट्स जैसी प्रजाति के मच्छरों पर फोड़ा जाता है जबकी असली वजह इसकी मनुष्य शरीर की कमजोर रोग-प्रतिरोधक शक्ति तथा दुर्बल जीवनी शक्ति है-

डेंगू की प्राकृतिक चिकित्सा तथा रोकथाम

आयुर्वेद, होमियोपैथी, निसर्गोपचार, सुजोक, एक्यूप्रेशर जैसी कई प्राकृतिक चिकित्साओं से आप बिना कोई साइड इफेक्टस के डेंगू का उपचार, रोगथाम तथा डेंगू ठीक होने के बाद हुए शारीरिक नुकसान या डेमेज की भरपाई कर सकते है-

डेंगू बुखार के अनूभूत प्रयोग व रोगथाम-


डेंगू की प्राकृतिक चिकित्सा तथा रोकथाम

आयुर्वेद में डेंगू जैसे संक्रमक रोगों के उपचार के लिए उत्तम जड़ी बूटियां मौजूद है जो आसानी से उपलब्ध है तथा प्रयोग में भी सरल है-

डेंगू के लिए योग-


गिलोय रस - 15 ml
पपीते के पत्ते का रस - 15 ml
तुलसी के पत्ते का रस - 10 ml
पुनर्नवा रस - 5 ml
गेंहू के ज्वारे का रस- 5 ml

इन सबको मिलाकर 15-15 ml की मात्रा में दिन में 2 से 3 बार पिलाए। इस योग से प्लेटिलेट्स बढ़ना शुरू हो जाएंगे और बुखार भी उतरने लगेगा तथा शरीर क्षीणता भी दूर होगी। ये योग संक्रमण दूर करेगा व शरीर मे नई पेशियां तथा रक्तकण बनने लगेंगे।

डेंगू बुखार तथा कम प्लेटिलेट्स हो तब क्या करें-


1- चिरैता और अजवाइन का काढ़ा सुबह और चिरैता शाम अजवाइन पीना है-

2- रात को 5 ग्राम चिरायता को 250 ml पानी मे भिगोकर रखे और सुबह इसे  उबालकर 125 ml बन जाए तब पिये-

3- शाम को 10 ग्राम अजवाईन को 250 ml पानी मे उबालकर 125 ml बन जाए तब छानकर पिये-

4- दोनों समय काढ़ा पीने के बाद 10-10 ग्राम गुड़ और मूंगफली चबा चबा कर खाएं। आप यह प्रयोग एक हफ्ते लगातार कीजिये-

5- डेंगू बुखार कम होगा, बदन दर्द, जोड़ो में दर्द, कमज़ोरी दूर होगी तथा प्लेटिलेट्स बढ़ना शुरू हो जाएंगे-

छोटे बच्चों को तथा कमजोर व्यक्तियों को भोजन के बाद गुड़ और मूंगफली जरूर खानी चाहिए। जिससे इम्युनिटी बढ़कर रोगथाम होती है यह ड़ेंगी का उत्तम उपचार  है जो अनुभूत है-

डेंगू के लिए काढ़ा-


गिलोय, नीम, तुलसी, पपीता, चिरायता इन सब पत्तों को 25-25 ग्राम लेकर 1 लीटर पानी मे उबालकर आधा रह जाए तब छान लें। यह काढ़ा 100ml की मात्रा में दिन में 3 बार पीए यह डेंगू की चिकित्सा तथा रोगथाम के लिए अनूभूत योग है-

घरेलू सहायक चिकित्सा-


डेंगू की प्राकृतिक चिकित्सा तथा रोकथाम

1- बकरी के दूध में आधा चम्मच हल्दी डालकर पीने से प्लेटिलेट्स बढ़ने लगते है-

2- डेंगू में पानी की जगह नारियल पानी पीने से तथा डेंगू के बाद आई कमजोरी में-नारियल पानी तथा नारियल की मलाई को मिश्री डालकर मिक्सर में पीस ले यह पीने से कमजोरी दूर होती है-

3- मौसम्बी का रस डेंगू बुखार को कम करता है-

4- अनार का रस, आंवले का रस, गेहूँ के ज्वारे का रस, संतरे का रस पीने से कमजोरी दूर होकर बल मिलता है-

5- डेंगू बुखार के बाद की कमजोरी, शरीर क्षीणता, अजीर्ण, अरुचि, कब्ज तथा मंदाग्नि दूर करने के लिए-

अजवाइन - 50 ग्राम
अलसी बीज - 30 ग्राम
शाह जीरा - 20 ग्राम

इन सबको अलग-अलग भूनकर 5 से 10 ग्राम भुना हुआ सेंधानमक मिलाकर रख ले सुबह शाम भोजन के बाद 1-1 चम्मच चबा चबा कर खाए, इससे मंदाग्नि व अरुचि दूर होकर भूख खुलेगी तथा शरीर को उचित पोषण मिलने में मदद होगी-


रोगथाम-


डेंगू की प्राकृतिक चिकित्सा तथा रोकथाम

जैसा कि हम सब जानते है कि रोगथाम चिकित्सा से निश्चित ही उत्तम मार्ग होता है डेंगू एक संक्रामक रोग है इसलिए अच्छी रोगप्रतिरोधक शक्ति के साथ साथ हमे ऐसी जीवन शैली अपनानी चाहिए जिससे हम और हमारा परिवार तथा हमारे आसपास का सम्पूर्ण परिसर इस रोग से दूर रह सके-

1- स्वच्छता रखे तथा मच्छरों के उपद्रव से बचे-

2- जब भी डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइनफ्लू जैसी बीमारियों का उपद्रव हो तब भोजन में तथा दाल सब्जियों में मेथी, अजवाइन, कलौंजी, शाहजीरा, का तड़का गाय के घी तथा लहसुन की 4-5 कलियां डालकर अवश्य लगाए-

3- घर मे मच्छर तथा अन्य बैक्टीरिया दूर करने के लिए सुबह 6 बजे तथा शामको 6 से 7 बजे के बीच जवरनाशक धूप अवश्य करे-

जवरनाशक धूप- 

गाय के गोबर के कंडे, गाय का घी एक चम्मच, कपूर, तुलसी पत्र , चिरायता, मेथी, हरी ईलायची, प्याज के सूखे छिलके, सरसो बीज, व लहसुन की कलियां जैसी चीजों को जलते कोयलों पर रखकर हवा देते हुए सारे घर मे घुमा-घुमा कर धुँआ करे जिससे डेंगू के मच्छर व अन्य बैक्टेरिया दूर होते है व औषधि युक्त धुँआ श्वास में जाकर इंफेक्शन तथा बुखार को मिटाता है-

4- नारियल तेल 100 ml में 10 बूंदे सिट्रोनेला आयल डालकर मिलाकर रख दे यह तेल सुबह शाम हाथ पैरों पर लगाने से Mosquito Bite मच्छरों के काटने से बचा जा सकता है-

5-  निम तैल- 10 ml
     लौंग तेल - 10 ml
     टी ट्री आयल - 10 ml
     नीलगिरी तैल- 10 ml
     शुद्ध कपूर - 10 ग्राम

इन सबको मिलाकर कांच की शीशी में रख दे इसकी 10-10 बूंदे डिफ्यूजर में डालकर या सरसों के तेल का दिया बनाकर उसमें इस मिश्रण की 10-10 बूंदे डालकर दिया जलाने से वातावरण शुद्ध होकर संकर्मिक रोगों से रोगथाम होती है-

सावधानियां-


तेज धूप से आकर ठंडा फ्रिज का पानी पीना, तेज धूप में काम करके पसीने से लथपत होकर सीधा बाथरूम में घुस कर स्नान करना, जैसी आम आदते हमारे शरीर की जीवन रक्षक प्रणाली को कमजोर करती है जिससे जीर्णज्वर, संक्रमण तथा दूसरे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है-

डेंगू का पता चलते ही आधुनिक चिकित्सा के साथ साथ दूसरी प्राकृतिक चिकित्सा भी शुरू कर देनी चाहिए अक्सर जब डॉक्टर्स और एलोपैथी नाकामयाब होती है तब लोगो का रुझान दूसरी चिकित्साओं की तरफ बढ़ता है लेकिन तब तक रोग अपनी पकड़ और मजबूत कर चुका होता है जिससे रोग ठीक होने में ज्यादा परेशानी हो सकती है-

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