26 अक्तूबर 2017

दर्द निवारक मोम चिकित्सा क्या है

Painkiller Wax Therapy


मोम एक प्राकृतिक खनिज या पेट्रोलियम पदार्थ है जिसे हम कई तरह से अपने दैनिक जीवन मे उपयोग कर रहै हैं मोमबत्ती तथा सौंदर्य प्रसाधनों का मुख्य घटक होने के साथ साथ मोम एक उत्तम औषधीय द्रव्य भी है..

दर्द निवारक मोम चिकित्सा क्या है

मोम नरम, मुलायम त्वचा पर निराप्रद होने के साथ साथ उत्तम उष्णता ग्राही पदार्थ है यानि उष्णता को धारण करने की या तापमान बनाए रखने की क्षमता मोम में दूसरे पदार्थों से ज्यादा है जिससे यह लंबे समय तक गर्म रह सकता है इसके इसी गुण के चलते इसका प्रयोग सौंदर्य वर्धन में तथा शरीर की अन्य समस्याओं के उपचार में किया जाता है-

सौंदर्य वर्धन के लिए मोम को पिघलाकर इसकी परते विशिष्ट ढंग से चहेरे पर लगाई जाती है तथा चहेरे पर मोम की मोटी परत जम के कड़ी हो जाए तब तक इसे लगाए रखा जाता है इस प्रक्रिया में मौसम तथा कमरे के तापमान के हिसाब से 15 से 25 मिनिट्स तक लगते है-

इसे लगाने से चहरे की त्वचा में नमी आती है, जिससे झुर्रियां कम होकर त्वचा मुलायम बनती है मोम की गर्मी से त्वचा के रोम छिद्र खुलते हैं जिससे त्वचा के अंदर छिपे मैल व विशैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे डीप क्लींजिंग मिलती है, त्वचा की मृत परत हटकर नए कोष बनने में मदद मिलती है मोम से त्वचा की एलेस्टिसिटी बढ़ती है, जिससे फेसलिफ़्टिंग इफेक्ट मिलता है तथा त्वचा की अंदरूनी तैल ग्रन्थियां अच्छे से कार्यशील बनती है जिससे त्वचा का रूखा पन दूर होता है चिकित्सा के तौर पर मोम फेशियल पाल्सी, मुँह के टेढ़ेपन में भी उपयोग होता है-

मोम के औषधीय उपयोग-


मोम सिर्फ सौंदर्य ही नही बढ़ाता किन्तु यह एक उत्तम दर्द निवारक भी है इसके विशिष्ट गुणों की वजह से  Wax Bath, Wax Dip, Wax Mask के रूप में इसका उपयोग फिजियोथेरेपी में बहुतयांश होता है-

दर्द निवारक मोम चिकित्सा क्या है

मोम रक्त संचार को बढ़ाता है, स्नायु दौर्बल्य दूर करता है, हड्डियो व स्नायुओं का कड़ा पन दूर करता है, यह स्नायुओं की एंठन व अतिसंकुचन को दूर करता है तथा सूजन भी कम करता है तथा मोम मरोड़ ओर मोच व दर्द में भी बेहद लाभदायक है-

यह चिकित्सा पद्धति, जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, ओस्टियो आथ्रेटिस, रहुमेटो आथ्रेटिस, यूरिक एसिड की वजह से जोड़ो का दर्द व ऐंठन, लकवा, स्नायुओं के दर्द जैसी समस्याओं पर बेहद कारगर व निराप्रद है-

कैसे लगाए मोम-


मोम को इलेक्ट्रिक हीटर, डबल बॉयलर या गैस सिगड़ी पर पिघलाकर उसमे रोगी की समस्याओं के हिसाब से एरोमा ऑयल्स, आयुर्वेदीक तेल या विभिन्न अर्क मिलाकर उसे त्वचा पर समस्या तथा शरीर के कौन से भाग पर कहाँ पर लगाना है उसके अनुरूप अलग-अलग तरीको से लगाया जाता है-

मोम लगाने के तरीके-

दर्द निवारक मोम चिकित्सा क्या है

1- त्वचा पर ब्रश से पिघला हुआ मोम लगाकर मोटी परत बनाई जाती है, तथा उसे जम कर कड़ा होने तक त्वचा पर लगाए रखा जाता है। मोम लगाने का यह तरीका Wax Mask कहलाता है यह तरीका खास कर एड़ी, कमर तथा कलाई व कोहनी जैसे भागों के लिए है-

2- पिघले हुए मोम में सूती गोझ पट्टी पानी से गीली करके फिर पूरी तरह निचोड़ कर उसका पानी निकालकर ताकि गोझ पट्टी नरम हो जाएफि र उसे पिघले हुए मोम में भीगोकर उसे त्वचा या शरीर के भागों पर एक के बाद एक पट्टी लगाकर मोटी परत बनाई जाती है व मोम जमकर कड़ा होने तक इसे त्वचा पर रखा जाता है इस पध्दति को Wax Dip कहते है यह तरीका घुटनों, गर्दन, कंधे,बाहें, व खासकर चहेरे के लिये उपयोग किया जाता है-

3- इलेक्ट्रिक टब में मोम पिघलाकर उसको सुसहय तापमान पर सेट कर दिया जाता है व रोगी को उसमे हाथ या पैर डुबोकर रखने को कहा जाता है आवश्यता अनुसार यह ट्रीटमेंट की अवधि 20 मिनिट से 40 मिनिट तक होती है इस पद्धति को Wax Bath कहा जाता है यह पध्दति हाथ ,पँजे, पैर,एड़ी, कोहनी जैसे अवयवों की समस्याओं के लिए उपयुक्त है-

इस तरह मोम चिकित्सा से हम घर बैठे दर्द निवारण कर सकते है जाड़ों में यह उपचार पद्धति वृध्दों व जोड़ों के दर्द वालों तथा यूरिक एसिड से ग्रस्त रोगियों के लिए वरदान स्वरूप है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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