8 अक्तूबर 2017

कमरदर्द(Slipdisc)का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc-


आपको सुनने में सामान्य सा लगने वाला कमरदर्द(Slipdisc)एक आम समस्या से कब महाव्याधि बन जाता है यह रोगी को पता ही नही चलता और अगर ठीक से इसका इलाज समय रहते ना करवाया जाए तो यह एक जटिल समस्या बन जाता है जिससे रोगी का दैनिक जीवन कष्टमय बन कर रह जाता है।

कमरदर्द का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

पुराना कमरदर्द(Slipdisc)या रीढ़ की हड्डियो में चोट या झटके लगने से होने वाला कमरदर्द आधुनिक चिकित्सा के लिए आज भी चुनौती के रूप में ही खड़ा है। पैन किलर्स(Pain Killers)तथा ऑपरेशन मात्र जैसे इलाज बताने वाले डॉक्टर्स भी तब निरुत्तर हो जाते है जब ऑपरेशन के बाद भी यह समस्या ज्यों की त्यों बनी ही रहती है तथा उसके साथ अन्य कॉम्प्लिकेशस(Complications)या समस्याए शुरू हो जाती है।

कमरदर्द या स्लिपडिस्क(Slipdisc)के कारण-


Wrong Posture यानि उठने बैठने तथा सोने का गलत तरीका
जेनेटिकली / अनुवांशिक हड्डिया कमजोर होना
गलत तरीके से व्यायाम करना
ऊंची एड़ी की सैंडल पहनना
किसी कारणवश शरीर को झटका या चोट लगने, मार लगना या गिर पड़ना
वायु विकार होना या पुरानी कब्ज की समस्या से
पौष्टिक आहार तथा उचित योग्य आराम की कमी से

सामान्य कमर दर्द को अनदेखा करने से तथा अयोग्य जीवनशैली तथा अयोग्य खान पान से वायु दोष बढ़ने लगता है तथा रीढ़ की हड्डियों तथा नसों को नुकसान पहुँचाता है जिससे L5 S1 बलजिंग याने रीढ़ की हड्डी के  Vertebra उभर के आगे आ जाते है जिससे उससे सलंग्न नसें दबने लगती है और स्लिपडिस्क होता है।

परेशानियां-


मांसपेशियों में खिंचाव तथा कड़ापन, सूजन
चलने फिरने, उठने बैठने में दर्द तथा असुविधा
कूल्हों में दर्द
पैरों में दर्द व सुन्न होना, नसे खींचना
पैरों में जकड़न व थकान

उपचार-


आयुर्वेद में कमरदर्द, स्लिपडिस्क, बलजिंग जैसी समस्याओं पर उत्तम शास्त्रोक्त औषधियां तथा चिकित्सा कर्म वर्णीत है-

स्वेदन कैसे करें-

कमरदर्द(Slipdisc)का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

निर्गुडी, नीलगिरी, एलोवेरा, हल्दी, मेथी तथा चित्रक मूल को उबालकर उसकी भाँप(Steam)कूल्हों, कमर तथा पैरों पर दी जाती है जिससे मांसपेशियों की कठिनता दूर होती है और ब्लॉक नसे खुलने में मदद होती है। भाँप से रोमछिद्र खुलते है तथा नसों में औषधि जल्दी जब्ज होती है और दर्द में राहत मिलती है।

स्नेहन कैसे करें-

कमरदर्द(Slipdisc)का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

स्नेहन याने तैल मसाज या मालिश करना होता है आयुर्वेद में उत्तम दर्द निवारक तैल वर्णीत है। जो रोगी की समस्या तथा प्रकृति के अनुसार उपयोग में लाए जाते है।

जिसने मुख्यतः नारायण तैल, पंचगुण तैल, बृहद विष्णु तैल, महाविष गर्भ तैल, महामाष तैल, महानारायण तैल, प्रसारिणी तैल जैसे औषधि युक्त तैल से कमर, कूल्हों तथा पैरों की उचित ढंग से मालिश की जाती है जिससे खून का दौरा(Blood Circulation)बढ़कर नसों की रुकावट दूर होकर दर्द में आराम मिलता है।


पिंड स्वेदनम-पोटली मसाज(Kizhi)-

कमरदर्द(Slipdisc)का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

षष्टिशाली नामक विशिष्ट चावलों को पेशंट की समस्या तथा प्रकृति के अनुसार औषधीय काढ़े में पकाकर  उसे सूती कपड़े में  पोटली बांधकर उस पोटली से गर्दन, कंधे, पीठ, कमर, कूल्हों, पैर तथा तलवों पर विशिष्ट तरीके से विशिष्ट दबाव देकर घुमाया जाता है जिससे पोटली से टपकने वाला गर्म औषधीय रस शरीर पर लेप की तरह छाते जाता है।

इस उपचार से मांसपेशियों का कड़ापन दूर होता है,शरीर लचीला बनता है,शरीर व हड्डियो तथा नसों की कमजोरी दूर होती है तथा अकड़न जकड़न दूर होकर दर्द कम होता है।

कटी बस्ती(Oil Pack)-

कमरदर्द(Slipdisc)का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

कमर या पीठ पर दर्द वाले हिस्से पर दशमूल तथा अन्य औषधियों से सिद्ध तैल को गीले आटे का गड्ढे नुमा बनाकर उस गड्ढे में यह तेल हल्का गर्म करके भरा जाता है और आधे घण्टे तक रखा जाता है जिससे त्वचा के रोम छिन्द्रों द्वारा तैल का शोषण होकर वात दोषों का शमन होता है व दर्द मिटता है।

आंतर बस्ती(Colon Irrigation)-

कमरदर्द(Slipdisc)का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

एरंड, तील तथा अन्य औषधी युक्त तैलो या रोगी की समस्या व प्रकृति अनुसार औषधीय काढ़ो को हल्का गर्म करके गुदा द्वार से शरीर मे छोड़े जाते है जिससे बड़ी आंत में धारण हुआ कुपित वायू का शमन होता है, कब्ज दूर होती है, आंतो को मजबूती मिलती है तथा पुराना मल व विषाक्त द्रव्यो का उत्सर्जन होकर शरीर शुद्ध होता है व दर्द से राहत मिलती है।

योगासन-

कमरदर्द(Slipdisc)का आयुर्वेदिक शास्त्रोक्त उपचार-Ayurvedic Scientific Treatment of Slipdisc

कमरदर्द में उचित व्यायाम करने से रीढ़ की हड्डी पुष्ट बनती है। उचित योगासनों से हम कमरदर्द दूर कर सकते है तथा कमरदर्द से बचाव भी कर सकते है। माँजरासन, भुजंगासन, नौकासन, ताड़ासन, धनुरासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन जैसे आसान  कमरदर्द में अत्यंत लाभदायक है।

सावधानीयां व घरेलू नुस्खे-


कमरदर्द हो तब कब्ज बिल्कुल ना रहने दे कब्ज हो तो रात को सोते समय 1 से डेढ़ चम्मच त्रिफला चूर्ण गर्म पानी से ले। सुबह शाम 1-1 चम्मच एरंड तैल गर्म पानी से ले।

सोते समय नर्म गड्ढे का उपयोग ना करते हुए कड़े सरफेस का उपयोग करे तथा पैर्रो के नीचे घुटने और जांघ के बीच मे 2 तकिये रखकर उसपर पैर रखकर सोए। जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव नहि पड़ता व दर्द कम होता है।

ज्यादा समय खड़े रहना, वजन उठाना, ऊंची एड़ी के चप्पल जूते पहनना, तेज गति वाहन पर सवारी करना जैसी चीजे ना करे।

हल्का व सुपाच्य आहार ही ले सोने से पूर्व कमर की हल्की मसाज व गर्म तौलिया से सिकाई करे।रेती की पोटली बनाकर उससे भी कमर व पैरों की सिकाई करे।

इस तरह आप कमरदर्द से राहत पॉ सकते है लेकिन अगर दर्द पुराना, व ज्यादा हो तो योग्य चिकित्सक से उचित सलाह व औषधि लेना अनिवार्य है।

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