15 अक्तूबर 2017

सुगंध चिकित्सा क्या है

What is Aroma Therapy

पाश्चात्य आधुनिक और भारतीय पारम्परिक द्र्ष्टिकोंण-


आजकल विदेशों तथा भारत मे भी अरोमा थेरेपी का प्रचलन व उपयोग काफी बढ़ा है विविध तरीको से विविध अरोमा ऑयल्स का उपयोग करना एक फैशन ट्रेंड हो गया है सौंदर्य प्रसाधन तथा फैशन इंडस्ट्रीज के विज्ञापनों के चलते आजकल लोगो मे सौंदर्य के प्रति सभानता बढ़ने के साथ साथ आर्गेनिक (Organic) या नैसर्गिक सौंदर्य वर्धन के प्रति भी रुझान बढ़ा है-

सुगंध चिकित्सा क्या है

विदेशों में लेटेस्ट मानी जाने वाली एरोमाथेरेपी दरअसल भारत मे सदियों से प्रचलित है सौभाग्य से भारत भूमि सुगंधित पुष्पों, फलों तथा अन्य औषधीय जड़ी-बूटीओ से हमेशा सपन्न रही है तथा हमारे ऋषि-मुनियों ने सदियों पहले ही सुगंध चिकित्सा में तथा मानव स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए इन औषधियों की उपयोगिता को अपनी अंतर दृष्टि से पहचान लिया था-

सुगंध चिकित्सा क्या है-


विविध प्राकृतिक फूलो, फलों, पत्तियों, जड़े,तथा तनों या बीज के अर्क या तैलो से निकलने वाली विशिष्ट सुगंध को विशिष्ट तरीको से उपयोग करके शरीर तथा मन की चिकित्सा तथा त्वचा व बालों का सौंदर्य वर्धन किया जाता है-

कैसे कार्य करती है सुगंध चिकित्सा-


इस चिकित्सा पद्धति में उपयोग किये जाने वाले  अर्को या तैलो को ज्यादातर सूंघ कर (Inhale) तथा त्वचा पर लगाकर Topical Application उपयोग किया जाता है-

विशिष्ट एरोमा ऑयल्स के ब्लेंडस को पानी से बने स्प्रे में डालकर, छिड़काव करके, क्रीम, शैम्पू, जेल, तैल में मिलाकर त्वचा पर लगाया जाता है, डिफ्यूजर या वेपोराइजर में डालकर उसकी भाँप ली जाती है तथा मेकअप के प्रसाधनों में भी इसके तैलो का उपयोग किया जाता है-

सुगंध चिकित्सा क्या है

हमारी नाक (Nose) हमारी सबसे शक्तिशाली घाणेन्द्रीय है।नाक का सीधा संबंध फेफड़े, जीभ,स्वादेन्द्रिय, दिमाग तथा नर्वस सिस्टम से है। इसलिए सुगंध हमारे मूड तथा नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक असर डालती है तथा अच्छी सुगंध से मन प्रसन्न रहता है।ताज़गी महसूस होती है, स्ट्रेस कम होता है तथा थकान दूर होकर अच्छी नींद भी आती है-

सुगंध चिकित्सा क्या है

हमारी त्वचा (Skin) हमारे शरीर की सबसे बड़ी व शक्तिशाली स्पर्शेन्द्रीय है इसे दूसरा फेफड़ा भी कहा जाता है क्योंकि त्वचा के असंख्य रोमकुप निरन्तर श्वास लेते रहते है तथा शरीर के विशैले तत्वों को पसीने के स्वरूप में शरीर से बाहर निकालते रहते है-

संशोधन से यह पता चला है कि यदि त्वचा पर एरोमा आयल लगाया जाए तो  त्वचा पर लगाए हुए एरोमा ऑयल्स के अवशेष 6 से 8 घण्टे में मूत्र में पाए  जाते है इसीलिये आधुनिक शोधों तथा टेक्निक्स के चलते आजकल शरीर के विविध हिस्सो पर विशिष्ट तैलो को लगाकर  विभिन्न शारिरिक, मानसिक व भावनात्मक समस्याओं का इलाज किया जाता है-

सूंघने की शक्ति का मानव शरीर व मन पर असर-


स्पर्श तथा सूंघना यह दो क्रियाओं का असर सिर्फ मानव ही नही किंतू किसी भी जीवित प्राणी के शरीर तथा मन पर गहराई से पड़ता है-

एक नवजात शिशु माता के स्पर्श तथा माता की गंध से ही उसकी पहचान करता है-

पशु पक्षी भी सूंघकर ही एक दूसरे की पहचान करते है तथा स्वंयम का हित अहित पहचान लेते है-

फलों को बिना काटे ही फल कच्चा है या पक्का इसकी पहचान की जा सकती है-

भोजन से उठने वाली महक दूर बैठे व्यक्ति की भी भूख जगा सकती है तथा उसे भोजन करने को लालायित कर सकती है-

अनुभवी वैदजन आज भी बिना पैथोलोजिकल रिपोर्ट्स के रोगी के मल, मूत्र या पसीने की गंध से ही मर्ज पहचान लेते है-

अस्पताल की विशष्ट गंध हमे मायूस व उदास बना देती है जबकि मंदिर से उठती गंध हमे प्रसन्न तथा शांत बनाती है-

सुगंध जहां हमे प्रसन्नता, ताजगी, शांति व पवित्रता का अहसास करवाती है और मन मष्तिष्क को सौम्यता देती है वही दुर्गंध अस्वच्छता, उद्वेग, अपवित्रता का अहेसास करवाती है और हमे रुग्ण बनाती है-

पारंपरिक प्रयोग-

सुगंध चिकित्सा क्या है

कई प्राचीन सभ्यताओ में सुगंध चिकित्सा के उल्लेख मिलते है भारत मे भी हम हमारे दैनिक जीवन मे सुगंध चिकित्सा के प्रयोग सदियों से करते आ रहे है-

सुगंधित पानी से स्नान करना, सुगंधित उबटन से स्नान करना, सुगंधित कैश तेल लगाना, बालों में गजरे तथा फूल लगाना, चंदन का तिलक लगाना, खस, चंदन, गुलाब जैसे  द्रव्यवों से सुगंधित पानी पीना, महेंदी लगाना, विविध इत्र लगाना, सुगन्धित इत्र व तैलो को छिड़कर  मांगलिक व धार्मिक कार्यो में घर व परिसर को पवित्र व प्रसन्न बनाना, धार्मिक अनुष्ठानों में ईश्वर को पुष्पांजलि अर्पण करना, धूप दीप व हवन करना, लोबान व अगरबत्तियां जलाना, कपूर जलाना, तथा भोजन में विविध मसालों का प्रयोग तथा मिष्ठानों में केसर, केवड़ा, इलायची जैसे सुगन्धित  द्रव्यो को उपयोग हम सदियों से करते आए है-

आधुनिक उपयोग-


सुगंध चिकित्सा का उपयोग आधुनिक जीवन मे भी प्रचुरता से हो रहा है विविध सौंदर्य प्रसाधनों के अलावा, साबुन, डिटर्जेंट, क्लीनिंग प्रोडक्टस, मोमबत्तियां, परफ्यूम्स, रुम स्प्रे, कार स्प्रे, चॉकलेट्स, च्युंगम तथा छोटे बच्चों की दवाओं में इसका उपयोग होने लगा है-

सुगंध चिकित्सा के लाभ-

सुगंध चिकित्सा क्या है-What is Aroma Therapy

सुगंध चिकित्सा सौंदर्य वर्धन के साथ साथ हमारी नर्वस सिस्टम को शांत करती है तथा हमारे मन को सुकून देती है उद्वेग, व स्ट्रेस को कम करती है, ब्लड प्रेशर को सामान्य करती है, दर्द निवारण करती है, अनिंद्रा दूर करती है, उदासीनता दूर करके प्रसन्नता देती है, शरीर व मन को ताजगी देकर टेशन मिटाती है विचलित मन को एकाग्रचित्त बनाती है तथा त्वचा सम्बंधित समस्याए, सौंदर्य समस्याए,बालों का झड़ना, डेंड्रफ, कील मुहाँसे, झुर्रियां, त्वचा का निस्तेज होना, जैसी समस्याओं को दूर करके हमारे स्वास्थ्य और सौंदर्य दोनों को बढ़ाती है-

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