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29 जनवरी 2018

गर्भाशय शोथ की आयुर्वेदिक चिकित्सा-Ayurvedic Treatment of Uterine Inflammation

Ayurvedic Treatment of Uterine Inflammation


पिछले लेखों में  हमने क्रमशः गर्भाशय शोध (Uterine Inflammation) के कारण लक्षण व उपचार तथा गर्भाशय शोध की घरेलू चिकित्सा इस विषय में चर्चा की आज हम आपको  गर्भाशय शोथ की आयुर्वेदिक चिकित्सा के बारे में बताएँगे-रोगी की प्रकृति आयु मान तथा रोग की व्याप्ति के अनुसार किया हुआ औषधि व चिकित्सा निर्धारण तथा योग्य परहेज वह योग्य आराम से इस समस्या से जल्द ही छुटकारा पाया जा सकता है-

गर्भाशय शोथ की आयुर्वेदिक चिकित्सा-Ayurvedic Treatment of Uterine Inflammation

गर्भाशय शोध (Uterine Inflammation) के लिए उपचार और प्रयोग-


उत्तर बस्ती-


इसे योनि प्रक्षालन या डूश भी कहा जाता है विभिन्न औषधियां को पानी में उबाल कर काढ़ा बनाया जाता है तथा उस काढें अंदरूनी अंगों तथा योनि की सफाई की जाती है इससे इन्फेक्शन (Infection) मिटता है योनि की जलन दर्द, छाले, खुजली तथा श्वेत प्रदर (White discharge ) जैसी समस्याओं में भी आराम मिलता है-

नीम के पत्ते- 100 ग्राम
हल्दी- 10 ग्राम 
चंदन- 10 ग्राम 
मेथी दाना- 5 ग्राम 
एलोवेरा का गूदा- 10 ग्राम 
आम के पत्ते- 10 ग्राम

उपरोक्त सभी चीजों को आप पानी में उबालें और जब पानी आधा बच जाए तब उस पानी से योनि मार्ग तथा अंदरुनी भागों की सफाई करें-इससे गर्भाशय शोथ (Uterine Inflammation) में आराम मिलता है-

अनुवासन बस्ती-


विविध औषधी तेलों को गुदा मार्ग से आंतों में धीरे-धीरे छोड़ा जाता है जिससे आंतों का कड़ापन, आंतों में जमा हुआ मैल, गैस तथा बिगड़े हुए दोष बाहर निकलते हैं व आंतों की सफाई होती है जिससे पेट और कमर में हल्कापन लगता है इस क्रिया में एरंड तेल एरंडी का तेल 50 ग्राम तथा तिल का तेल 50 ग्राम लेकर दोनों को मिलाकर हल्का गर्म करके शरीर में छोड़ा जाता है-

निरुह बस्ती-


विविध औषधीयो को पानी में उबाल कर काढ़ा बनाकर उससे एनिमा देकर आंतों की सफाई की जाती है जिससे इंफेक्शन, आंतों में संचित मेल तथा विषाक्त द्रव्यों का निकाल होता है जिससे शरीर में हल्कापन महसूस होता है-

इसके लिए नीम के पत्ते, मेथी दाना, नींबू का रस, एलोवेरा का गूदा, हल्दी जैसी चीजों को पानी में उबाल कर काढ़ा बनाया जाता है तथा इस काढे को हल्का गर्म हो तभी बस्ती या एनिमा दिया जाता है-

पिचू-


गर्भाशय शोथ की आयुर्वेदिक चिकित्सा-Ayurvedic Treatment of Uterine Inflammation

पिचू यानी तेल में डूबा हुआ रुई का या सूती नरम मुलायम कपड़े का छोटा सा गोला इसे विशेष रूपसे योनी मार्ग व गुदाद्वार में रखा जाता है इससे त्वचा का इन्फेक्शन दूर होता है तथा जननांगों की जलन, सूजन, खुजली, इन्फेक्शन जैसी समस्याएं भी लाभ होता है-

नीम का तेल- 5 ग्राम
एरंड तेल- 50 ग्राम

उपरोक्त इन दोनों तेलों को मिलाकर इनका पिचू धारण करने से गर्भाशय शोथ (Uterine Inflammation) में लाभ होता है-

इरेमिरादी तेल का पिचू योनी में धारण करने से गर्भाशय शोथ में लाभ होता है-

धूम्र सेवन-


धूम्र सेवन या कमर तथा जननांगों पर औषधीय युक्त धूनी या धुँआ लेने से गर्भाशय शोथ (Uterine Inflammation) में लाभ होता है-

इसके लिए नीम के पत्ते, सूखे आंवला, गूगल, चिरायता, लहसुन, तथा आम के पत्तों को मोटा मोटा कूटकर जलते अंगारों पर रखकर इसका धुआ किया जाता है इससे जननांगों का इंफेक्शन, खुजली, सूजन, तथा प्रदर जैसी समस्याएं मिटती है-

अन्य चिकित्सा-


कासनी की जड़- 6 ग्राम
गुल बनफशा- 6 ग्राम
सौफ- 6 ग्राम 
गजवा- 5 ग्राम
तुख्म कसुम- 5 ग्राम 
मुनक्का- 10 पीस

उपरोक्त सभी सामग्री 300 ग्राम पानी में रात को भिगोकर रखें सुबह इसे छानकर पीले इस प्रयोग से गर्भाशय की सूजन मिटती है-

रात को प्रतिदिन गर्म दूध में एक चम्मच शतावरी धृत या शतावरी कल्प का सेवन करने से गर्भाशय संबंधित समस्याओं में उत्तम लाभ मिलता है-
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