अब तक देखा गया

24 जनवरी 2018

श्वेतार्क गणपति का महत्व क्या है-What is Importance of Shwetaark Ganapati

What is Importance of Shwetaark Ganapati


आपने अपने आस-पास आक का पौधा देखा ही होगा ये सभी जगह देखने को मिल जाता है लेकिन सफ़ेद फूल वाला आक यानि कि श्वेतार्क (Shwetaark) या मदार या आंकड़ा का पौधा एक ऐसी वनस्पति है जो कम देखने में आती है जबकि नीली आभा वाले फूलो वाला आक का पौधा तो सर्वत्र ही दीखता है ऐसा माना जाता है की 25 वर्ष पुराने आक के पौधे की जडो में गणपति की आकृति स्वयमेव बन जाती है और जहाँ ऐसा पौधा होता है वहा सांप भी अक्सर होता है श्वेतार्क की जडो का तंत्र जगत में बहुत महत्व है और इसी सफ़ेद फूल वाले पौधे में निर्मित होता है इसी जड़ में निर्मित गणेश प्रतिमा को श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) कहा जाता है-

श्वेतार्क गणपति का महत्व क्या है-What is Importance of Shwetaark Ganapati

मेरा अनुभव-


आज आपको एक अपनी घटना से अवगत कराता हूँ ये बात है सन 1991की है जब हम इलाहाबाद में रसूलाबाद में प्रवास के दौरान रहा करते थे उस समय मुझे जड़ी बूटी प्राप्त करने की विशेष लालसा रहा करती थी सुबह -सुबह गंगा स्नान के बाद आस पास उग रहे पौधो का अन्वेषण किया करता था तभी मुझे किसी के द्वारा ज्ञात हुआ कि फाफामऊ पुल के उस पार तीन किलोमीटर एक गाँव में बीस साल पुराने पांच सफ़ेद आक (श्वेतार्क) के पेड़ है बस फिर क्या था निकल गया उसकी खोज में और वहां जाकर हमने गाँव के उस प्रतिष्ठित परिवार से बात की कि बिना पौधे को नुकसान पंहुचाये अगर हम इसकी तीन इंच जड़ ले ले तो आपको कोई एतराज तो नहीं है आखिर कार वे बड़ी मान मनौवल के बाद राजी हुए किसी तरह उन्हें राजी कर और दुबारा आने का वादा ले कर मै वहां से वापस आ गया-

चूँकि शुभ मुहूर्त देखकर मुझे उसकी जड़ को लाना था इसलिए शुभ-मुहूर्त में एक दिन पहले जाकर शाम को पौधे की पूजा अर्चना की और निमंत्रण दे कर आ गया कि "हे अदभुत वनस्पति देवता कल मै आपको लेने आऊंगा" और दूसरे दिन पौधे के आस पास तीन फीट गहरा गड्डा करके एक सुंदर सी जड़ का टुकड़ा लिया और उन सज्जन को धन्यवाद दे कर वापस घर आकर एक कारपेंटर से उसमे गणेश की एक प्रतिमा निर्मित करवाई तथा विधि विधान से उसे पूजा स्थल पर स्थापित किया वो प्रतिमा हमारे पास बदकिस्मती से एक साल ही रही अचानक ही गंगा जी की बाढ़ आई और नदी के पास कमरा होने के कारण मेरी बहुत सी कीमती चीजो के साथ श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) को भी अपने साथ बहा कर ले गई आप इसे मेरी बदकिस्मती ही कह सकते हैं-

लेकिन आप यकीन माने मुझे आज तक इस बात की बहुत ग्लानि है जब तक श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) की प्रतिमा हमारे घर में स्थापित रही उसका प्रभाव ये था कि किसी भी माह मुझे आर्थिक तंगी महसूस नहीं हुई धन का आवगमन कहाँ से होता था ये भी मुझे पता नहीं चलता था और घर में जैसे साक्षात अन्नपूर्णा का वास था मानसिक शान्ति पूर्ण रूप से थी-

मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि जिसके भी घर में श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) की इस प्रतिमा की स्थापना होगी सच माने उसके घर में धन-वैभव की कभी कमी नहीं होती और सुख-शान्ति का निवास होता है मुझे आज तक इस बात का अफ़सोस है कि प्रतिष्ठापित प्रतिमा जल विलय हो गई मुझे शायद उतने ही दिन श्वेतार्क गणपति की आराधना का फल मिलना था और फिर अचानक ही मुझे वापस आना पड़ा-

श्वेतार्क गणपति का महत्व क्या है-What is Importance of Shwetaark Ganapati

श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) की महिमा-


1- शास्त्रों में श्वेतार्क के बारे में कहा गया है "जहां कहीं भी यह पौधा अपने आप उग आता है उसके आस-पास पुराना धन गड़ा होता है" जिस घर में श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) की जड़ रहेगी वहां से दरिद्रता स्वयं पलायन कर जाएगी-इस प्रकार मदार का यह पौधा मनुष्य के लिए देव कृपा, रक्षक एवं समृद्धि दाता भी है-

2- सफेद मदार की जड़ में गणेशजी का वास होता है कभी-कभी इसकी जड़ गणशेजी की आकृति ले लेती है इसलिए सफेद मदार की जड़ कहीं से भी प्राप्त करें और उसकी श्रीगणेश की प्रतिमा बनवा लें-उस पर लाल सिंदूर का लेप करके उसे लाल वस्त्र पर स्थापित करें-यदि जड़ गणेशाकार नहीं है तो किसी कारीगर से आकृति बनवाई जा सकती है शास्त्रों में मदार की जड़ की स्तुति इस मंत्र से करने का विघान है-

   चतुर्भुज रक्ततनुंत्रिनेत्रं पाशाकुशौ मोदरक पात्र दन्तो।
   करैर्दधयानं सरसीरूहस्थं गणाधिनाभंराशि चूडामीडे।।

3- गणेशोपासना में साधक लाल वस्त्र, लाल आसान, लाल पुष्प, लाल चंदन, मूंगा अथवा रूद्राक्ष की माला का प्रयोग करें-नेवैद्य में गुड़ व मूंग के लड्डू अर्पित करें- "ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्" मंत्र का जप करें- श्रद्धा और भावना से की गई श्वेतार्क की पूजा का प्रभाव थोड़े बहुत समय बाद आप स्वयं प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने लगेंगे-

4- श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) एक बहुत प्रभावी मूर्ति होती है जिसकी आराधना साधना से सर्व-मनोकामना सिद्धि, अर्थ-लाभ, कर्ज मुक्ति, सुख-शान्ति प्राप्ति, आकर्षण प्रयोग, वैवाहिक बाधाओं, उपरी बाधाओं का शमन, वशीकरण, शत्रु पर विजय प्राप्त होती है-

5- यद्यपि यह तांत्रिक पूजा है यदि श्वेतार्क की स्वयमेव मूर्ति मिल जाए तो अति उत्तम है अन्यथा रवि-पुष्य योग में पूर्ण विधि-विधान से श्वेतार्क को आमंत्रित कर रविवार को घर लाकर तथा गणपति की मूर्ति बना विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर अथवा प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति किसी साधक से प्राप्त कर साधना/उपासना की जाए तो उपर्युक्त लाभ शीघ्र प्राप्त होते है यह एक तीब्र प्रभावी प्रयोग है श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) साधना भिन्न प्रकार से भिन्न उद्देश्यों के लिए की जा सकती है तथा इसमें मंत्र भी भिन्न प्रयोग किये जाते है-

श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) के विभिन्न प्रयोग-


सर्वमनोकामना की पूर्ति हेतु श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) का पूजन बुधवार के दिन प्राराम्भ करे तथा पीले रंग के आसन पर पीली धोती पहनकर पूर्व दिशा की और मुह्कर बैठे-एक हजार मंत्र प्रतिदिन के हिसाब से 21 दिन में 21 हजार मंत्र जप मंत्र सिद्ध चैतन्य मूंगे की माला से करे और पूजन में लाल चन्दन, कनेर के पुष्प, केशर, गुड, अगरबत्ती, शुद्ध घृत के दीपक का प्रयोग करे-

मन्त्र-   


   "ऊँ वक्रतुण्डाय हुम्"

1- घर में विवाह कार्य, सुख-शान्ति के लिए श्वेतार्क गणपति (Shwetaark Ganapati) प्रयोग बुधवार को लाल वस्त्र, लाल आसन का प्रयोग करके प्रारम्भ करे-इक्यावन दिन में इक्यावन हजार जप मंत्र का करे, मुह पूर्व हो, माला मूगे की हो तथा साधना समाप्ति पर कुवारी कन्या को भोजन कराकर वस्त्रादि भेट करे-

2- आकर्षण प्रयोग हेतु रात्री के समय पश्चिम दिशा को लाल वस्त्र-आसन के साथ हकीक माला से शनिवार के दिन से प्रारंभ कर पांच दिन में पांच हजार जप मंत्र का करे-पूजा में तेल का दीपक, लाल फूल, गुड आदि का प्रयोग करे-उपरोक्त प्रयोग किसी के भी आकर्षण हेतु किया जा सकता है-

3- सर्व-स्त्री आकर्षण हेतु श्वेतार्क गणपति प्रयोग, पूर्व मुख, पीले आसन पर पीला वस्त्र पहनकर किया जाता है तथा पूजन में लाल चन्दन, कनेर के पुष्प, अगरबत्ती, शुद्ध घृत का दीपक का प्रयोग होता है तथा मूगे की माला से इक्यावन दिन में इक्यावन हजार जप मंत्र का किया जाता है जिसे बुधवार से प्रारंभ किया जाता है-

4- स्थायी रूप से विदेश में प्रवास करके विवाह करने अथवा अविवाहित कन्या का प्रवासी भारतीय से विवाह करके विदेश में बसने हेतु अथवा विदेश जाने में आ रही रूकावटो को दूर करने हेतु श्वेतार्क गणपति का प्रयोग शुक्ल पक्ष के बुधवार से प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में प्रारम्भ करे-पूर्व दिशा की और लाल ऊनी कम्बल ,पीली धोती के प्रयोग के साथ मंत्र सिद्ध चैतन्य मूंगे की माला से 21 दिन में सवा लाख जप मंत्र का करे तथा पूजन में लाल कनेर पुष्प ,घी का दीपक ,अगरबत्ती ,केशर ,बेसन के लड्डू ,लाल वस्त्र ,लकड़ी की चौकी ,का प्रयोग करे तथा बाइसवे दिन हवंन कर पांच कुवारी कन्याओं को भोजन कराकर वस्त्र-दक्षिणा दे विदा करे इसके उपरान्त मूगे की माला आप अपने गले में धारण करे -

5- कर्ज मुक्ति हेतु श्वेतार्क गणपति का प्रयोग बुधवार को लाल वस्त्रादि-वस्तुओ के साथ शुरू करे और 21 दिन में सवा लाख जप मंत्र का करे मूंगे अथवा रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की मंत्र सिद्ध चैतन्य माला से करे साधना के बाद माला अपने गले में धारण करे तथा पूजन में लाल वस्तुओ का प्रयोग करे और दीपक घी का जलाए-

6- श्वेतार्क गणपति की साधना में एक बात ध्यान देने की है की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद मूर्ति चैतन्य हो जाती है और उसे हर हाल में प्रतिदिन पूजा देनी होती है साधना समाप्ति पर यदि रोज पूजा देते रहेगे तो चतुर्दिक विकास होता है यदि किसी कारण से आप पूजा न दे सके या कोई भी सदस्य घर का पूजा न कर सके तो मूर्ति का विसर्जन कर दे-

विशेष-


उपरोक्त प्रयोगों में मंत्र भिन्न-भिन्न प्रयोग होते है-जिन्हें न देने का कारण सिर्फ इनके दुरुपयोग से इनको बचाना है-यह प्रयोग तंत्र के अंतर्गत आते है अतः सावधानी आवश्यक है इसलिए मन्त्र यहाँ नहीं लिखे गए है क्युकि तंत्र के मन्त्र अचूक होते है और आज वैमनस्य के कारण लोग हित की जगह दूसरों का अहित कर देते है सिर्फ जो पात्रता के योग्य होते है ये मन्त्र गुरु की देखरेख में ही शिष्य को दिया जाता है-वैसे सभी मन्त्र शंकर भगवान् द्वारा कीलित अवस्था में है जिनका उत्कीलन गुरु द्वारा शिष्य से करवा कर मन्त्र को प्रभावी बनाया जाता है पुस्तक में दिए गए मन्त्र चैतन्य अवस्था में नहीं होते है इसलिए उसका कोई प्रभाव नहीं होता है जबकि मन्त्र शक्ति आज भी पूर्वकाल की तरह ही गुण सम्पन्न है-

प्रस्तुती- Satyan Srivastava

loading...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Information on Mail

Loading...