अब तक देखा गया

27 जनवरी 2018

गर्भाशय शोथ के कारण लक्षण व उपचार-Cause and Symptoms of Swollen Uterus

Cause and Symptoms of Swollen Uterus


स्त्री रोग में सबसे आम या बहुतायत प्रमाण में देखे जाने वाली समस्या गर्भाशय शोथ (Swollen Uterus) की है यानी बच्चेदानी में किन्ही कारणों से सूजन आ जाना है कई बार जागरूकता व जानकारी की कमी की वजह से या संकोच के कारण महिलाए व लड़कियां इस तकलीफ को अनदेखा कर देती है जिसकी वजह से यह तकलीफ कम होने की वजह और बढ़ती जाती है-

गर्भाशय शोथ के कारण लक्षण व उपचार-Cause and Symptoms of Swollen Uterus

शरीर के प्रति योग्य देखभाल, शरीर की योग्य साफ सफाई, अच्छा खानपान, बुरी आदतों का त्याग तथा योग्य जीवनशैली व योग्य चिकित्सा द्वारा इस समस्या से पूर्णता छुटकारा पाया जा  सकता हैं आज हम आपको गर्भाशय की सूजन (Swollen Uterus) के कारण, लक्षण,तथा होने वाली समस्या के बारे में चर्चा करेंगे-

गर्भाशय की नलिकाए तथा अंडाशय पर सूजन का मुख्य कारण योनि मार्ग द्वारा फैला हुआ कीटाणु संसर्ग (Infection) ही है जिसे आम भाषा में इंफेक्शन कहा जाता है-

यह इंफेक्शन (Infection)  गुप्त रोग, गर्भपात, योग्य शुचिता का ध्यान ना रखते हुए की गई प्रसूति तथा अस्वस्थ व असुरक्षित शारीरिक संबंध से स्त्री के प्रजनन अंगों में फैलता है कभी-कभी प्रसूति के समय की गई लापरवाही या प्रसूति कार्य में उपयोग होने वाले साधनों की अस्वच्छता की वजह से भी कीटाणु संसर्ग (Infection)  फ़ैल कर गर्भाशय तक पहुंच जाते हैं-

एक अन्य मुख्य कारण में स्त्री प्रजनन अंगों में रहा हुआ नैसर्गिक स्त्राव जो बाहरी कीटाणु या किसी भी तरह के इंफेक्शन (Infection) को अंदर की तरफ बढने से रोकता है उसका असर कम हो जाता है जिसकी वजह से इन्फेक्शन अंदरूनी अंगों तक पहुंच जाता है और धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ने लगती है जिससे जननांग में सूजन तथा दर्द की समस्या होने लगती हैं-

सस्ते गर्भनिरोधक जिसमें हल्की कक्षा का लेटेस्ट रबड़ उपयोग हुआ हो, अस्वच्छ अंतर्वस्त्र, स्नानादि में लापरवाही, योनि मार्ग की साफ सफाई में लापरवाही, महावारी के समय की हुई लापरवाही की वजह से जननांगों में इन्फेक्शन या सड़न या छाले पैदा होते हैं और धीरे-धीरे अगर समय रहते इसका इलाज ना किया जाए तो यह इंफेक्शन अंदरूनी अंगों तक फैल कर गर्भाशय तक पहुंच जाता है-

इसके साथ कभी-कभी आंतों में सूजन, अपेंडिक्स की समस्या, फेफड़ों का टीबी और कंठ माल जैसे रोगों की उचित चिकित्सा के अभाव में इनके कीटाणु भी गर्भाशय की तरफ आकर्षित होते हैं तथा गर्भाशय में पहुंचकर समस्या खड़ी कर देते हैं जिससे गर्भाशय में सूजन (Swollen Uterus) आ जाती है-ऐसे कारणों में गर्भाशय में ऊपर से नीचे की तरफ सूजन आती है-जबकि योनी मार्ग से हुए संसर्ग (Infection) या कीटाणु प्रवेश की वजह से गर्भाशय में नीचे से उपर की तरफ सूजन आती हें-

गर्भाशय शोथ (Swollen Uterus) की वजह से होने वाली समस्याएं या गर्भाशय शोथ के लक्षण-


1- अनियमित माहवारी व पीड़िता को माहवारी में ज्यादा रक्त स्त्राव होता है तथा साथ में जिन स्त्रियों में गर्भाशय की सूजन की शुरूआत नीचे से ऊपर की तरफ होती है यानी योनि मार्ग से अगर किन्ही कारणों से इन्फेक्शन (Infection) हुआ है ऐसी स्त्रियों को ज्यादातर श्वेत प्रदर (WhiteDischarge) की समस्याएं देखने को मिलती है-

2- ऐसी स्त्रियों में साथ ही साथ पैरों में दुखना, पैरों की पिंडलियों में दर्द, कमर दर्द (Back Pain) तथा महावारी के समय घबराहट होना जैसी समस्याएं होती है-

3- यह बीमारी अगर ज्यादा पुरानी हो जाए तो गर्भधारण तथा प्रसूति में भी कॉन्प्लिकेशन हो सकते हैं अगर सूजन ज्यादा हो तो स्त्री प्रजनन अंग एक दूसरे से या नजदीकी आंतरिक अवयवों से या आंतों से चिपक जाते हैं जिसकी वजह से पैरों में हल्का हल्का दर्द होने लगता है-

4- सूजन की वजह से मूत्राशय या ब्लैडर पर दबाव आने से भी तकलीफ होने लगती है जिससे पेशाब में जलन (Dysuria) तथा पेशाब का रुक-रुक के आना जैसी समस्याएं होती हैं-

गर्भाशय शोथ के कारण लक्षण व उपचार-Cause and Symptoms of Swollen Uterus

5- स्त्री को हर वक्त पेढू या पेट के निचले हिस्से में वजन लगना और हल्का दर्द बने रहना तथा कमर में भी दर्द रहना जैसी समस्याएं आम होती है जिससे पीड़िता बेहद परेशान तथा निराश होती है-

6- हरदम पेट में दर्द रहने की वजह से या शरीर में थकान व कमजोरी लगने की वजह से तथा योनि में जलन या मूत्र विसर्जन के समय होने वाली जलन से पीड़िता बेहाल रहती है जिससे उसको मानसिक तकलीफ भी होने लगती है हरदम अनमनासा रहना, बेचैन रहना, उदास रहना तथा मूड खराब रहना जैसी तकलीफ है होने लगती है इन समस्याओं से पीड़िता तरोताजा नहीं महसूस करती व चेहरा भी कांतिहीन व निस्तेज लगने लगता है-

चिकित्सा व सावधानियां-


1- गर्भाशय शोथ (Swollen Uterus) की चिकित्सा में सावधानी रखना बेहद जरूरी है प्राथमिक अवस्था में अगर उचित सावधानी रखें तथा योग्य चिकित्सा ले तो अवश्य ही फायदा होता है-

2- इस रोग के में स्त्रियों ने ज्यादा वजन उठाना, भारी व्यायाम करना, ज्यादा देर भूखे रहना, अति मैथुन तथा भारी आहार का सेवन करना त्याज्य माना गया हें-

3- योग्य व सुपाच्य आहार तथा योग्य विश्राम करना बेहद जरूरी है ऐसी समस्याओं में व्यक्तिगत साफ सफाई का भी बेहद ध्यान रखना चाहिए-

4- इस समस्या में विभिन्न औषधीय काढ़ों से यौन अंगों की सफाई या उत्तरबस्ती लेनी चाहिए-

5- कब्ज के निवारण के लिए हर्बल औषधि युक्त काढे से एनिमा भी जरूर लेना चाहिए गर्भाशय की सूजन (Swollen Uterus) से गर्भाशय का बढ़ा हुआ आकार जो आंतों से जा चिपकता है व पेट में दर्द उत्पन्न करता है एनिमा लेने से आंतों में फंसा मैल तथा गैस निकल जाती है जिससे पेट में हल्का पन लगता है तथा आंतों का फुला आकार कम होता हें जिससे गर्भाशय पर आंतों की रगड या दबाव कम होकर पेडू दर्द की समस्या में लाभ मिलता है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

loading...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Information on Mail

Loading...