अब तक देखा गया

11 फ़रवरी 2018

स्वास्थ वर्धक अमृत शर्करा कल्प-Amrut Sharkara Kalp for Health


हमारे ऋषि मुनियों ने अपने दिव्य दृष्टि से मानव शरीर तथा मन के रहस्य तथा उन को स्वस्थ रखने की कला को उजागर किया प्राचीन समय में औषधियों तथा प्रकृति की प्राकृतिक संपदाओं की मदद से मानव जीवन में स्वास्थ्य-सौंदर्य तथा शांति की बढ़ोतरी कैसे हो इस विषय पर हमारे ऋषि-मुनियों तथा वेदों की उस समय की हुई रिसर्च का लोहा आज भी मोर्डन साइंस मानता है-

आज हम आपको ऐसे ही अमृत तुल्य योग के बारे में बताएंगे जो बनाने में बेहद आसान है तथा गुण व प्रयोग में बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ है-

क्या हैं अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp)-


स्वास्थ वर्धक अमृत शर्करा कल्प-Amrut Sharkara Kalp for Health

अमृत शर्करा कल्प याने चंद्रकिरण में रात भर रखकर चंद्र की अमृत चिकित्सकीय किरणों से सिद्ध की हुई शर्करा (Rock sugar) या मिश्री-इस योग के गुण तथा उपयोग समझने के लिए सबसे पहले हमें मानव शरीर तथा मन पर होने वाले चंद्र के प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी लेना बेहद जरूरी है अगर हम चंद्र की मानव जीवन पर होने वाले असर, उपयोगिता तथा उसकी पवित्रता को ठीक से समझ पाए तो हम इस योग का उपयोग बेहद अच्छे तरीके से कर पाएंगे यह योग ना सिर्फ शरीर पर लाभ करता है किंतु मन पर भी इसका बहुत ही हितकर प्रभाव पड़ता है-

आजकल जहां हर कोई व्यक्ति मानसिक तकलीफ से अंदर ही अंदर जूझ रहा है ऐसे समय में यह आसान सा कल्प उनके लिए अमृत समान साबित हो सकता है इस लेख में हम आपको विस्तार से इस बारे में जानकारी देंगे-

मानव के जीवन में तथा शरीर और मन पर चंद्रमा का प्रभाव-


1- आयुर्वेद तथा प्राचीन वेदों के अनुसार चंद्रमा (Moon) के स्पंदन मानव के मन को प्रभावित करते हैं यही नहीं यह मानव के अंतर्मन (Subconscious Mind) को भी बेहद सूक्ष्म तरीके से आंदोलित करके प्रभावित करते हैं-

2- भारतीय सामुद्रिक शास्त्र यानी ज्योतिष शास्त्र में भी चंद्रमा को मन (Mind) का कारक माना गया है भारतीय ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा की गति या वेग सूर्य व नक्षत्रों के तुलना में ज्यादा रहती है इसीलिए ज्योतिष में चंद्रमा (Moon) को कल्पनाओं का कारण या मानवीय कल्पनाओं पर प्रभाव करने वाला माना गया है क्योंकि इंसान के विचारों की गति प्रकाश की गति से भी तेज माने गई इसीलिए वेदों में चन्‍द्रमा मनसो जात: (चन्‍द्रमा मानव मन की तरह) कहा गया है यानी चन्‍द्रमा को मन का स्‍वामी कहा गया है और फलित ज्‍योतिष के अनुसार माना जाता है कि चन्‍द्रमा ही मानव मन को सर्वाधिक प्रभावित करता है-

स्वास्थ वर्धक अमृत शर्करा कल्प-Amrut Sharkara Kalp for Health

3- आयुर्वेद व ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा का मन से घनिष्ठ संबंध है आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में भी चंद्रमा (Moon) के मानव मन, व शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव को सही माना गया है जिस तरह पूर्णिमा तथा अमावस्या को सागर की तरंगों में विशिष्ट प्रभाव व वेग देखा जाता है उसी तरह मानव मन में भी विचारों, भावनाओं तथा उन्माद की लहरें देखने को मिलती है चंद्र का घटना या बढना समुद्र में ज्वार भाटा, मनुष्य मन में भावनाओं की लहरे तथा पशु पक्षियों में भी विशिष्ट प्रकार का प्रभाव छोड़ता है यह एक रहस्य है की अमावस्या को नकारात्मक घटनाओं वृद्धि पाई जाती है-

4- भारतीय ज्योतिष ने जहां चंद्रमा को जल तत्व का कारक ग्रह माना है वही आयुर्वेद में इसे शीतलता प्रदान करने वाला माना गया हैं-

5- आयुर्वेद के मुताबिक चंद्र की किरणें शीतल, मृदु, सौम्य, दाह नाशक तथा मन को मोहने वाली,  ह्रदये के लिए हितकारी, नेत्र ज्योति वर्धक, मेधा वर्धक, स्मृति वर्धक व शरीर तथा मन को आराम देने वाली मानी गई हैं-

6- इसीलिए जब कोई औषधि चंद्र किरणों से सिद्ध की जाती है तब उसके गुण धर्म में औषधीय तत्वों की वृद्धि पाई जाती है साथ ही साथ उसका गुणधर्म शीतल, सौम्य (Calm) तथा उन्माद नाशक हो जाता है-

मिश्री के औषधीय गुण-


1- आयुर्वेद में मिश्री (Rock sugar) का शर्करा, खांड या सीता के नाम से उल्लेख किया गया है आयुर्वेद के मुताबिक मिश्री मधुर, वीर्य बढ़ाने वाली, नेत्र के लिए हितकारी, पुष्टि देने वाली, शीतल, वायु व पित्तको नाश करने वाली, बल देने वाली तथा वमन को मिटाने वाली है, मुंह का स्वाद बढ़ाने वाली, रक्त के दोष मिटाने वाली, जलन, मूर्छा, वमन, बेहोशी व ज्वर को मिटाने वाली ओज वर्धक है-

स्वास्थ वर्धक अमृत शर्करा कल्प-Amrut Sharkara Kalp for Health

2- महर्षि चरक, महर्षि सुश्रुत तथा महर्षि भावमिश्र ने शर्करा (Rock sugar) को अत्यंत मधुर, पुष्टिकारक,  बल देने वाली वीर्यवर्धक, प्यास को शांत करने वाली तथा वमन को मिटाने वाली, रक्तविकार तथा रक्तपित्त को मिटाने वाली, पुष्टि देने वाली, विष का नाश करने वाली, मैथुन शक्ति बढ़ाने वाली तथा निंद्रा लाने वाली कहां गया हैं-

3- मिश्री के इन्ही औषधीय गुणों की वजह से मिश्री का धार्मिक अनुष्ठानों में तथा पूजा पाठ के बाद दिए जाने वाले प्रसाद में समावेश किया गया है-

4- जब इस मिश्री को चंद्र (Moon) किरणों में सिद्ध किया जाता है तब उसके उपयुक्त गुणों में दुगनी वृद्धि होती है मिश्री  के अपने गुणों के साथ-साथ उसमें चंद्रकिरण (Moon Light) के गुण भी सम्मिलित हो जाते हैं जिससे अमृत शर्करा कल्प बेहद औषधीय, पौष्टिक तथा तन-मन के रोगों को हरने वाला उत्तम गुणकारी योग बनता है-
loading...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Information on Mail

Loading...