18 फ़रवरी 2018

नकारात्मक उर्जा हो तो पूजा में भी बाधा होती है


सामान्यता हममें जो भी आस्तिक हैं वे अपने घर-परिवार-कार्यस्थल आदि पर सामान्य पूजा-पाठ (Worship) करते रहते हैं तथा ईश्वर में श्रद्धा रखते हैं और बिना किसी विशेष उद्देश्य के अपनी मंगलकामना के साथ अपनी क्षमता के अनुसार अपने ईष्ट आदि को प्रसन्न रखने का प्रयास भी करते हैं-

लोग समय-समय पर मंदिर, दरगाह, गिरजाघर भी आते जाते रहते हैं यहां तक तो सब सामान्य चलता रहता है और कोई विशेष परिवर्तन नहीं महसूस होता है जो भाग्य में है जो ग्रह स्थितियां होती हैं मिलता रहता है लेकिन कभी कम तो कभी पूरा मिलता है सामान्य व्यक्ति समझ भी नहीं पाता है कि कम मिल रहा है या फिर पूजा (Worship) का फल पूरा मिल रहा है-

नकारात्मक उर्जा हो तो पूजा में भी बाधा होती है

किन्तु जब कभी किसी विशिष्ट उद्देश्य के साथ संकल्पित हो कोई पूजा-अनुष्ठान-साधना शुरू की जाती है अनेकानेक बाधाएं शुरू हो जाती हैं घर में कलह हो सकता है आपके कार्यों में व्यवधान हो सकता है दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं तथा अशुभ-अमंगल शकुन होने लगते हैं पूजा-साधना के समय लगता है जैसे कोई और भी हो साथ में कोई आगे से चला गया या कोई पीछे से चला गया है कभी-कभी आपको अनदेखी सी छाया सी महसूस हो सकती है या घर के किसी कोने में कभी आग लग सकती है और भी बहुत कुछ डरावना हो सकता है ऐसे में व्यक्ति घबरा जाता है और पूजा-साधना बीच में छोड़ने की सोचने लगता है क्या आप जानते है कि ऐसा कब और क्यों होता है-आइये समझे क्यों होता है ऐसा और इस पर विचार करें तो कुछ कारण समझ में आते हैं-

सबसे मुख्य कारण इसका होता है की जब आप पूजा-आराधना-साधना एक निश्चित संकल्प और पद्धति के साथ शुरू करते हैं तो मानसिक बल, मंत्र, पूजा पद्धति, ईश्वरीय ऊर्जा के आगमन से सकारात्मक ऊर्जा का आस-पास संचार होने लगता है-

नकारात्मक उर्जा हो तो पूजा में भी बाधा होती है

ऐसे में अगर आपके आसपास नकारात्मक ऊर्जा का संचार या छाया हुई तो उसे सकारात्मकता से कष्ट होता है और वह उत्पात या उपद्रव शुरू कर देता है जिससे उसकी उग्रता से स्थितियां उपद्रवकारी होने लगती हैं एक समस्या शुरू होने से दूसरी समस्याएं क्रमशः उत्पन्न होने लगती हैं और व्यक्ति घबरा जाता है और सोचने लगता है उससे जरुर गलती हो रही है और स्थितियां बिगड़ रही हैं पर मूल कारण वह नहीं समझ पाता है कि कोई और शक्ति है जो नही चाहता की परिवर्तन हो अतः वह ऐसा कर रहा है क्योकि परिवर्तन और सकारात्मकता के संचार से उसे स्थान छोड़ना पड़ जायेगा-

यद्यपि इससे इनकार नहीं किया जा सकता की कभी-कभी ऐसा पूजा-पाठ की गलतियों अथवा आ रही ऊर्जा को न संभाल पाने के कारण भी होता है पर मुख्य कारण नकारात्मक ऊर्जा ही होती है यह नकारात्मक ऊर्जा पित्र दोष भी हो सकता है या फिर बाहर से आई आत्माएं हो सकती हैं पितरों के साथ जुडी कोई आत्मा हो सकती है अथवा किसी पर आसक्त कोई आत्मा हो सकती है या वास्तु दोष के कारण उत्पन्न नकारात्मक उर्जायें हो सकती है या तांत्रिक अभिचार के कारण आई नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है अथवा अन्य किसी प्रकार की भी नकारात्मकता हो सकती है-

यदि आपके परिवार की उन्नति रुक जाए और आपको अवनति दिखने लगे घर में कलह-उपद्रव अनावश्यक हो अथवा आपके कार्यों में व्यवधान हो या अशुभ-अमंगल शकुन अधिक होने लगे, बुरे स्वप्न आये, सपनो में भय लगे, कभी छाया आदि लगे आसपास या घर में या आपके बच्चे बिगड़ने लगे अथवा परिवार में सौमनस्य समाप्त होने लगे, पति-पत्नी में अनावश्यक कलह हो, शारीरिक स्वास्थय में अनावश्यक उतार-चढाव आये बार बार -कोई बीमार भी हो और कारण भी न समझ में आये, हर काम में असफलता मिलने लगे, पैसे की आय पर्याप्त होने पर भी पूर्ती मुश्किल से हो, समझ में न आये कहाँ खर्च हो रहे हैं, आय-व्यय में असंतुलन आ जाए, कर्जों की स्थिति आये, बार-बार कार्य-व्यवसाय में उतार-चढाव-हानि-लाभ हो, कहीं स्थिरता न रहे तो समझना चाहिए की आप किसी न किसी प्रकार से नकारात्मक उर्जाओं की चपेट में हैं और आपको इनका उपचार करना चाहिए-

कोई भी मनुष्य के जीवन में उसके द्वारा किये गए कर्मो का फिर वह इस जन्म में हो या पिछले जन्म में हो नकारात्मक उर्जा समय-समय पर प्रताड़ित भी करती है लेकिन मनुष्य अन्तर्यामी नहीं है इसलिए समझ नहीं पाता है-

इनके उपचार का सबसे अच्छा उपाय सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ाना है जिसका एक माध्यम पूजा-साधना है यदि घर में या आप पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है या उपरोक्त लक्षण घर में या आप पर हैं तो पूजा-साधना पर उपद्रव भी हो सकते हैं, विघ्न आ सकते हैं अतः पहले से सोचे रहें की ऐसा होगा और सतर्क रहें तथा अपने कार्य-व्यवहार को संतुलित रखे और विवादों से बचें-

एक बार जब साधना-अनुष्ठान शुरू कर दें तो बीच में कदापि न छोड़ें यह जरुर पहले सुनिश्चित कर लें की आप गलती से भी पूजा में गलती न करें कुछ दिन में सब सामान्य होने लगेगा और आपकी साधना-अनुष्ठान पूर्ण होने पर सफलता की भी आप उम्मीद कर सकते हैं-सकारात्मकता बढने से परिवर्तन जरुर होंगे और लाभ भी होंगे-

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