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12 फ़रवरी 2018

अमृत शर्करा कल्प बनाने की विधि तथा उपयोग

Preparation Method of Amrut Sharkara Kalp and Health Benefits


पिछले लेख में हमने अमृत शर्करा कल्प, चंद्रमा के मानव मन व शरीर पर होने वाले प्रभाव तथा मिश्री के आयुर्वेदिक व औषधीय गुणों के बारे में विस्तार से जानकारी ली अब इस लेख में हम आपको अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp) बनाने की शास्त्रोक्त विधि तथा अमृत शर्करा कल्प के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे-

अमृत शर्करा कल्प बनाने की विधि तथा उपयोग

चंद्र की किरणों का प्रभाव मानव मन भावनात्मक, सकारात्मक व नकारात्मक तरंगों पर तो पड़ता ही है साथ-साथ में मानव शरीर के रुधिराभिसरण की क्रिया, चयापचय की क्रिया तथा अंतः स्त्रावी ग्रंथियों पर भी चंद्र किरणों का प्रभाव पड़ता है इसीलिए जब अमृत शर्करा कल्प का उपयोग किया जाता है तब इसका सकारात्मक व औषधीय प्रभाव हमारे मन तथा शरीर पर पड़ता है व हमें स्वास्थ्य लाभ होता है बनाने में बेहद आसान सा यह कल्प बेहद कारगर, अनुभूत और उत्तम लाभदाई है इसे हम घर में बनाकर आसानी से प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं-

अमृत शर्करा कल्प बनाने की विधि तथा उपयोग

अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp) बनाने का उत्तम समय शरद पूर्णिमा की रात्रि में है शरद पूर्णिमा को चंद्र अपनी सोलह कलाओं के साथ पूर्ण रूप से खिला हुआ होता है तथा चंद्र से अमृत किरणें निकलती है जो बेहद शीतल तथा स्वास्थ्य कारी मानी जाती है इसीलिए सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को रात्रि जागरण तथा खीर खाने का प्रचलन है चंद्रमा के चढ़ती तथा घटती कलाओं का मानव शरीर की चयापचय की क्रियाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की वजह से ही हमारे सनातन धर्म में पूर्णिमा तथा अमावस्या को उपवास का प्रचलन है पूर्णिमा को चंद्रमा की चैतन्य किरणें मन को आनंद, उल्लास तथा ताजगी से भर्ती है इसी वजह से पूर्णिमा को मेले, सत्संग तथा कीर्तन का आयोजन आदि काल से किया गया है इसी तरह शर्करा या मिश्री भी शरीर को बल, पुष्टि तथा आनंद देती है इसी वजह से धार्मिक अनुष्ठान पूजा पाठ तथा सत्संग व कीर्तन के बाद प्रसाद के तौर पर मिश्री दी जाती है-

अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp) बनाने की विधि-


शरद पूर्णिमा की रात्रि को 5 किलो मिश्री या खड़ी शक्कर (Rock sugar) लाकर उसे खुली छत पर इस तरह रक्खें कि सीधी चंद्रकिरण उस पर पड़े इसके लिए एक लकड़ी की खटिया या टेबल ले उसके चारों पैरों में एक एक थाली रख दें इन चारों थालियों में पानी भर दे इससे मकोडिया चींटी शक्कर तक नहीं पहुंच पाएगी साथ ही साथ चंद्र को जल तत्व का ग्रह कहा गया है तो पानी रखने से उस की किरणें ज्यादा आकर्षित होगी खटिया के ऊपर एक सफेद चादर या सूती कपड़े में शक्कर को फैला दें तथा उसे पूरी रात रहने दे सुबह प्रात काल यह शक्कर निकालकर अगर आप चाहें तो इसे पीस के या छोटे टुकड़े करके कांच की बोतलों में अच्छे से भर ले इस तरह आपका अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp) तैयार है-

लेकिन आजकल ऋतु चक्र बिगड़ने की वजह से शरद पूर्णिमा को बरसात हो जाती है ऐसी स्थिति में अनुभवी वैद्यो का कहना है कि इस योग को बनाने के लिए सुखी या गर्मियों की ऋतु की दूज से शुरुआत करें दूज से लेकर पूर्णिमा तक हर रात्रि को यह शक्कर छत पर रखें इससे चंद्र की चढ़ती कला की किरणें शक्कर में सिद्ध हो जाएगी तथा शर्करा योग उतना ही गुणकारी बना रहेगा जितना कि शरद पूर्णिमा की रात्रि को सिद्ध होता है-

अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp) के उपयोग-


1- अमृत शर्करा कल्प बेहद शीतल तथा पित्तनाशक है एसिडिटी (Acidity), पेट दर्द, सिर दर्द (Headache) जैसी तकलीफों में यह शक्कर चूसने से त्वरित लाभ मिलता है-

2- पित्त प्रकोप या पेट में एसिड बढ़ने से खट्टी डकारें आना, मुंह कड़वा होना, जी मचलाना, छाती में जलन (Heart Burn) होना जैसी समस्याओं में यह शक्कर चूसने से पित्त का शमन होता है तथा वमन व मुंह का बिगड़ा हुआ स्वाद ठीक होता है-

3- यह शक्कर आप किसी भी दवाई के साथ या घरेलू नुस्खे के साथ भी इस्तेमाल कर सकते हैं-

अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp) के अनुभूत प्रयोग-


1- लो बीपी (Low Blood pressure) में नींबू के साथ अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp) मिलाकर शरबत बनाकर पीने से रक्तचाप सामान्य होता है चक्कर व कमजोरी त्वरित मिटती है-

अमृत शर्करा कल्प बनाने की विधि तथा उपयोग-Preparation Method of Amrut Sharkara Kalp and Health Benefits

2- छोटे शिशुओं में अक्सर बेचैनी, चिड़चिड़ाहट तथा शरीर में दुर्बलता (Weakness) रहती है बढ़ते हुए शिशुओं में शारीरिक ऊर्जा (Energy) का व्यय ज्यादा मात्रा में होता है जिसकी भरपाई करने हेतु बच्चों को मीठी चीजें खाना बेहद पसंद होता है ऐसे समय में आजकल के बने हुए चॉकलेट या कैंडी देने से बेहतर हैं की उनको अमृत शर्करा कल्प दे-

3- बच्चों को अमृत शर्करा कल्प चटाने से उनको मिठास के साथ साथ शरीर में शक्ति, ऊर्जा तथा तेज भी मिलता है अमृत शर्करा बच्चों को आप दूध में मिलाकर भी दे सकते हैं इससे उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य ठीक बना रहता है चिड़चिड़ाहट व रोना कम होता है बच्चा प्रसन्न रहता है तथा पेट की गड़बड़ियां भी मिटती है व बच्चा हृष्ट पुष्ट व तेजस्वी तथा हसमुख बनता हैं-

4- एक कप गर्म दूध में एक चम्मच अमृत शर्करा कल्प तथा एक चम्मच घी मिलाकर पीने से यूरिन इन्फेक्शन (Urine Infection) तथा मूत्र संबंधी तकलीफें मिटती है-

5- आधी कटोरी दही में एक चम्मच अमृत शर्करा कल्प  मिलाकर भोजन के साथ खाने से मूत्रकृच्छ (Strangury) पेट की जलन मिटती है-

6- अमृत शर्करा कल्प (Amrut Sharkara Kalp)-10 ग्राम, धनिया बीज-30 ग्राम लेकर इसे 200 ml पानी में उबालें जब पानी आधा रह जाए तब आंच से उतार कर इसे एक घंटे तक रहने दें इसके बाद इसे छानकर कांच की शीशी में भर ले इस पानी की 2-4 बूंदे सुबह शाम आंखों में डालने से आंखों का दुखना, आंखों की लाली तथा आंखों की सूजन मिटती है-

7- अमृत शर्करा कल्प को पानी के साथ पत्थर पर घिसकर आंखों में अंजन लगाने से आंखों में होने वाली फुंसियां मिटती है-

8- अमृत शर्करा कल्प को पानी में घोलकर पीने से अतिसार के बाद आने वाली कमजोरी (Weakness) मिटती है-

9- अगर अमृत शर्करा कल्प का उपयोग करके आयुर्वेद का प्रचलित सितोपलादि चूर्ण बनाया जाए तो इस चूर्ण के लाभ दुगने हो जाते हैं तथा खांसी (Cough) सूखी खांसी (Dry cough) श्वास संबंधी तकलीफें, हाथ व पैरों के तलवों का जलना,  ज्वर (Fever) पेट दर्द, पाचन संबंधित समस्याओं में बेहद लाभ होता हैं-

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