अब तक देखा गया

2 फ़रवरी 2018

गुलाब के आयुर्वेदिक औषधीय प्रयोग-Ayurvedic and Medicinal Uses of Rose

Ayurvedic and Medicinal Uses of Rose


पिछले लेखों में क्रमशः हमने देखा गुलाब के गुण लाभ व औषधीय प्रयोग, गुलाब के घरेलू औषधीय प्रयोग, गुलाब के अनुभूत औषधीय प्रयोग अब इस लेख में हम आपको गुलाब के आयुर्वेदिक औषधीय प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे-

जैसा कि इस लेखन माला की पहली कड़ी के अंतर्गत हमने जाना कि गुलाब (Rose) मूल रूप से भारतीय नहीं है और इसीलिए आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख उपयोग स्पष्ट रुप से नहीं दिया गया है लेकिन मध्यकालीन साहित्य तथा ग्रंथों में इसका उल्लेख हमें मिलता है साथ ही साथ यूनानी चिकित्सा पद्धति में  चंदन के गुणों का पर्याय का कार्य गुलाब के फूल करते हैं याने मध्य काल के बाद गुलाब का चिकित्सा के तौर पर प्रयोग व प्रचलन बढा है-

गुलाब के आयुर्वेदिक औषधीय प्रयोग-Ayurvedic and Medicinal Uses of Rose

आयुर्वेद में औषधि निर्माण में इसे प्रमुख स्थान ना होते हुए भी औषधि लेने के अनुपान के रूप में गुलाब अर्क तथा गुलाब जल (Rose water) का प्रयोग इंगित किया है वही औषधियों को शुद्ध करने तथा भावना देकर उनके औषधीय गुणों को उभारने का के कार्य में भी गुलाब जल या गुलाब के अर्क का उपयोग किया गया है साथ ही साथ गुलाब (Rose) के फूल से बनने वाला गुलकंद घर-घर में प्रचलित औषधि है इस लेख में हम आपको गुलाब जल की भावनाएं देकर बनने वाले या शुद्ध होने वाले औषधि योगो के बारे में विस्तार से बताएंगे-

गुलाब के आयुर्वेदिक औषधीय प्रयोग-Ayurvedic and Medicinal Uses of Rose

संगम यहूद पिष्टी-


संगम यहूद (पत्थर बेल) को गर्म पानी से धो कर सुखा लें और इसका कपड़छन चूर्ण बना लें अब इस को गुलाब के अर्क (Rosewater) में 3 दिन तक खरल में घोंटे व छाया में सुखाकर बोतलों में भर ले-यह पिष्टी मूत्रल, पित्त शामक व वमन हर, अश्मरिहर (Kidney stone) तथा अश्मरी व शर्करा को तोड़कर मूत्रमार्ग से निकाल देती है तथा मूत्र अवरोध होने पर इसे घिसकर पेढू पर लेप करने से मूत्र अवरोध दूर हो जाता है-

मात्रा व अनुपात-उपयोग-


संगम यहूद पिष्टी 2 से 4 रत्ती की मात्रा में नारियल पानी के साथ लें यह पथरी नाशक और मूत्रल है किसी भी कारण से रुके हुए पेशाब को खोल देता है यदि पथरी (Kidney stone) बहुत बड़ी ना हो तो कुछ दिन के नियमित सेवन से गल कर पेशाब के रास्ते निकल जाती है-

संगम यहूद पिष्टी को 2 रत्ती इस भस्म को 2 रत्ती आमलसार में मिलाकर गोक्षुरादि क्वाथ के साथ सेवन करने पर पथरी निकल जाती है-

अकीक भस्म-


शुद्ध सफेद अकीक का महीन चूर्ण बनाकर गुलाब के अर्क (Rosewater) में खरल करके टिकिया बनाने इस टिकिया को सुखाकर गजपुट में भस्म बना ले अब इस भस्म को गाय के दूध में घोटकर टिकिया बना ले तथा फिर से इसे गज पुट में फूंक कर भस्म बना ले-

मात्रा व अनुपान- 


एक से 3 रत्ती सुबह-शाम शहद या मक्खन के साथ-

गुण तथा उपयोग- 


अकीक की भस्म ह्रदय और मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करती है वात और पित्त को नष्ट करती हैं तथा बढ़ी हुई तिल्ली और लीवर संबंधित विकार नष्ट करती हैं-उष्णता, नेत्र रोग, रक्तप्रदर (Metrorrhagia), रक्तपित्त, मस्तिष्क के विकार तथा पित्तजन्य विकारों के लिए इसका प्रयोग हितकर सिद्ध होता है-

नेत्रों में लगाने से ज्योति बढ़ती है, इसके सेवन से वीर्य गाढ़ा होता है, और शरीर में कामशक्ति (Sex Power) की वृद्धि होती है, इसका सर्वसाधारण अनुपात शहद है-

ह्रदय रोगियों को गले में अकीक का लॉकेट बनाकर पहनना चाहिए जिससे हृदय को बल मिलता है-

अकीक पिष्टी-


अकीक को महीन कूटकर कपड़छन कर लें फिर इसे गुलाब जल (Rosewater) में घोंटलें और इसे सुखाएं-अकीक पिष्टी अकीक भस्म की अपेक्षा अधिक सौम्य होती है-

गुण तथा उपयोग- 


शारीरिक दाह, रक्तपित्त, शरीर की गर्मी (Heat) हर्द्य दौर्बल्य में लाभकारी है-

जहरमोहरा पिष्टी-


अच्छे जाति के जहरमोहरा के टुकड़े को पानी से धो कर सुखा लें फिर कपड़छन चूर्ण बना लें इस चूर्ण को गुलाब अर्क या गुलाब जल (Rosewater) में घोंटकर खरल कर सुखा लें इसे जहरमोहरा पिष्टी कहते हैं-भस्म की अपेक्षा पिष्टी अधिक गुणकारी होती है- 

मात्रा व अनुपान- 


एक से दो रत्ती पिष्टी दिन में दो से 4 बार तक शहद, मोसंबी के रस, अनार के रस, डालिम्ब अवलेह, गाय का दूध जैसे किसी भी अनुपान में आवश्यकतानुसार ले-

गुण व प्रयोग-


जहर मोहरा पिष्टी सौम्य गुणकारी होने से यह हर प्रकृति वाले व्यक्ति के लिए लाभदाई है यह पिष्टी पित्तनाशक होने के साथ-साथ हृदय (Heart Tonic) तथा मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करती है शारीरिक दाह, अतिसार (Dysentery), हैजा, यकृत विकार, दिल की घबराहट (Palpitation) जीर्ण ज्वर, बच्चों के हरे पीले दस्त, तथा सूखा रोग (Rickets) में इसका सेवन विशेष लाभकारी सिद्ध होता है यह बल वीर्य और कांति की भी वृद्धि करती है-

हैजा (Cholera) के रोगी को आधा आधा घंटे बाद मयूरपंख भस्म दो रत्ती और जहरमोहरा पिष्टी मिलाकर अर्क कपूर और पुदीना के अर्क के साथ निरंतर देने से वमन, दस्त और प्यास कम हो जाती है तथा शरीर में बल (Energy) वृद्धि होती है-

खमीरा गांवजवान-


विधि-


गुलाब के फूल (Rose flower), सफेद चंदन, जटामासी, उस्त, खुछुस, आवरेशक, नीलोफर प्रत्येक एक-एक तोला तथा वालरंज दो तोला, गावजवान के फूल 5 तोला सबको 40 तोला गुलाब के अर्क (Rosewater) में रात को भिगो दें सुबह मंद आंच पर पकाएं जब 3 भाग पानी बजे तक उतार ले फिर इसको हाथों से खूब मसलकर छान लें उसमें 40 तोला चीनी डालकर मंद आंच पर अवलेह बनाने जब अवलेह ठंडा हो जाए उसमें डेढ़ मासा कपूर,  डेढ़ मासा अंबर को तीन माशा केसर व गुलाब के अर्क (Rosewater) में पीसकर खूब घोटकर कांच के बर्तन में भर ले-

मात्रा व अनुपान-


तीन मासा तक दिन में दो से तीन बार ले ऊपर से गाय का दूध पिए-

गुण तथा उपयोग-


यह खमीरा उत्तम ब्रेन टॉनिक (Brain tonic) है, यह ह्रदय तथा मस्तिष्क को बल देता है, पाचन संस्थान को शक्ति प्रदान करता है तथा आंखों की दृष्टि और स्मरण शक्ति (Memory power)की वृद्धि करता है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

loading...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Information on Mail

Loading...