5 अप्रैल 2018

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग

Ayurvedic Remedies for Skin Disease-Beauty


आजकल त्वचा रोगों (Skin Disease) की समस्या में काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है दाद, एक्जिमा (Eczema) रिंगवर्म (Ring-Worm), फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection), खुजली (Scabies), सोरायसिस, शीतपित्त, तथा एलर्जी जैसी समस्याओं के रोगी हर घर में देखने को मिल रहे है-

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग

इसके साथ ही साथ फोड़े फुंसी, कील मुंहासे (Acne Pimple), तथा जख्मों का देरी से भरना, त्वचा का रूखापन (Dryness), त्वचा का कालापन, चमक विहीन निस्तेज त्वचा जैसी समस्याएं भी आम हो गई है-

अक्सर एलोपैथी में ऐसी समस्याओं में औषधि के तौर पर स्टिरोइडस (Steroid) देकर समस्या तथा समस्या के लक्षणों को दबाया जाता है जिससे रोगी जब तक दवाइयां लेता रहता है तब तक उसे लक्षणों में आराम मालूम पड़ता है लेकिन जैसे ही दवाइयां लेना बंद करता है वैसे ही समस्या पुनः उभरने लगती है व यह समस्याए शरीर में असाध्य व्याधि के तौर पर डेरा जमा देती है और एक समय ऐसा आता है कि एलोपैथिक दवाइयां तथा क्रीम भी बेअसर होने लगते हैं और मर्ज बढ़ता जाता है व रोगी परेशान बना रहता है-

आप सभी जानते है कि लंबे समय तक एलोपैथिक दवाइयां लेने से थोड़े दिन के लिए मर्ज दब जाता है लेकिन समस्या खत्म नहीं होती है एलोपैथिक दवाइयां तथा स्टीरोइड्स (Steroid) के साइड इफेक्ट्स भी होते हैं एक समस्या खत्म करने के चक्कर में दूसरी कई समस्याए उत्पन्न हो जाती है तब रोगी को थक हार कर आयुर्वेद की शरण लेनी पड़ती है-

आयुर्वेद में किसी भी रोग की चिकित्सा शरीर के आंतरिक शुद्धिकरण (Detoxification) के बिना संभव नहीं मानी जाती है जब तक शरीर के संचित दोष व विषाक्त द्रव्य (Toxins) शरीर से बाहर ना निकले तब तक योग्य व वांछित उपचार संभव नहीं है इसीलिए पथ्य अपथ्य, उपवास, वमन, विरेचन, लेपम तथा औषधि कर्म जैसे चिकित्सा कर्म के साथ धैर्य से अगर चिकित्सा की जाए तो इस व्याधि से स्थायी रूप से छुटकारा पाया जा सकता है-

यह तो हुआ आयुर्वेदिक चिकित्सा का शास्त्रोक्त भाग जो अनुभवी वेदों की सलाह व देखरेख में ही करना लाभदाई है लेकिन जब त्वचा की खुजली या इंफेक्शन (Infection) तथा अन्य समस्याए शुरुआती दौर में होती है तब लोग मेडिकल स्टोर से क्रीम या लोशन लगाते रहते हैं व समस्या के लक्षणों को जाने अनजाने ही दबाने का काम करते हैं ऐसा ना करते हुए थोड़े पथ्य-अपथ्य के साथ अगर यहां पर बताए जाने वाले दो प्रयोग किए जाएं तो त्वचा संबंधित विकारों में आश्चर्यजनक लाभ मिलता है तथा त्वचा की रंगत निखरती है, शरीर में बढ़े हुए दोषों का शमन होता है, विषैले तत्वों का मल मूत्र मार्ग से योग्य उत्सर्जन होता है तथा फोड़े फुंसी (Boil) घाव, कील मुहाँसे, दाग, धब्बे (Blemishes), कालापन जैसी समस्याएं भी मिटती है-

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग

सर्दियों में व वात कफ बढ़ने से तथा त्वचा की नमी कम होने से त्वचा की रुक्षता (Dryness) बढ़ती है जिससे खुजली, इन्फेक्शन व अन्य समस्याएं भी बढ़ती है गर्मियों में पित्त विकार बढ़ने से रक्त में गर्मी (Heat) बढ़ती है तथा पसीने की मात्रा बढ़ने से त्वचा पर इन्फेक्शन, दाद, खाज, फोड़े फुंसी, कील मुंहासे बढ़ते हैं इस तरह ही वर्षा ऋतु में नमी (Humidity) की वजह से, गीले कपड़ों की वजह से खुजली व इंफेक्शन बढ़ता इस तरह त्वचा संबंधित तकलीफें किसी भी ऋतूमें कभी भी हो सकती है-

इस लेख में बताए गए इन दोनों प्रयोगों जो कि हमने दो भागों में लिखे गए हैं उनका प्रयोग आप अपनी समस्या अनुरूप किसी भी रुप में कर सकते हैं शुद्धता व उत्तम लाभ के लिए यह दोनों प्रयोग को घर पर ही बनाना ज्यादा उचित है-

यह दोनों योग संपूर्ण निरापद है तथा शरीर के संचित विषाक्त द्रव्य को निकालकर शरीर का योग्य शुद्धिकरण करते हुए त्वचा को निखारते हैं यह दोनों प्रयोग ना सिर्फ त्वचा संबंधित समस्याएं मिटाते हैं बल्कि त्वचा को सुंदर और चमकीली (Glowing) भी बनाते हैं साथ-साथ कफ इन्फेक्शन, सर्दी खांसी (Cold Cough) जैसी तकलीफों को भी मिटाते हैं तथा रोगप्रतिकारक शक्ति (Immunity) भी बढ़ाते हैं इस तरह से यह दोनों योग किसी भी ऋतू में सेवनीय व बेहद लाभदायक भी है-

युवाओं को भी ब्यूटी पार्लर, महंगी क्रीम तथा कॉस्मेटिक की जगह इन दोनों योगों का उपयोग अवश्य करना चाहिए खासकर छोटे बच्चों में होने वाली त्वचा संबंधित समस्याओं में यह प्रयोग बेहद कारगर है जिससे एलोपैथिक दवाए तथा स्टीरोइड्स के  साइड इफेक्ट से भी बच्चों को बचाया जा सकता है तथा बच्चों की रोग प्रतिकारक शक्ति (Immunity) भी बढ़ाई जा सकती है-


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