7 अप्रैल 2018

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग भाग-2

Ayurvedic Remedy for Skin Disease and Beauty


इस लेखनमाला के पहले भाग में हमने त्वचा विकारों (Skin Disorder) की उत्पत्ति के कारण तथा उसकी योग्य चिकित्सा तथा एलोपैथिक चिकित्सा के मर्यादित दृष्टिकोण व साइड इफेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी ली-

दूसरे भाग में हमने शरीर के संचित दोष (Toxins) पसीने तथा मूत्र मार्ग से निकल कर शरीर का शुद्धिकरण (Detoxification) करने वाला योग देखा जो कि शरीर के त्वचा रोग का नाश करता है तथा सौंदर्य वर्धन भी करता है-


त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग भाग-2

इस लेख में हम आपको शरीर का शुद्धि करण (Detoxification) करने वाला अत्यंत लाभदायक योग बताएंगे जो शरीर में संचित दोषों (Toxins) का पाचन करता है तथा शरीर के संचित दोष तथा विषाक्त द्रव्य का मल मार्ग से निष्कासन (Detoxification) करके शरीर को शुद्ध व सवस्थ करता है तथा शीतपित्त (Urticaria), चकत्ते, फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection), खाज (Itching), खुजली (Scabies), दाद, एक्जिमा (Eczema) जेसे  त्वचा रोगों को जड़ से मिटाता है-

पिछले लेख में हमने हल्दी (Turmeric) के गुण प्रभाव तथा उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी ली-

हल्दी (Turmeric) का प्रभाव पाचन तंत्र रक्त तथा वात-पित्त-कफ जैसे तीनों दोषों पर अत्यंत प्रभावशाली है उसमें भी खास करके कफ धातु को ठीक करने में हल्दी अत्यंत प्रभावकारी औषधि है हल्दी के उपयोग से कफ तथा पित्त की विकृति नष्ट होती है शरीर के किसी भी भाग में बढ़े हुए कफ, पित्त तथा आम दोष को हल्दी सुखा कर बाहर निकाल देती है इसीलिए त्वचा रोगों में, कफ इन्फेक्शन (Cough Infection), में एलर्जी (Allergy) में हल्दी एक उत्तम औषधि सिद्ध होती हैं-

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग भाग-2

रक्त को शुद्ध (Detoxification) करके सारे शरीर में दोषों का योग्य संतुलन करने का गुण हल्दी में है जिसकी वजह से हल्दी त्वचा संबंधी समस्याओं में रामबाण औषधि है इसी वजह से त्वचा रोगों में हल्दी को आंतरिक रूप से तथा बाह्य रूप से उपयोग किया जाता है-

त्वचा विकारों में उपयोगी आयुर्वेदिक योग हरिद्रा पाक-


सामग्री-

हल्दी- 160 ग्राम
निशोथ- 160 ग्राम
हरड़- 160 ग्राम
चीनी- 2 किलो
-दारूहल्दी, नागर मोथा, अजवाइन, चित्रकमूल, कुटकी, सफ़ेद जीरा, पीपल छोटी, सौंठ, दालचीनी, छोटी-इलायची, तेजपात, बायविडंग, गिलोय, वासामुल, कुठ, बहेड़ा, आवला, च्वय, धनिया, लौह भस्म, अभ्रक भस्म- 50-50 ग्राम

बनाने की विधि-

सबसे पहले आप चीनी को मंदाग्नि पर पकाते हुए चाशनी बना ले जब चासनी गाढ़ी हो जाए तब उसमें सारे चूर्णों को अच्छे से कपड़छन करके मिला ले तथा पाक सिद्ध करें अच्छी तरह पक जाए तब उसे ठंडा करके कांच के बर्तन में सुरक्षित रखें-

मात्रा व अनुपान-

यह पाक दिन में दो बार 8 से 10 ग्राम की मात्रा में गर्म जल के साथ ले-

लाभ व उपयोग-

1- यह पाक शरीर के संचित दोषों (Toxins) को मल द्वारा बाहर निकलता है यह मृदु विरेचक होने से शरीर की गर्मी तथा पेट व आंतों के रोगों में भी लाभदायक है-

2- यह योग शीतपित्त (Urticaria), चकत्ते, फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection), खाज (Itching), खुजली (Scabies), दाद, एक्जिमा (Eczema), जीर्ण ज्वर, जैसी त्वचा संबंधित समस्याओं को जड़ से नष्ट करने में बेहद कारगर सिद्ध हुआ है-

3- यह पाक मृदु विरेचक होने की वजह से कब्ज (Constipation) को भी दूर करता है जिससे शरीर में खून की गर्मी कम होती है तथा फोड़े फुंसी, कील मुंहासे (Acne Pimple), जख्म व पुराने व्रण भी मिटते हैं त्वचा के दाग धब्बे दूर होते हैं तथा त्वचा स्वस्थ व चमकीली बनती है-

4- यह योग किसी भी तरह की एलर्जी, कमजोर फेफड़े तथा कफ इन्फेक्शन (Cough Infection) भी नष्ट करता है-

5- रक्त की कमी तथा सुजन को भी मिटाता हैं साथ ही साथ शारीर की रोगप्रतिकारक शक्ति (Immunity) को भी बढाता हैं-उत्तम लाभ के लिए इसे घर पर बनाना ही बेहतर है-

ध्यान दें-

अक्सर देखा गया है कि त्वचा संबंधित तकलीफों में लंबे समय तक एलोपैथिक दवाई लेने से कफ, एलर्जी, दमा या फेफड़े संबंधित समस्याएं उत्पन्न होती है वैसे ही दमा को दबाने के लिए ली जाने वाली एलोपैथिक दवाई लेने से त्वचा संबंधित तकलीफें उत्पन्न होने लगती है इसका एक मात्र कारण रोगप्रतिकारक शक्ति (Immunity) का घटना तथा फेफड़ों का कमजोर होना ही माना जा सकता है ऐसी समस्याओं में जहां एलोपैथी अपने साइड इफेक्ट को भी मिटाने में असमर्थ होती है तब ऐसे केस में यह योग बेहद लाभदायक सिद्ध होता है-


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