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6 अप्रैल 2018

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग भाग-1

Ayurvedic Remedy for Skin Disease and Beauty


पिछले लेख में हम ने त्वचारोग तथा फंगल इंफेक्शन (Fungal Infection) जैसे समस्या के बढ़ते रुग्ण तथा उसके योग्य व  अयोग्य इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी ली-इस लेख में हम आपको भारतीय औषधि शास्त्र, भोजन शास्त्र तथा धार्मिक शास्त्र में बेहद उपयोगी तथा गुणकारी और पवित्र मानी जाने वाली हल्दी (Turmeric) के दो योगो के बारे में जानकारी देंगे जो त्वचा संबंधित समस्याओं को मिटाने में बेहद उपयोगी है तथा सौंदर्यवर्धक भी है-

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग भाग-1

किसी भी समस्या या रोग के लक्षणों को दबाने की क्रिया को इलाज नहीं कहा जा सकता है जब तक समस्या की असली जड़ तक जाकर उसको खत्म ना किया जाए तब तक इलाज अपूर्ण तथा बीमारी को वापस बढ़ाने वाला व अन्य समस्याओं को भी निमंत्रित करने वाला ही होता है इसलिए आयुर्वेदिक सिद्धांतो का पालन करके किया गया हुआ इलाज ही सम्पूर्ण निराप्रद व स्थायी लाभ देने वाला होता हैं-

हल्दी (Turmeric) को आयुर्वेद में तिक्त, कटु, देह का वर्ण सुधारने वाली, जख्मो को जल्दी भरने वाली, स्त्रियों को प्रिय, रुक्ष, कफ़, वायु, रक्तदोष, त्वचा विकार, कोढ, प्रमेय, कंडू, व्रण (Wounds), सूजन, पांडु रोग (Anaemia), कृमि, पिनस, अरुचि, अपचन तथा इन्फेक्शन्स (Infection) का नाश करने वाली दिव्य औषधि कहा गया हैं-

इसीलिए भारतीय संस्कृति में इसे देवतुल्य पवित्र माना गया है तथा हल्दी का तिलक लगाना या शादी में सर्वांग को हल्दी (Turmeric) लगाना जैसी विधि पुरातन काल से आज तक भी प्रचलन में है आजकल विदेशों में भी हल्दी के गुणों की बड़ा ही बोल बाला है तथा विदेशियों ने भी अपने कॉस्मेटिक तथा भोजन में हल्दी को समावेश करना शुरू कर दिया हैं-

हल्दी (Turmeric) को वैध्य जनों ने पीताम्रत भी कहा है याने हल्दी प्रकृति में गर्म होते हुए भी गर्मी को काट देती है यानी सर्दी या गर्मी किसी भी मौसम में हल्दी का सेवन निश्चित रूप से किया जा सकता है और इसी वजह से भारतीय भोजन शैली में मसालों के रूप के तौर पर हल्दी को दैनिक जीवन में शामिल किया गया है आज हम आपको जो योग बताने वाले हैं वह बनाने में बहुत सरल तथा बेहद स्वादिष्ट है इसे आप अपनी समस्या व जरूरतों के अनुसार किसी भी ऋतु में आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं तथा इसके आश्चर्यजनक लाभ ले सकते हैं-

हल्दी (Turmeric) का शीत आसव कैसे बनायें-


एक किलो कच्ची हल्दी (Turmeric) की गांठों को लेकर उस का रस निकाल ले तथा उसे उबालें जब थोड़ा कम हो जाए तब उसे ठंडा करके उसमें 300 ग्राम शहद (Honey) मिलाकर चीनी मिट्टी के बर्तन में भरकर ऊपर से कपड़ा लपेट कर अंधेरी व साफ-सुथरी जगह पर रख दे-21 दिन के भीतर हरिद्रा आसव बनकर तैयार हो जाएगा-

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग भाग-1

1- इस आसव को दो चम्मच याने 10 से 15 ml की मात्रा में एक गिलास अनार के रस, संतरे के रस, नींबू के शरबत या चंदन और गुलाब के शरबत के साथ पीने से शरीर की गर्मी पेशाब व पसीने  के रास्ते निकल जाएगी तथा गर्मी की वजह से होने वाली खाज (Scabies), खुजली (Itching), घमोरियां, इन्फेक्शन्स (Infection) मिट जाएगी तथा आपकी त्वचा सुंदर बनेगी-

2- इस योग में थोड़ा काली मिर्च का चूर्ण तथा इलायची पाउडर मिलाकर पीने से कफ (Cough), खांसी, हल्का बुखार, फेफड़ों की कमजोरी, बार-बार कफ इन्फेक्शन (Cough Infection) होना जैसी समस्या में भी आश्चर्य रूप से लाभ मिलता है-

3- यह योग रक्ताल्पता (Anaemia), कमजोरी, कृमि रोग, तथा कमजोर पाचन क्षमता जैसी तकलीफों में भी लाभदायक है यह योग पीने से पाचन शक्ति सुचारू होती है तथा शरीर को योग्य पोषण (Nutrition) मिलने लगता है शरीर में संचित विष तथा दोष का उत्सर्जन होता है व शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता (Immunity) भी बढ़ती है-

त्वचा रोग नाशक व सौन्दर्य वर्धक आयुर्वेदिक योग भाग-1

4- जिनको त्वचा संबंधित समस्याएं हो या बार-बार कील मुंहासे (Acne Pimple) निकलते हो या रक्त की गर्मी की वजह से त्वचा पर दाग धब्बे पड़ गए हो ऐसे व्यक्तियों ने नियमित हरिद्रा आसव पीने से त्वचा संबंधित समस्याएं दूर होती है तथा त्वचा गोरी (Fairness) होती है साथ ही त्वचा चमकीली (Glowing) बनती है तथा त्वचा की नमी भी बरकरार रहती है-

5- इस तरह हरिद्रा आसव औषधि व सौंदर्य वर्धक कॉस्मेटिक का काम भी करता है यह बेहद स्वादिष्ट हैं तथा इसे बच्चे भी आराम से पी सकते हैं व अपनी रोग प्रतिकारक क्षमता बढ़ा सकते हैं-


प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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