21 अप्रैल 2018

ह्रदय रोग-कोलेस्ट्रॉल-हाई ब्लड प्रेशर में संवा चावल का अनुभूत प्रयोग

Sama Rice for Controlling Heart Disease-Blood Pressure-Cholesterol


पिछले लेख में हमने संवा चावल (Sama Rice) के गुण, उपयोग तथा लाभ के बारे में जाना तथा दूसरे लेख में हमने मधुमेह व मोटापे में संवा चावल के प्रयोग के बारे में जाना अब तीसरे लेख में हम आपको संवा चावल का एक अनुभूत प्रयोग बताएंगे जो ह्रदय रोग (Heart Disease), कॉलेस्ट्रॉल (Cholesterol) तथा बड़े हुए रक्तचाप (High Blood Pressure) जैसी समस्याओं की रामबाण दवा है-

ह्रदय रोग-कोलेस्ट्रॉल-हाई ब्लड प्रेशर में संवा चावल का अनुभूत प्रयोग

जैसा की हमने पिछले लेखों में पढ़ा व जाना की संवा चावल (Sama Rice) स्वास्थ्य के लिए हितकर तथा पौष्टिक व आधुनिक जीवन शैली की वजह से हुए असाध्य कष्टसाध्य समस्याओं पर उत्तम अन्न औषधि है-

नित नए संशोधनों तथा विदेशों में संवा चावल (Sama Rice) का बढ़ता प्रचलन तथा संवा चावल के पौष्टिक गुणों के चलते आजकल आदिवासी बहुल क्षेत्र में राज्य सरकारें संवा चावल की खेती को प्रोत्साहन दे रही है तथा मध्य प्रदेश जैसे राज्य में आंगनवाड़ी में बच्चों को सुबह नाश्ते में संवा चावल से बनी खिचड़ी देने का नियम बनाया है जिससे बच्चों को योग्य पोषण मिले तथा उनका सर्वांगीण विकास हो-

2014 में प्रकाशित पुस्तक हीलिंग ट्रेडिशन ऑफ द नॉर्थ वेस्टर्न हिमालया में प्रसिद्ध एक लेख के अनुसार संवा चावल (Sama Rice)  कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) कम करने में बेहद मदद रूप है तथा बढ़े हुए रक्तचाप (High Blood Pressure) को सुचारू करने में रामबाण औषधि सिद्ध हुआ है-

संवा चावल (Sama Rice)  के गुणों का वर्णन करते हुए आयुर्वेद  ने इसे लेखन गुण वाला  भी कहा है यानी शरीर में जमे हुए मेद (Cellulite), चर्बी, कोलेस्ट्रॉल या आंतों में जमी मैल को खुरचकर निकाल देने वाली औषध-

संवा चावल का ह्रदयरोग (Heart Disease) के लिए किया जाने वाला यह प्रयोग हमारा अनुभूत है तथा आज भी आदिवासी क्षेत्रों में इसे उपयोग में लिया जाता है आदिवासी लोग बिना किसी दवाई के सिर्फ यह प्रयोग करके हर्दय रोग का उपचार रोकथाम तथा कोलेस्ट्रोल और बढ़े हुए रक्तचाप (High Blood Pressure) को नियंत्रित करते हैं यह एक सरल सुलभ निरापद प्रयोग में है जो बेहद आसान होने के साथ-साथ अक्सीर भी है-

ह्रदय रोग-कोलेस्ट्रॉल-हाई ब्लड प्रेशर में संवा चावल का अनुभूत प्रयोग

ह्रदयरोग-कोलेस्ट्रोल-हाई ब्लडप्रेशर के लिए शयामाक विलेपी-


1- इस प्रयोग के लिए संवा चावल (Sama Rice) को एक दिन पानी में भिगोकर फिर उसको धूप में सुखाकर संग्रहित किया जाता है तथा जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जाता है-

2- यह प्रयोग अगर सुबह नाश्ते में करना है तो  7:00 से 11:00 बजे तक करना और अगर दोपहर के भोजन में करना चाहो तो 11:00 से लेकर 1:00 बजे के बीच में ही करना है-

सामग्री-


संवा चावल- एक कप 
कटी हुई लौकी-कद्दू-सूरन-गाजर-बीट- दो कप 
कटी हुई धनिया या अन्य कोई पत्तेदार सब्जीया- आधा कप 
छाछ- दो कप 

यदि आप चाहे तो इसमें अपनी पसंद के अनुसार हरी सब्जियां तथा अन्य सब्जियां मूंगफली, मटर वगैरा डाल सकते हैं-

बनाने की विधि-


संवा चावल (Sama Rice)  को एक या डेढ़ कप पानी में 1 से 2 घंटे भिगोकर रखें उसके बाद एक चम्मच घी, जीरा, हींग, दो काली मिर्च, व एक छोटा दालचीनी का टुकड़ा का तड़का लगा कर उसमें कटी हुई सब्जियां डाल दे ऊपर से छाछ डाले व पानी के साथ ही संवा चावल भी डालें तथा कुकर में 4-5 सिटी होने तक पकाएं ध्यान रहे यह खिचड़ी थोड़ी पतली याने मांड से गाढ़ी लेकिन खिचड़ी से पतली होनी चाहिए-आप इसे बिना छाछ डाले भी बना सकते हैं लेकिन मूलरूप से इसका बनाने का तरीका छाछ डालकर ही हैं-

कैसे खाया जाए-


इसे श्यामाक विलेपी कहा जाता है इसे खाने का समय हम आपको पहले ही बता चुके हैं अब इसे खाने का तरीका बताते हैं-आपको जब भी खाना हो तब पीपल के 6-7 पत्ते लेकर अच्छे से धो कर सुखा कर स्वच्छ करके उस पर गाय का घी की परत लगाएं तथा एक बड़े कटोरे या पतीली में पत्तों को दोनों की तरह जमा कर सजा कर रखे ध्यान रहे की घी लगी हुई परत ऊपर की तरफ आए अब इन पत्तो पर  गरमा-गरम श्यामाक विलेपी डालकर ऊपर से एक चम्मच घी डालें तथा इसे पीपल के पत्तो से ढंक दे-दो-तीन मिनट बाद इसे अच्छे से मिलाकर खाए-

श्यामाक विलेपी खाने के फायदे- 


1- यह श्यामाक विलेपी ह्रदय रोग में अक्सर दवा साबित हुई है यह शरीर को एल्कलाइन (Alkaline) बनाती है तथा शरीर के विषैले तत्वों (Toxins) को दूर करती है-

2- श्यामाक विलेपी द्वारा शरीर का योग्य शुद्धिकरण (Detoxification) भी करती है इसके सेवन से ह्रदय रोग (Heart Disease), ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol)आदि दूर होते है- 

3- श्यामाक विलेपी के प्रयोग से एसिडिटी, अपच (Indigestion), कमजोर लीवर, पेट के छाले, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड (Gout), आंतों की समस्याएं, गुदाद्वार के रोग, मूत्र संस्थान के रोग तथा पिछले लेख में उल्लेख किया हुआ मोटापा (Obesity) और डायबिटीज भी कम होते हैं-

4- थकान (Fatigue), कमजोरी, अरुचि, पेट में भारीपन, अवसाद जैसी समस्याओं में भी लाभ मिलता है इसे नियमित 40 दिन तक सेवन करने से ह्रदय संबंधित तकलीफ़ो में आश्चर्यजनक लाभ देखा गया है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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