22 मई 2018

बालों की समस्याए तथा आयुर्वेदिक द्रष्टिकोण

Ayurvedic Approach for Hair Problems


हमारे शरीर में बाल तथा नाखून दोनों भी बेजान (काटने से दर्द या खून नहीं निकलता) होते हुए भी हमारे शरीर के स्वास्थ्य का आईना है कमजोर बाल, निस्तेज बाल, रूखे बाल (Dry Hair), झड़ते या टूटते हुए बाल, दो मुंहे बाल (Spilt Ends) या असमय सफेद होने वाले बाल (Premature Greying of Hair) सौंदर्य की दृष्टि से तो ठीक नहीं है लेकिन आरोग्य की दृष्टि से भी चिंता का विषय अवश्य है-

बालों की समस्याए तथा आयुर्वेदिक द्रष्टिकोण

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण (Ayurvedic Approach)-


आयुर्वेद ने केश याने बालों का संबध हड्डियों से जोड़ा हैं-

स्यात किटट केशलोमास्थनो | -चरक संहिता

अर्थात-

अस्ति धातु का मल भाग ही केश तथा रोम या त्वचा के बाल है शरीर में गर्भ में जब अस्थि धातु बनने लगती है तभी से हमारे केश भी बनने लगते हैं इसलिए बालों का हड्डियों से गहरा संबंध है तथा अगर हड्डियां कमजोर हो तो बाल भी कमजोर होने लगते हैं-

समस्याएं-

बालों की समस्याए तथा आयुर्वेदिक द्रष्टिकोण

केशलोमन खश्म श्रुध्धि जप्रपतनं श्रम:
ज्ञयम स्थिक्षये लिं सन्धिशैथिल्य मेव च ||  -चरक संहिता

अर्थात-

केश, रोम, नाखून, दाढ़ी मूंछ के बाल का गिरना (Hair fall), उड़ना, कम होना, या टूटना तथा दांतों का टूटना, कम परिश्रम के बावजूद थकावट लगना, शरीर की संधियों में याने जोड़ों में ढीलापन आ जाना, दर्द रहना यह सब लक्षण हड्डियों की कमजोरी की निशानी है साथ ही साथ आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति के हिसाब से भी बालों के प्रकार बताए हैं जैसे कि-

कफ प्रकृति-


कफ प्रकृति के व्यक्ति के बाल सबसे आदर्श माने गए हैं क्योंकि कफ प्रकृति के बाल प्राकृतिक तौर से ही गहरे काले, घने, मुलायम (Silky), लंबे तथा जल्दी बढ़ने वाले या लंबे होने वाले होते हैं यह बाल जल्दी न झड़ने वाले तथा ज्यादा समय तक काले भी रहते हैं नरम और मुलायम (Soft) होने से यह बाल आपस में उलझते भी नहीं है और इन्हें मैनेज करना आसान होता है-

पित्त प्रकृति-


पित्त प्रकृति के व्यक्ति के बाल ज्यादातर कत्थई रंग के या भूरे होते हैं यह गहरे काले रंग के नहीं होते हैं पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति के बाल जल्दी झड़ने वाले तथा जड़ों से भी कमजोर होते हैं पित्त प्रकृति के व्यक्ति में गर्मी अधिक होने से पित्त प्रकृति के बाल जल्दी सफेद होने (Premature Greying of Hair) वाले भी होते हैं पित्त प्रकृति के बाल मुलायम होते हैं लेकिन घने नहीं होते हैं इन की लंबाई या बढ़ने की प्रकृति औसत रहती है यह बाल प्राकृतिक तौर पर घुंघराले (Curly Hair) भी होते हैं-

वात प्रकृति-


वात प्रकृति के व्यक्तियों के बाल कड़े, रूखे (Dry Hair) तथा कम मुलायम होते हैं ऐसी व्यक्तियों के बाल दो मुंहे (Spilt Ends) तथा बीच में से टूटने वाले भी होते हैं तथा किन्ही कारणों से अगर शरीर में वात दोष बढ़ जाए तो बालों का झड़ना बढ़ जाता है वात प्रकृति के व्यक्ति में शरीर में रूखापन होने की वजह से बालों की इलास्टिसिटी (Elasticity of Hair) कम पाई जाती है जिसकी वजह से यह बाल आपस में उलझते भी रहते हैं तथा बिच में से टूटते भी रहते हैं-

निष्कर्ष-


उपरोक्त विवेचन पढने से अब आपको आपके बालों की प्राकृतिक अवस्था का पता चल ही गया होगा कि अब अगर वात प्रकृति का व्यक्ति जिसके प्रकृतिक रूप से ही बाल कम घने हो और वो अगर विज्ञापन देखकर ही बालों को घना करने के लिए तेल और शैंपू लगाकर कोशिश करता रहेगा तो परिणाम क्या होगा यह आप समझ ही सकते हैं-

हर प्रकृति के बालों की अपनी अलग अलग विशेषताएं होती है याने विज्ञापनों के दावे कितने गलत तथा आपके लिए कितने उपयोगी होंगे यह आप समझ सकते हो तथा शैंपू और कंडीशनर लगाकर बाल लंबे व घने करने का दावा कितना हास्यास्पद है यह भी पाठकों को आज समझ में आ गया होगा-

बालों का संबंध शरीर की धातु से होने की वजह से बालों की समस्या धातु क्षय होने की वजह से होती है यह इस लेख में आपको स्पष्ट हो गया है यानी बालों की समस्या कम करने के लिए सिर्फ शैंपू या कंडीशनर जैसे कॉस्मेटिक ही काफी नहीं हैं किंतु बालों की समस्या क्यों हो रही है इसका मुख्य कारण जानकर कारण को कम करना भी उतना ही जरूरी है जितना कि बालों की समस्याओं के लिए उपचार करना-

बालों की समस्याए तथा आयुर्वेदिक द्रष्टिकोण

आयुर्वेद में बालों के मुख्य 3 रोगों के उल्लेख है-

खलित याने झड़ना (Hair fall)

पलित याने बालों का सफेद होना (Premature Greying of Hair) 

इन्द्लुप्त याने  बालों का संपूर्ण उड़ जाना (Alopecia)-

इस लेखन माला में हम इन्हीं तीनों समस्याओं के बारे में तथा उनके होने के कारण तथा उपचार के बारे में जानेंगे क्योंकि यह तीनों समस्या होने के मूलभूत कारण लगभग एक समान ही है तथा इसकी चिकित्सा भी लगभग एक ही तरह की है-

बालों के झड़ने (Hair Fall) पर ध्यान ना दिया जाए तो आगे जाकर बाल उड़ने की संभावना शत-प्रतिशत रहती है और उसी तरह असमय होने वाले सफेद बालों (Greying of Hair) की तरफ अगर ध्यान ना दिया जाए तथा बाजारू कॉस्मेटिक हेयर डाई या कलर क्रीम्स का उपयोग किया जाए तो यह समस्या कम होने की जगह ज्यादा बढ़ती है-

इसलिए इस लेखनमाला में हम आपको इन समस्याओ के कारण, उपचार तथा रोकथाम के बारे में विस्तार से जानकारी देंगें-

निष्कर्ष-

बालों का असमय सफेद होना (Greying of Hair), बालों का झड़ना (Hair Fall) या बालों का उड़ना (Alopecia) शरीर में पोषक तत्वों की कमी तथा शरीर जीर्ण होने की या वृद्ध होने की सूचना है आजकल कम उम्र में यह समस्या ने लोगों को परेशान कर छोड़ा है लेकिन सिर्फ बाजारू व रसायन युक्त तेल, शेम्पू व हेयर डाई से इन समस्याओं से मुक्ति पाना संभव नहीं है-

इन समस्या से ग्रस्त व्यक्ति अगर अपने बालों की प्रकृति तथा समस्या होने के मुख्य कारण जानकर योग्य पथ्य-अपथ्य तथा औषधि उपचार का अनुसरण करें तो निश्चित ही इस व्याधि से बचा जा सकता है तथा स्वास्थ्य व सौंदर्य दोनों को निखारा जा सकता है व रासायनिक कॉस्मेटिक के उपयोग से होने वाले साइड इफेक्ट से भी बचा जा सकता है-


प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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