2 मई 2018

नासूर तथा पुराने व्रण पर निंब सिद्ध लेप का अद्भुत प्रयोग


कभी कभी पुराने घाव या व्रण जल्दी भरते नहीं है दिन-ब-दिन गहरे होते जाते हैं व नासूर बन जाते हैं आज हम आपको नासूर, जख्म, फोड़े फुन्सिया के ऊपर एक आसान निरापद व अनुभूत उपाय बताएंगे जो घाव को भरने में तथा सड़े-गले वर्णों पर उत्तम औषधि सिद्ध हुआ है-

नासूर तथा पुराने व्रण पर निंब सिद्ध लेप का अद्भुत प्रयोग

यह नुस्खा बनाने में जितना आसान है उतना ही लाभदायक है यह नुस्खा हमें मुंबई में चंद्रपुर से आए एक बुजुर्ग वैध्य जी बताया था जिसके बाद हमने इस नुस्खे को बनाकर कई लोगों पर विविध तरीके से इस्तेमाल किया और इसके चमत्कारी लाभ भी देखें-

इसके लिए हमें सिर्फ दो ही सामग्रियों की आवश्यकता है जिसमें एक है चीनी मिट्टी (Kaolin Clay) जिसे केओलिन भी कहा जाता है तथा दूसरा है नीम के पत्तों का रस (Neem Leaf Juice)-

चीनी मिट्टी या केओलिनाइट (Kaolinite)क्या है-


चीनी मिट्टी (Kaolin Clay) एक प्रकार का खनिज मिटटी (Mineral Clay) ही हैं जिसका  उपयोग बर्तन, प्याले, कटोरी, थाली, अस्पताल में काम में लाए जाने वाले सामान इत्यादि बनाने में होता है-रबर, कपड़ा तथा कागज बनाने में चीनी मिट्टी को पूरक की तरह उपयोग में लाते हैं कभी कभी इसे दवा के रूप में भी खिलाते हैं हैजा इत्यादि बीमारी में केओलिन दी जाती है

चीनी मिट्टी (Kaolin Clay) का दंत मंजन में उपयोग करने से दांत स्वच्छ व चमकदार होते हैं इसका चूर्ण ताजा जख्मों के बहते हुए खून को बंद करता है तथा घावों को भरने में मदद करता है-

इस तरह चीनीमिट्टी (Kaolin Clay) का प्रयोग शरीर पर संपूर्ण निरापद है आप बेझिझक इसे शरीर पर इस्तेमाल कर सकते हैं-

लेप बनाने का तरीका-


चीनी मिट्टी (Kaolin Clay) को पीसकर कपड़छन कर नीम के पत्तों के रस (Neem Leaf Juice) में भिगो दें अब इस गाढे लेकिन तरल लेप को अच्छे से चीनी मिट्टी की प्लेट पर या मिट्टी की थाली में फैला कर सुखा लें-

सूखने के बाद इस को उखाड़कर खरल में अच्छे से पीस ले तथा उसके बाद फिर से नीम के पत्तों के रस (Neem Leaf Juice) में अच्छे से डुबा कर यह लेप थाली में फैला दें और सुखा ले ऐसा आप 7 बार करे-फिर इसे खरल में खूब घोंट कर पीसकर कपडछन करके शीशियो में भर ले-

लाभ व उपयोग-


1- इस औषधि को घावों तथा नासूर में भर के ऊपर पट्टी लगाने से नासूर घाव बहुत जल्दी भरते हैं वैध जी का कहना है कि घाव के ऊपर यह दवा निहायत चमत्कारी और फायदेमंद है यह दवा हर जगह के घाव (Wound), व्रण तथा जख्मों (Sore) पर उपयोगी है गुदाद्वार के जख्मों मैं भी दवा चमत्कारी लाभ देती है-

2- हमने इसे कील मुंहासे (Acne Pimple), फोड़े फुंसी (Boils), दाद जैसी समस्याओं पर भी आजमाया है और हमें आश्चर्यजनक लाभ मिला है-

3- उंगलियों के बीच में जहां घाव व सडन गलन होती है वहां ये औषधि भरने से उंगलीयों के बीच की मांस की सडन रुक जाती है तथा घाव ठीक हो जाते हैं-

4- अरंड के तेल में मिलाकर इस औषधि को फटी हुई एड़ियों (Cracked Heel) पर लगाने से फटी एड़ियां ठीक होती है-

5- कील मुहासों पर गुलाब जल में मिलाकर इसका लेप लगाने से कील मुंहासे बैठ जाते हैं तथा उनका पस दूर हो जाता है-

नासूर तथा पुराने व्रण पर निंब सिद्ध लेप का अद्भुत प्रयोग

6- कभी कभी शैया ग्रस्त रोगियों को लगातार सोए पड़े रहने से तथा हवा ठीक से ना मिलने की वजह से पीठ में घाव हो जाते हैं जिसे शैय्या व्रण (Bedsore) कहा जाता हैं जो बेहद तकलीफ देह होते हैं तथा जल्दी भरते भी नहीं है ऐसी स्थिति में रोगी के पीठ पर इस औषधि को छिड़कने से शैय्या व्रण  दूर होते हैं-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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