6 मई 2018

चर्म रोगों पर रामबाण दवा है पंचनिंबादि चूर्ण


हम आजकल हर कोई त्वचा संबंधित विभिन्न समस्याओं से परेशान है जिस में इन्फेक्शन, फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection), खुजली, खाज, दाद, एक्जिमा (Eczema), सोरायसिस (Psoriasis), शीतपित्त (Utricaria),कील मुहासे, फोड़े फुंसी, जख्मों का पकना तथा त्वचा खुरदुरी होना, रैशेश होना (Rash) तथा दाग धब्बे होना जैसी समस्याएं आम देखने को मिलती है-

चर्म रोगों पर रामबाण दवा है पंचनिंबादि चूर्ण

कई बार त्वचा संबंधित समस्याओं को दवाइयों से ठीक करना मुश्किल हो जाता है लेकिन आज हम आपको जो चूर्ण बता रहे हैं उसके उपयोग से त्वचा संबंधित समस्त रोग नष्ट होते हैं महर्षि सारंगधर ने इस चूर्ण के बड़े गुणगान किए हैं जो हम आपको अगले भाग में विस्तार पूर्वक बताएंगे इस भाग में हम चर्म रोग के मुख्य कारण तथा चर्म रोग पर पंचनिंबादि चूर्ण (Panchanimbadi Churna) क्यों और कैसे कार्य करता है इसके बारे में विस्तार से बताएंगे-

त्वचा संबंधित समस्याओं का मुख्य कारण-


हम विभिन्न प्रकार का आहार लेते हैं तथा खाया हुआ अन्ना पेट में जाने के बाद उसमें से विभिन्न प्रकार के रस उत्पन्न होकर अलग-अलग स्वरुप में रुपांतरित होते हैं तथा शरीर में अलग-अलग स्वरूप से परिभ्रमण करते हैं लेकिन कभी-कभी आहार लेने की हमारी अज्ञानता या विरुद्ध आहार के चलते खाया हुआ अन्न शरीर को पोषण देने की जगह विकृत रस (Toxic) बनाता है यानि शरीर में विष उत्पन्न करता है और यह विष लिवर की कम कार्यशीलता के चलते रक्त में घुल जाते हैं तथा चर्म रोग उत्पन्न करते हैं-

त्वचा पर उठने वाले विविध एलर्जी (Allergy), इंफेक्शन, फोड़े फुंसी, दाद, खाज, खुजली (Itching), एक्जिमा, सूखी खुजली, गीली खुजली तथा कुष्ठरोग तक सारी त्वचा संबंधी समस्याएं ज्यादातर अन्न खाने के बाद पैदा हुए विकृत तथा विषैले पदार्थों (Toxins) के रक्त में घुल जाने के कारण ही पैदा होते हैं-

क्या हैं उपाय-

इस तरह की समस्याओ में व्यक्ति रोग से पीड़ित होने के बावजूद भी अपनी जीभ तथा स्वाद को काबू नहीं कर सकता है तथा भोजन लेने में पथ्य-अपथ्य का विचार नहीं करता है फिर भी उसे इस दर्द से छुटकारा पाने की जल्दी पड़ी होती है जिसकी वजह से वह बाजार से मिलने वाले लोशन व मलहम लगाया करता है तथा अपने रोग को थोड़ा दबाया करता है लेकिन जैसे ही यह क्रीम या मलहम लगाना बंद कर देता है रोग पुनः उत्पन्न होता है क्योंकि रोग का ऊपर से दिखने वाला स्वरूप तथा कारण शरीर में रक्त में घुला हुआ विष (Toxins) होता है जो उपरी तौर पर लगाए हुए क्रीम या मरहमो से नष्ट नहीं होता है और जहां तक शरीर से विषैले तत्व का नाश नहीं होता, रक्त साफ नहीं होता, पाचन क्रिया सुचारू नहीं होती, शौच व मूत्र तथा पसीने द्वारा संचित दोषों तथा विष का योग्य उत्सर्जन (Detoxification) नहीं होता तब तक इन समस्याओं से पूरी तरह छुटकारा मिलना असम्भव बन जाता है-

क्या करे परहेज-


1- ऐसे रोगों से ग्रसित लोग अगर थोड़ा पथ्यापथ्य करें तली-भुनी चीजें, नमक तथा बेकरी प्रोडक्ट और दूध से बनी चीजें वह मिठाइयां थोड़े दिन कम करें या बंद कर दें और साथ में इस चूर्ण का उपयोग करें तो त्वचा संबंधित समस्त व्याधियों से पूर्णता छुटकारा मिल सकता है-

2- कभी कभी संसर्गजन्य रोग (Infectious Disease) तथा अन्य व्याधि के विष के परिणाम से भी आपकी त्वचा पर त्वचा रोग उत्पन्न होते हैं उपदंश (Syphilis) जैसी बीमारी के मिटने के बाद भी उसका विष या विष के कुछ अंश शरीर में रह जाने से फोड़े फुंसी तथा चकते (Nettle-Rash) निकलते हैं कभी-कभी किसी एलर्जी के कारण भी शरीर पर काले दाग धब्बे निकलते हैं-

3- तब वैध्यजन गंधक, रस कपूर जैसी तेज औषधियों से बने औषधीय योग रोगी को देते हैं लेकिन इन योग में कठिन पथ्य पालना पड़ता है तथा अगर पथ्य पालने में कोई भूल हो तो दर्द या समस्या कम होने की जगह बढ़ भी सकती है अथवा उसका रिएक्शन भी हो सकता है-

4- इसलिए ऐसे रोगों में अनुभवी वैध्य भी बड़े ही सावधानी से ऐसी औषधियां इस्तेमाल करते हैं-

चर्म रोगों पर रामबाण दवा है पंचनिंबादि चूर्ण

5- लेकिन पंचनिम्बादी चूर्ण (Panchanimbadi Churna) बेहद निरापद व निर्दोष  है इसका कोई रिएक्शन नहीं होता है इसके सेवन से शरीर में लंबे समय से संचित दोषों तथा विष (Toxins) का शमन होता है जिससे त्वचा संबंधित विकार नष्ट होते हैं-

6- पंचनिंबादि चूर्ण भगंदर (Fistula) जैसी कष्टसाध्य तकलीफ में भी उपयोगी है इसके सेवन से अंगों में हुई सड़न (Rottenness) कम होती है तथा जख्म जल्दी भरने लगते हैं अगर कड़क पथ्य पालन के साथ भगंदर में इसका सेवन किया जाए तो बिना ऑपरेशन के भगंदर संपूर्ण ठीक हो सकता है-

7- पंचनिंबादि चूर्ण श्लीपद (Elephantiasis), नाड़ी व्रण, प्रदर, मेंदों वृद्धि जैसी समस्याओं पर भी लाभदायक है-

8- पंचनिंबादि चूर्ण (Panchanimbadi Churna) के नियमित सेवन से त्वचा में चमक आती है, त्वचा निखरती हैं, दूषित रक्त शुद्ध बनता है तथा त्वचा संबंधित समस्त रोग नष्ट होते हैं-

9- अक्सर सिर की त्वचा में होने वाली असाध्य खुजली, पपड़ी जमना, खुश्की, डैंड्रफ जैसी समस्या में इस चूर्ण का आंतरिक सेवन तथा बाह्य लेपन करने से चमत्कारिक लाभ मिलता है-


प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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