28 मई 2018

आधुनिक शैम्पू और आयुर्वेदिक हर्बल शैम्पू की सच्चाई


पिछले लेख में हमने जाना की बालों की समस्या के लिए उपचार या रोकथाम करते समय हमें बालों में कोई भी रसायनिक सौंदर्य प्रसाधन, बाजार में मिलने वाले केशतेल व शैंपू का उपयोग नहीं करना चाहिए इसे पढ़कर आप लोगों के मन में यह प्रश्न तो जरुर ही उठा होगा की अगर शैंपू का इस्तेमाल नहीं करना है तो बालों की योग्य सफाई  कैसे करें-

आधुनिक शैम्पू और आयुर्वेदिक हर्बल शैम्पू की सच्चाई

आजकल बालों की देखभाल या सफाई करने का सबसे उत्तम पर्याय बाजारु शेम्पू को ही माना जाता है और बिना शैंपू लगाए भी बालों की देखभाल और सफाई हो सकती है यह बात शायद लोगों को अविश्वसनीय लग सकती है और इसी वजह से शैंपू हानिकारक रसायनों से बनते हैं तथा बालों को नुकसान (Hair Damage) पहुंचाते हैं यह जानते हुए भी लोग अज्ञानता तथा आलस्य की वजह से बाजारु शैंपू का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं-

शैंपू क्या है-


बालों सफाई या अन्य समस्याओ के लिए इस्तेमाल होने वाले शैंपू दरअसल सर्फंकटनट, कंडीशनर तथा विविध कृत्रिम परफ्यूम व पानी का संयोजन मात्र ही है यानी कोई भी कंपनी कितने भी दावे करें लेकिन शैंपू शत प्रतिशत रसायनिक उत्पादन ही है तथा यह सिर की त्वचा को रुक्ष करते हैं और इसीलिए अक्सर महंगी से महंगी शैंपू इस्तेमाल करने पर भी बालों का झड़ना (Hair fall) या अन्य समस्याएं नहीं रोकी जा सकती-

आम लोगों के मन में अच्छे शैंपू की धारणा-


शैंपू की अच्छी पैकिंग, सिने अभिनेता या अभिनेत्रियों ने विज्ञापनों में किए हुए बड़े बड़े दावे, ऊँचे दाम, शैंपू की तेज व मनमोहक सुगंध, शेम्पू का ज्यादा झाग और शैंपू के बाद बढ़ने वाली बालों की मुलायमता को ही अक्सर अच्छे शैंपू की कसौटी माना जाता है लेकिन बालों में शैंपू लगाने के बाद बालों का मुलायम होना शैंपू का कोई औषधीय गुण नहीं बल्कि शैंपू में मिलाए हुए रसायनों की बालों की ऊपरी सतह पर होने वाली रासायनिक क्रिया मात्र ही है-

इतनी सच्चाई पढ़ने के बाद भी जो पाठक गण हमसे सहमत ना हुए हो उनके लिए शैंपू का इतिहास पढ़ना भी अत्यंत जरूरी है-

शैंपू का इतिहास-


अंग्रेज अपने शाशनकाल की शुरुआत में भारत में आए तब उन्होंने देखा कि भारतीय लोग अपने बाल विशिष्ट सुगंधित द्रव्य तथा औषधियों से बने काढ़े से धोते हैं तथा भारतीय लोगों के बाल घने, मजबूत व लंबे होते थे जबकि अंग्रेजों के बाल भारतीय लोगों की तुलना में भूरे, कम घने,कम लंबे तथा देरी से बढ़ने वाले होते थे और तब उन्होंने बड़े ही आश्चर्य से बाल धोने की पद्धतियों को सीखा तथा भारतीय लोगों से व भारतीय वेद लोगों से पुछकर बाकायदा इस विषय पर दस्तावेज तथा विविध लेख तैयार किए व भारत से बाल धोने में इस्तेमाल होने वाले सुगंधित द्रव्य तथा औषधियां इंग्लैंड भेजा जिसका उल्लेख अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में लिखे हुए तथा दस्तावेजों तथा पत्रों में आज भी मौजूद है-

Wikipedia के मुताबिक शेम्पू शब्द ही भारतीय मूल का है तथा अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान बोलचाल में प्रयुकत हुआ है-

शैंपू शब्द का उद्गम लगभग सन 1762 के आसपास बताया गया है तथा यह भी कहा जाता है कि भारतीय लोग सुगंधित लेपो तथा सुगंधित औषधिया युक्त काढ़े से बाल व सिर की मालिश करते हुए बालों की सफाई करते थे जिसे चम्पी कहा जाता था उसी चम्पी शब्द का अपभ्रंश शैंपू है-

यही नहीं सबसे पहला कमर्शियल शैंपू जो बाजार में उपलब्ध हुआ वह भी काढे के स्वरूप में ही था फिर समय के चलते उसमें विविध बदलाव आते गए तथा शैंपू में कृत्रिम सुगंधित द्रव्य तथा अन्य क्लींजिंग केमिकल मिलाने का चलन जारी रहा जो आज तक अलग-अलग ब्रांड तथा अलग-अलग रूपों में प्रचलित है-

आयुर्वेद तरीके से बाल कैसे धोए-


आजकल महिलाएं तथा पुरुष भी ब्यूटी पार्लर में घंटो बैठकर तथा हजारों रुपए खर्च करके हेयर स्पा (Hair Spa Treatment) करवाते हैं लेकिन अगर देखा जाए तो यह हेयर स्पा भी बाल तथा सिर की देखभाल करने की भारतीय शास्त्रोक्त पद्धति ही है जिनका उल्लेख आयुर्वेद में मिलता है तथा भारत में इसका उपयोग  प्राचीन काल से हो रहा हैं-

बाल धोने का तरीका-


बालों को रात को तेल लगा कर सुबह बालों की जड़ों या सिर की त्वचा में काली मिट्टी (Black Clay) या मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाएं यह लेप आधे घंटे बाद जब थोड़ा सूख जाए या कड़क हो जाए तब आप इसे पानी से धो लें-

यह लेप सिर की गर्मी तथा सिर की त्वचा में पाई जाने वाली गंदगी (Debris) व विषाक्त द्रव्य को सोख लेता है तथा बालों में लगाया हुआ अतिरिक्त तेल भी साफ कर देता है जिससे सर की त्वचा की कंडिशनिंग (Scalp conditioning) हो जाती है तथा तेल निकालने के लिए आपको साबुन या केमिकल से बने हुए शेपू की  जरूरत नहीं पड़ती-यह करने के बाद-

बाल धोने के लिए हेयर वोश (Ayurvedic Hair Wash)-


रीठा- 150 ग्राम
शिकाकाई- 100 ग्राम
नीम के पत्ते- 50 ग्राम
संतरे के छिलके- 50 ग्राम
गुलाब की पंखुड़ियां- 50 ग्राम
आवला- 50 ग्राम
गुड़हल के फूल- 50 ग्राम

बनाने की विधि-


इन सारी औषधियों का चूर्ण करके इन्हें अच्छे से मिलाकर रख ले जब बालों को धोना हो तब 40 से 50 ग्राम पाउडर को रात को 1 लीटर पानी में भिगोकर रखें सुबह इसे उबाल कर आधा पानी बचे तब इस काढे को छान कर ठंडा करके इस काढ़े से बाल धोएं-

आधुनिक शैम्पू और आयुर्वेदिक हर्बल शैम्पू की सच्चाई

यह आयुर्वेदिक हेयर वाश (Ayurvedic Hair Wash) संपूर्ण निरापद है तथा इसके नियमित इस्तेमाल से बालों का झड़ना, बालों का टूटना, बालों का दोमुंहा होना (Spilt End) व बालों का असमय सफ़ेद होना रुकता हैं-

यह आयुर्वेदिक हेयर वाश बालों की जड़ों को मजबूत करता है सिर की त्वचा के रुखापन (Dryness) को कम कर करता है सिर की त्वचा की अतिरिक्त तैलीयता को संतुलित करता है-

इस आयुर्वेदिक हेयर वाश के नियमित इस्तेमाल से बालों में होने वाली जु (Hair Lice) व लिखे नष्ट होती है-

यह आयुर्वेदिक हेयर वाश सिर में होने वाली रूसी (Dandruff), फोड़े फुंसी तथा खुजली को भी मिटाता है बालों को घना लंबा करता है-

छोटे बच्चों के लिए यह हेयर वाश बेहद लाभदायक है इसके उपयोग से छोटे बच्चे रासायनिक उत्पादनों के साइड इफेक्ट से बचेंगे तथा उनके बाल मजबूत घने व लम्बे भी होंगे तथा बाजारु प्रसाधनों के अति उपयोग से होने वाली बालों की समस्याओं (Hair Damage) से भी बचे रहेंगे-

इस तरह थोड़ी मेहनत और समय खर्च करके आप अपने बालों को घर बैठे ही उत्तम तरीके से संवार सकते हैं तथा महंगे शैंपू या हेयर स्पा ट्रीटमेंट (Hair Spa Treatment) का बिना केमिकल के प्राकृतिक तरीको से घर बैठे लाभ ले सकते हैं-


प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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