19 जून 2018

लकवे की रामबाण दवा है माऊलअस्ल

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माऊलअस्ल (Maulasal) जो कि यूनानी चिकित्सा पद्धति का एक अनमोल औषधीय योग है यह कई यूनानी हकीमो का बेहद पसंदीदा तथा अनुभूत योग है भारत में मुगल काल के दौरान जब यूनानी हकीमी लोकप्रिय हुई तब यह योग भी भारत में प्रचलित हुआ ना सिर्फ यूनानी हकीम बल्कि हमारे भारतीय वैदजनों ने भी इसे सराहा हैं-

लकवे की रामबाण दवा है माऊलअस्ल

माऊलअस्ल (Maulasal) एक उत्तम औषधि होने के साथ-साथ उत्तम अनुपान भी है यह लकवा (Paralysis), मुँह का लकवा (Facial palsy) जैसे रोगों में उत्तम चिकित्सा है आज भी कई वैध जन तथा हकीम लकवे की चिकित्सा में इसे महत्वपूर्ण मानते हुए मरीज को सिर्फ माऊलअस्ल पीने की सलाह देते हैं-

आज हम आपको माऊलअस्ल (Maulasal) बनाने की विधि तथा उसके लाभ व उपयोग के बारे में विस्तार से बताएंगे-

माऊलअस्ल (Maulasal) बनाने की विधी-


सामग्री-

शुद्ध शहद (अस्ल) 25 ml
शुद्ध पानी 50 ml

विधी-

शहद और पानी को मिलाकर धीमी आंच पर उबालें तथा 2 भाग जल जाए याने 25 ml मिश्रण बच जाए तब इसे गुनगुना ही सेवन करे यह एक बार की मात्रा है-

मात्रा व सेवन विधी-

दिन में दो या तीन बार उपर बताई मात्रा में रोगी की उम्र, बल तथा रोग की अवस्था के अनुसार-

माऊलअस्ल क्यों गुणकारी हैं-


महर्षि चरक कहते हैं कि शहद (Honey) शरीर के प्रत्येक अंग तथा नस नाड़ियों को स्वस्थ, शुद्ध व मजबूत बना देता है शरीर में ऊर्जा पैदा करता है तथा रोगप्रतिकारक शक्ति (Immune system) बढ़ा कर समस्त रोगों का शत्रु के समय नष्ट कर देता है इसीलिए महर्षि चरक शहद (Honey) को दिव्य गुणों से परिपूर्ण मानते हैं-

जब शहद (Honey) को पानी में मिलाकर औटाया जाता है तब शहद के गुणों में बढ़ोतरी हो जाती है क्योंकि जहां शहद दिव्य गुणों से परिपूर्ण है वही शास्त्रों में जल को भी अमृत समान गुण वाला कहा गया है इसीलिए जब दोनों का योग्य पद्धति से संयोजन होता है तब माऊलअस्ल (Maulasal) उत्तम औषधीय गुणों से परिपूर्ण बनता है तथा इसका सेवन करने से शरीर को स्वास्थ्य तथा ऊर्जा (Energy) प्रदान होती है-

लाभ व उपयोग-


1- मनुष्य शरीर को होने वाले ज्यादातर सभी लोग पेट की गड़बड़ी से ही उत्पन्न होते हैं माऊलअस्ल (Maulasal) पेट में पहुंचकर पाचन क्रिया को सुचारु करता है तथा शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालता है जिससे शरीर पर रोगों की पकड़ ढीली होने लगती है तथा शरीर जल्दी निरोगी होता है-

लकवे की रामबाण दवा है माऊलअस्ल

2- माऊलअस्ल (Maulasal) के सेवन से दर्द में भी राहत मिलती है क्योंकि इसके सेवन से शरीर में बढ़े हुए वायु का शमन होता है जिस से आफरा कम होता है-

3- वात रोगों में इसके सेवन से नसों में आया कड़ापन, जड़ता (Stiffness), सुन्नपन (Numbness) तथा दर्द कम होता है-

4- माऊलअस्ल के सेवन से रक्त की शुद्धि होती है जिससे दाद, खाज, खुजली जैसी समस्याएं मिटती है त्वचा के इंफेक्शन (Skin infection) व त्वचा रोगों में राहत मिलती है-


5- माऊलअस्ल के सेवन से शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति भी बढ़ती है-

6-  माऊलअस्ल कंपवात, पार्किंसन (Parkinson Disease), हाथ पैरों के नसों का ढीलापन, डिस्ट्रॉफी (Muscular dystrophy) जैसी समस्याओं पर भी उत्तम लाभकारक योग है इससे शरीर में रक्त संचार सुचारू होता है तथा शरीर में उत्पन्न हुए अवरोध दूर होते हैं माऊलअस्ल शरीर को बलशाली बनता है जिससे अंगों का ढीलापन दूर होता है तथा वृधावस्था की समस्याएं भी मिटती है-

7- माऊलअस्ल शरीर से अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालता है जिससे मूत्र संबंधी तकलीफें, ज्यादा प्यास लगना, जलन, दाह (Burning) तथा गर्मियों में लू लगने से होने वाली समस्या भी दूर होती है-

माऊलअस्ल के सेवन से मानसिक लाभ-


योग्य पोषण की कमी तथा चिंता (Anxiety), स्ट्रेस, उदासीनता (Apathy) जैसी नकारात्मक भावनाओं के चलते मनुष्य के शरीर में जीवनसत्व की कमी हो जाती है जिसके कारण मनुष्य की मानसिक शक्ति (Mental capacity) अवरुद्ध हो जाती है तथा भावनात्मक कुंठाए व रुकावटें भी पैदा होती है जिससे मनुष्य को चिड़चिड़ापन तथा नकारात्मक विचार आने लगते हैं, उत्साह खत्म होने लगता है और ऐसा व्यक्ति हमेशा आलस्य, सुस्ती (Lethargy), स्फूर्ति हीनता व निराशा (Frustration) से घिरा रहता है तथा बिना कोई काम करे ही थकान और कमजोरी महसूस करने लगता है-

लकवे की रामबाण दवा है माऊलअस्ल

1- माऊलअस्ल में पाया जाने वाला फोस्फरस,शर्करा लवण,गंधक तथा प्राकृतिक चिकनाई का योग्य संयोजन मस्तिष्क के रंध्रों को बंद नहीं होने देता जिससे मानसिक तकलीफों तथा भावनात्मक अवरोधों (Emotional blockages) पर यह चमत्कारिक रूप से लाभ करता है-

2- माऊलअस्ल मस्तिष्क को पोषण देने तथा स्मरण शक्ति बढ़ाने में भी बेहद उपयोगी है-

3- माऊलअस्ल व्यक्ति की सकारात्मकता, आत्मबल (Will power) तथा आध्यात्मिक शक्ति (Spirituality) को भी बढ़ाने का काम करता है इसीलिए कई साधु संत तथा सूफी फ़क़ीर इसका सेवन करके अपनी आध्यात्मिक शक्ति व ऊर्जा को बढ़ाते हैं-

4- माऊलअस्ल का सर्वोत्तम गुण यह है कि यह सभी प्रकृति वाले व्यक्ति को तथा हर उम्र के व्यक्तियों के लिए समान रूप से लाभकारी है इसका सेवन वात-पित्त-कफ प्रकृति वाले व्यक्ति किसी भी समय किसी भी मौसम तथा किसी भी रोग में उठा सकते हैं-

5- माऊलअस्ल रक्त का शोधन (Blood purification) करता है, तथा हृदय को मजबूत रखता है, मज्जाओ (Marrow) को ऊर्जा देता है-

6- माऊलअस्ल हड्डियों में कैल्शियम तथा फास्फोरस को बरकरार रखें उन्हें मजबूती देता है इस तरह से माऊलअस्ल स्वास्थ्य-सौंदर्य तथा मानसिक ऊर्जा देने वाला चमत्कारी औषधि योग है-

नोट-


लकवा (Paralysis), या अर्धांग वायु जैसी बीमारी में शुद्ध शहद उपलब्ध ना होने पर पुराना गुड़ भी ले सकते हैं-

पक्षाघात के रोगियों में माऊलअस्ल का मुख्य औषधि तथा अन्य दवाओं के अनुपान के तौर पर भी खुलकर उपयोग कर सकते हैं-

यूनानी हकीमों का दावा है कि लकवे (Paralysis), के रोगी को अगर 7 दिन तक सिर्फ माऊलअस्ल (Maulasal) पिलाकर लंघन करवाया जाए तो लकवे की बीमारी में संपूर्ण राहत मिलती है तथा पैरालिसिस से आई हुई शरीर क्षीणता मिटती है तथा शरीर में नई उर्जा का संचार होता है-

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