27 जून 2018

बिना ऑपरेशन के बवासीर कैसे मिटाएं

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हमारी वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य लोगों को भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद से अवगत व परिचित कराना ही हैं और एलोपैथी से होने वाले साइड इफेक्ट से लोगों को जागृत करना व बिना किसी महंगी दवाई या धन व्यय के लोगों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करना ही हमारा मुख्य आशय है इसी आशय के चलते हम प्राचीन काल से वैध्य जनों के अपनाए हुए अनुभूत निरापद नुस्खे तथा चिकित्सा प्रकाशित करते हैं जिससे एक स्वस्थ समाज का व स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण हो तथा लोगों का प्राकृतिक चिकित्सा व आयुर्वेद के प्रति रुझान बढे तथा लोग महंगी चिकित्सा, ऑपरेशन, दवाइयों से होने वाले साइड इफेक्ट से भी बचे- 

बिना ऑपरेशन के बवासीर कैसे मिटाएं

इसी आशय से लोक कल्याण हेतु हम कई जटिल व असाध्य रोगों की सरल चिकित्सा जो की बेहद सुलभ, सरल व सस्ती हैं यहा आप लोगो को बताते हैं जिसका लाभ आप घर बैठे बिना कोई खर्च के उठा सकते है और इसी कड़ी में आज बात करते हैं अर्श या बवासीर (Hemorrhoids) की.... 

आयुर्वेद ने बवासीर (Hemorrhoids) को एक कष्टदाई तथा असाध्य रोग माना है वैध्य आचार्यों ने इस रोग के कष्टों का वर्णन करते हुए इसे यम स्वरूप  व इसके उत्पन्न होने के कारणों में  पूर्व जन्म में किए गए भयंकर पापों को भी जिम्मेदार ठहराया है इससे आप समझ सकते हैं की यह रोग के रोगी को कितना कष्ट व भयंकर यातनाए सहनी पड़ती होगी-

यह तो हुई शास्त्रों की बात लेकिन आजकल ज्यादातर अयोग्य जीवन शैली, अयोग्य खानपान तथा स्वयं की प्रकृति के प्रतिकूल पथ्य अपथ्य ना रखकर किए हुए प्रज्ञापराध की वजह से लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं तथा इसे ठीक करवाने के लिए कई दवाएं मरहम व चिकित्सा करवाते रहते हैं फिर भी उन्हें वांछित लाभ नहीं मिलता और थक हार के चिकित्सक उनको ऑपरेशन करवाने की सलाह देता है-

ऑपरेशन करवाने के बाद भी अगर उचित खान-पान व पथ्यापथ्य का ध्यान ना रखा जाए तो यह रोग फिर से होता है तथा रोगी जीवन भर कष्ट भुगतता रहता है-

आज हम आपको बिना ऑपरेशन अर्श (Piles) बवासीर (Hemorrhoids)  को मिटाने वाला एक सरल किंतु अनुभूत योग बताएंगे जिसका सेवन अगर योग्य पथ्य अपथ्य का पालन करते हुए किया जाए तो इस बीमारी से जड़ से छुटकारा पाया जा सकता है तथा ऑपरेशन से भी बचा जा सकता है-

बिना ऑपरेशन के बवासीर कैसे मिटाएं

इस औषधीय योग का नाम अर्शोघ्न कल्प है तथा यह बवासीर (Hemorrhoids)  पर रामबाण उपचार है इसके सेवन से यकृत की कार्यक्षमता सुधरती है तथा दस्त साफ होता है जिससे आंतों की गर्मी निकल जाती है और इसी वजह से अर्शोघ्न कल्प योग के सेवन से बवासीर के अंदर से बहने वाला खून बंद हो जाता है अर्शोघ्न कल्प के प्रयोग से गुदा के अंदर रहने वाली रक्तवाहिनियों का संकुचन होता है और इसीलिए यह कल्प खूनी बवासीर में चमत्कारीक रूप से लाभ देता है तथा अपना नाम स्वयं सार्थक करता है-

अर्शोघ्न कल्प बनाने की विधि-


सामग्री-


सुखाए हुए जिमीकंद का आटा- 160 ग्राम
चित्रक जड़ की छाल- 80 ग्राम
सोंठ- 40 ग्राम 
काली मिर्च- 20 ग्राम 
त्रिफला- 120 ग्राम
पिपरी मूल- 40 ग्राम 
तालीसपत्र- 40 ग्राम 
शुद्ध भिलावा- 40 ग्राम 
बायबिडिंग- 40 ग्राम 
मुलेठी- 80 ग्राम 
सफेद मूसली- 40 ग्राम 
विधायरे के बीज-  160 ग्राम
दालचीनी- 20 ग्राम 
छोटी इलायची- 20 ग्राम
पुराना गुड- 1880 ग्राम

विधि-


जिमीकंद के आटे तथा अन्य सारी औषधियों को कूट पिसकर बारीक चूर्ण बना लें तथा गुड़ को थोड़ा सा हल्का गर्म कर सारी औषधीया व  जिमीकंदके आटे को मिलाकर अच्छे से मसल कर  30 से 40 ग्राम के लड्डू बना ले-

मात्रा व अनुपान-


प्रतिदिन सुबह शाम 1-1 लड्डू दूध के साथ या बिना दूध के ही खाए-

लाभ व उपयोग-


1- अर्शोघ्न कल्प के सेवन से बिना ऑपरेशन या क्षार कर्म के ही बवासीर (Hemorrhoids)  जड़ से नष्ट हो जाता है-

बिना ऑपरेशन के बवासीर कैसे मिटाएं

2- अर्शोघ्न कल्प का नियमित सेवन करने वाले व्यक्ति की जठराग्नि तथा पाचन शक्ति प्रबल हो जाती है जिससे खाए हुए भोजन का अच्छे से पाचन होता है तथा शरीर को पोषण भी मिलता है-

3- अर्शोघ्न कल्प खाने से काम शक्ति (Sex power) भी बढ़ती है तथा शरीर में नया खून व वीर्य भी बनने लगता है-

4- अर्शोघ्न कल्प का सेवन श्लीपद (Elephantiasis), सूजन, कब्ज, वात की समस्या, हिचकी जैसी समस्या में भी लाभदायक हैं-

5- अर्शोघ्न कल्प के सेवन से खांसी, श्वास, राज्य क्षमा (Tuberculosis) तथा प्रमेह (Gonorrhea) जेसे रोगों में भी लाभ होता है-

6- अर्शोघ्न कल्प पौष्टिक, शक्तिदायक, अग्निवर्धक तथा आफरा नष्ट करने वाला उत्तम योग है यह प्लीहा तथा गुल्म रोगों में भी लाभप्रद है-

7- योग्य खान पान तथा पथ्य अपथ्य का ध्यान रखकर इसका सेवन किया जाए तो बिना दवाई व बिना ऑपरेशन के तथा बिना अतिरिक्त खर्च के ही बवासीर को जड़ से मिटाया जा सकता है-

परहेज-


भोजन में आलू, बेंगन, तली-भुनी चीजें, मिर्च मसालेदार भोजन, अचार, नमकीन, मैदे से बने हुए खाद्य पदार्थ, मांसाहार, ना करे तथा सादा व सुपाच्य भोजन करे-

शराब, तथा धूम्रपान जैसी चीजो से दूर रहे-

रात्रि जागरण से बचें, बहुत देर खड़े रहने से बचें दुपहिया वाहनों पर ज्यादा सवारी ना करें तथा अति मैथुन से भी बचें-

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