16 जून 2018

औषधीय गुणों से भरपूर हैं गुडहल के पुष्प


भारतीय घरों के आंगन तथा बगीचों में पाया जाने वाला गुड़हल (Hibiscus flower) दरअसल चीन देश से होकर भारतीय उपखंड में आया है लेकिन सदियों पहले जब भारत में चिकित्सा तथा अध्यात्म संबंधित ग्रंथ गुटिकाए लिखी जाने लगी तब उन ग्रंथ गुटिकाओ में भी गुड़हल के फूल की महत्ता का उल्लेख मिलता है इसी से हम समझ सकते हैं कि भारत में गुड़हल प्राचीन समय से भारतीय औषधि शास्त्र तथा अध्यात्म शास्त्र का अविभाज्य अंग रहा है-

औषधीय गुणों से भरपूर हैं गुडहल के पुष्प

गुड़हल के लाल फूल ना सिर्फ श्री गणेश जी के प्रिय फूल है बल्कि सूर्य देवता की आराधना में भी इसका प्रयोग किया जाता है आजकल सफेद, पीले, नीले, लाल, नारंगी जैसे कई रंगों में गुड़हल के फूल देखे जाते हैं लेकिन औषधीय उपयोग में मुख्यतः लाल तथा सफेद रंग के गुड़हल के फूल (Hibiscus flower) का उपयोग होता है जिस में लाल गुड़हल ज्यादा लाभदायक औषधीय तत्वों से युक्त मानी जाती है-

परिचय-

गुड़हल को संस्कृत में जया, जपा, आंद्रपुष्पी, जपाकुसुम व हिंदी में इसे जपापुष्प, गुडहल, जास्वंद तथा इंग्लिश में इसे हिबिस्कुस रोजा (Hibiscus rossa)  कहा जाता है-

गुण-


गुड़हल (Hibiscus flower) शीतल, पुष्टि दायक, गर्भ के लिए हितकारी तथा प्रमेह को मिटाने वाला है इसके पुष्प तीखे, मधुर, पुष्टिकारक, ग्राहक केश्य तथा मन को शांति देने वाले होते है-

महर्षियों ने गुड़हल को दाद, अर्श (Haemorrhoids), धातु रोग, प्रमेह (Gonorrhea), प्रदर रोग तथा इंद्रलुप्त (Alopecia) को नाश करने वाला उत्तम औषधि माना है-

उपयोग-


प्राचीन काल से ही गुड़हल के फूलों (Hibiscus flower) को धार्मिक आध्यात्मिक तथा औषधि कर्म हेतु उपयोग में लिया जाता है प्राचीन शास्त्रों में उल्लेख के अनुसार जास्वंद याने गुड़हल के फूल तथा रक्त चंदन को पीसकर योद्धा अपने अस्त्र-शस्त्रों पर इसका लेप करते थे जिससे उनके हथियारों की धार यथावत रहती थी तथा योद्धाओं में शौर्य की भी वृद्धि होती थी-

गुड़हल के फूलों (Hibiscus flower) को पीसकर उसके रस में चाकू और छुरी को तर करके सुखा कर उस छूरी से नींबू काटकर कई धूर्त व फर्जी बाबा तथा तांत्रिक लोगों को उल्लू बनाकर ठगते भी है क्योंकि गुड़हल के रस में तर की गई छुरी से अगर नींबू काटा जाए तो उस नींबू से रक्त जैसे लाल रंग का रस निकलने लगता है तथा भोले भाले लोग इसे धूर्त बाबाओं के चमत्कार मानने लगते हैं तथा उनके जाल में फ़स जाते हैं-

आधुनिकता के इस दौर में आज भी कई आदिवासी इलाकों में गुड़हल की जड़ को गुड़हल के फूलों (Hibiscus flower) के रस में भिगोकर सुखाकर उसके मनकें या मणि बनाकर माला बनाई जाती है यह माला गले में धारण करने से ह्रदय रोग में लाभ होता है (नियत समय के बाद माला को निकालकर उसमें शक्कर डालकर चीटियों को खिलाने का प्राविधान है ऐसा हमें चंद्रपुर से मुंबई आए हुए एक बुजुर्ग आदिवासी वैदजी ने बताया था)

आज भी देहात तथा खासकर आदिवासी क्षेत्रों में गुड़हल के फूल का औषधीय स्वरुप में काफी उपयोग किया जाता है लेकिन बड़े खेद की बात यह है कि आम भारतीय लोगों ने इस फूल को मात्र शोभा वर्धन तथा भगवान को अर्पण करने के हेतु से ही याद रखा है-

आजकल विदेशों में हिबिस्कुस फ्लावर (Hibiscus flower) के कई तरह के कॉस्मेटिक खाद्य पदार्थ शरबत, गुलकंद, तथा आइसक्रीम तक बना कर इसका उपयोग किया जाता है तथा इसके सौंदर्यवर्धक व स्वास्थ्यवर्धक लाभ लिए जाते हैं लेकिन भारत में गुड़हल प्रचुर प्रमाण में उपलब्ध होने के बावजूद भी हम भारतीयों ने इसे मानो भुला ही दिया हैं इसीलिए अगली पोस्ट में हम आपको गुड़हल से बनने वाले अनुभूत औषधीय योग जिसमे गुड़हल का गुलकंद, गुड़हल का शरबत, जपाकुसुम तेल, गुड़हल की चाय तथा गुड़हल का क्षीरपाक जैसे औषधीय कल्प की विधि व उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे-

औषधीय गुणों से भरपूर हैं गुडहल के पुष्प

यह औषधि योग बनाने के लिए आप गुड़हल के ताजे फूल या गुड़हल के फूल (Hibiscus flower) की सुखी पंखुड़ियां तथा गुड़हल के पंखुड़ियों का चूर्ण भी इस्तेमाल कर सकते हैं-

आइए जानते हैं कि गुड़हल की पंखुड़ियों को कैसे सुखाया जाए-


जरूरत तथा उपलब्धता के मुताबिक गुड़हल के फूलों को लेकर उसके बीच की लंबी डोरी नुमा डंडी को निकाल दे तथा फूलों को अच्छी तरह से पानी से धो लें फिर नीचे का हरे रंग का डंठल निकालकर गुड़हल के फूलों (Hibiscus flower) की पंखुड़ियों को हल्के हाथ से ध्यान से अलग कर दें-

अब इन पंखुड़ियों को साफ सूती कपड़ों पर फैला कर 2 घंटे तेज धूप में रखें तथा इसके बाद बाकी समय छाया में रखकर अच्छे से सुखा लें सूख जाने के बाद आप इसका चूर्ण बना सकते हैं-

चूर्ण बनाने के लिए पंखुड़ियों को तेज धूप में 1 से 2 घंटे फिर से सुखाए तथा इसे पीसकर चूर्ण हो जाने के बाद भी इस चूर्ण को 2 घंटे के लिए धूप में सुखा लें तथा छानकर साफ-सुथरी बोतलों में भर ले-

नोट-


चूर्ण का उपयोग करने से पहले 1 घंटे तक पानी में घोलकर रखें तथा 1 घंटे के पश्चात उपयोग करें जिससे चूर्ण का असर ज्यादा अच्छा होता हैं-


प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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