13 जुलाई 2018

सूखा रोग के अनुभूत उपचार


पिछले लेख में हमने बच्चों को सूखा रोग (Rickets) होने के मुख्य कारण तथा लक्षणों के बारे में विस्तार से जाना जिससे यह स्पष्ट हो गया की अगर गर्भाधान के समय स्री का शरीर कमजोर या कुपोषित है अथवा किसी शारीरिक रोग ग्रस्त है तो गर्भ में पलने वाले शिशु को सूखा रोग होने की संभावना अधिक बढ़ जाती हैं इसीलिए अच्छी संतति प्राप्त करने हेतु स्त्री तथा पुरुष दोनों ने ही गर्भाधान से पूर्व भी कुछ सावधानियां तथा उपाय योजना अवश्य करनी चाहिए-

सूखा रोग के अनुभूत उपचार


सूखा रोग की रोग थाम व सावधानिया-


1- गर्भावस्था में योग्य देखभाल तथा प्रसूति के बाद भी योग्य सावधानियां बरतने से बच्चों को इस रोग से अवश्य बचाया जा सकता है-
2- जो माताएं बच्चों को अपना दूध पिलाती है उन्हें हमेशा अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए तथा दूध की गुणवत्ता बनी रहे सात्विकता बनी रहे ऐसा ही आहार उपाय करना चाहिए-

3- जैसा की हमने पिछले लेख में देखा कि सूखा रोग (Rickets)  होने का मुख्य कारण बच्चे की रोग प्रतिकारक शक्ति का कम होना तथा बच्चे का सहजबल जो की प्रकृति द्वारा ही प्राप्त होता है उसका कम होना मुख्य कारण है बच्चे के योग्य विकास के लिए तथा बच्चे का सहज बल प्राकृतिक तरीके से बढ़ाने के लिए माताओं ने हमेशा बच्चे को अपना ही दूध पिलाना चाहिए जिससे बच्चे की रोगप्रतिकारक शक्ति बढे तथा बच्चे को ज़रूरी पोषण भी नैसर्गिक तरीके से प्राप्त होता रहे-

सूखा रोग के अनुभूत उपचार

4- दुसरा सबसे उत्तम उपाय है की सूखा रोग ग्रस्त बच्चे को माता ने अपने शरीर के पास ही रखना चाहिए मां के शरीर से मिलने वाली ऊर्जा बच्चे के आंतरिक विकास, मानसिक विकास तथा भावनात्मक विकास के लिए बेहद लाभदायक है जिससे बच्चा स्वस्थ तो रहता ही है साथ साथ खुश रहता हैं व खेलता भी रहता है आजकल आधुनिक विज्ञान में भी स्पर्श चिकित्सा (Touch therapy) को छोटे बच्चों के लिए बेहद उपयोगी माना है ऐसे में माताओं ने हमेशा बच्चों को अपने पास चिपकाए रखना अनिवार्य है अगर ऐसा ज्यादा देर तक ना कर पाए तो बच्चे को अच्छे से स्नान वगैरह करा कर माता ने अपने पहने हुए कपड़ों को बिना धोए उसमें बच्चों को लपेट कर रखना चाहिए जिससे माता के शरीर की ऊर्जा तथा गर्मी बच्चे को मिलती रहे यह प्रयोग दादी नानी द्वारा किया हुआ एक सफल प्रयोग है आधुनिक विचारधारा में शायद यह प्रयोग उचित ना लगे लेकिन यह हमारे पूर्वजों ने अपनाया हुआ बेहद सरल तथा लाभदायक उपाय हैं जिसके परिणाम प्रत्यक्ष हमने देखे हैं-

सूखा रोग के पारंपरिक उपचार-


1- आधुनिक विज्ञान की दृष्टि से सूखा रोग विटामिन डी (Vitamin D) की कमी से होने वाला रोग है इसीलिए बच्चे को नैसर्गिक रूप से विटामिन डी मिलता रहे इसके उपाय करने चाहिए विटामिन डी का सबसे उत्तम स्रोत सूर्य प्रकाश है सूर्य की कोमल किरणें याने सर्दियों में सुबह 8:00 से दोपहर 1:00 बजे तक तथा गर्मियों में सुबह 8:00 से 10:00 बजे तक के समय में बच्चे को शरीर में विभिन्न तेल की मालिश करके सूर्य की कोमल किरणें बच्चों पर पड़ती रहे इस तरह उन्हें धूप में रखना या बिठाना चाहिए-

2- धूप सेवन (Sun bath) के साथ साथ सूखा रोग में बच्चे के लिए मालिश (Body massage) भी एक उत्तम उपचार है आइए देखें की मालिश किस तरह करना है- 

3- नवजात शिशु से लेकर 1 साल के बच्चे तक बकरी के घी अथवा काले तिल का तेल अथवा सूरजमुखी के तेल से बच्चे को मालिश (Body massage) करनी चाहिए-

4- खासकर के बच्चे की पेट, कमर तथा पैरों के पिछले हिस्से पर अच्छे से और ज्यादा देर तक मसाज (Body massage) करनी चाहिए ऐसा करने से बच्चे में प्राण शक्ति की बढ़ोतरी होती है तथा उनका शरीर हष्ट पुष्ट होता है-

5- 1 साल से लेकर 5 साल के बच्चों में बकरी के घी में या तिल के तेल में अश्वगंधा तथा वच का चूर्ण समभाग मिलाकर तेल या घी को उबालकर जब हल्का गर्म हो तब पूरे शरीर पर लेप करके 5 मिनिट रहने दे इसके बाद लेप से ही पूरे शरीर की थोड़ा ज्यादा दबाव देकर मसाज (Body massage) करें याद रहे बड़े बच्चों को भी शरीर के पिछले भाग याने पेट, कमर, कूल्हे तथा पैरों के पिछले भाग में ज्यादा देर तक मसाज करनी है-

6- अगर बच्चे बेहद कमजोर हो दुबले पतले हो तो आप लाक्षादि तेल तथा नारायण तेल समभाग लेकर उसकी भी मालिश कर सकते हैं-

7- कुछ बच्चे बेहद कमजोर होते हैं तथा उनको तालू में खडडा सा पड़ जाता है ऐसे बच्चों में महामरिच्यादि तेल की मालिश करना चमत्कारिक लाभ देता है-

8- इस तरह अच्छे से मालिश करने के बाद आप बच्चों को कम से कम आधे घंटे तक धूप में लेटा कर या बिठा कर रख सकते हैं जिससे सूरज की कोमल कीरने उनके अंगों पर पड़ती रहे व विटामिन डी (Vitamin D) की योग्य आपूर्ति होती रहे-

9- छः महीने के बाद बच्चों को हफ्ते में एक बार मसाज करके बच्चों के कीड़े निकालने का चिकित्सा कर्म करना जरूरी है इस ट्रीटमेंट से बच्चों के रोम छिद्र खुलते हैं तथा बच्चों में ऊर्जा तथा तरावट आती है यह चिकित्सा कर्म करने के बाद की जाने वाली कोई भी चिकित्सा का परिणाम शीध्र व दौगुना आता हैं-


सूखा रोग के अनुभूत उपचार-


बच्चे हमारे देश की धरोहर है बच्चे ही भारत का उज्जवल भविष्य है इसलिए बच्चों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है अच्छे खान-पान पौष्टिक आहार के साथ साथ उनको योग्य व प्राकृतिक उपचार भी अवश्य मिलना चाहिए शारीरिक गठन या स्वस्थ शरीर के साथ-साथ स्वस्थ मन व बुद्धि भी होना बेहद जरूरी है प्राकृतिक उपचार साइड इफेक्ट्स से मुक्त होने के साथ साथ बच्चों के ना सिर्फ शरीर बल्कि मन को भी स्वस्थ रखते हैं बच्चों में नई ऊर्जा व तेजस्विता भरते हैं-

यहां हम आपको बच्चों के सूखा रोग के लिए दो अनुभूत तथा निरापद योग बता रहे हैं जो असल में आदिवासी योग है यह प्रयोग करने में बेहद आसान है तथा बच्चों के सूखा रोग पर रामबाण औषधि है आप इसे घर पर बनाकर अवश्य प्रयोग करें-

खूबकला- 100 ग्राम
बकरी का दूध- 1 लीटर

विधि-


खूबकला को बकरी के दूध में 1 घंटे भिगोकर मंद आंच पर उबाले जब दूध आधा हो जाए तब खूब कला को छानकर खूबकला के बीजों को छाया में सुखा ले-

सूखने पर खूबकला के बीजों को फिर से 1 लीटर बकरी के दूध में उबालकर फिर से छाया में सुखा ले जब अच्छे से सूख जाए फिर यह क्रिया दोहराए-

इस तरह तीन से चार बार करें बाद में खूबकला को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें तथा चूर्ण को शीशी में भर ले-

मात्रा व अनूपान-


प्रतिदिन 2 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण मां के अथवा गाय के दूध में घोलकर पिलाए आप चाहे तो इसमें थोड़ी भी मिला सकते हैं-

सूखा रोग के अनुभूत उपचार

यह प्रयोग हमें गिरनार से आए महंतजी ने लोक कल्याण हेतु बताया था महंत जी के मुताबिक़ यह योग सुखा रोग (Rickets) ग्रस्त बच्चो के लिए वरदान सामान हैं तथा इसके प्रयोग से बच्चे तन व मन से पुष्ट व ताकातवर होते हैं तथा बच्चो का विकास भी ठीक से होता हैं इसके बाद हमने यह कई बच्चों पर आजमाया है तथा महंत जी के दावे पर यह योग खरा उतरा है-

सूखा रोग के लिए अनुभूत देहाती प्रयोग-


जब 6 महीने से छोटे शिशुओं में सूखा रोग (Rickets) लागू पड़ता है तो इसका खामियाजा उनको पूरी उम्र भुगतना पड़ता है ऐसी स्थिति में आज हम आपको एक बेहद सरल व लाभदायक आदिवासी नुस्खा बता रहे हैं जो आज भी आदिवासी लोगों द्वारा विभिन्न तरीके से प्रयोग किया जाता है-

यह नुस्खा भी बेहद कारगर है छोटी उम्र में ही सूखा रोग का योग्य उपचार होने से बच्चों का विकास रुकता नहीं है तथा उनकी हड्डिया मजबूत बनती हैं, बच्चा खुशहाल व मुस्कुराता रहता हैं तथा उनकी प्राणशक्ति भी मजबूत बनती है इसीलिए छोटे बच्चों में अगर सूखा रोग (Rickets) के लक्षण देखने को मिले तो यह उपाय अवश्य करना चाहिए-

प्रयोग-


ताजा गिलोय के पंचांग का रस निकाल ले अब उस रस में बच्चे का फ्रॉक या झबला भिगो के 2 घंटे रखें उसके बाद उसे हल्के-हल्के निचोड़कर सुखा ले-

इस झबले को बच्चे को पहनाने से सूखा रोग में चमत्कारी लाभ होता है तथा बच्चों का सूखा रोग व अन्य समस्याएं दूर होकर बच्चे का शरीर भरने लगता है तथा बच्चा ह्रुष्ट पुष्ट होकर खेलने खिलखिलाने लगता है यह प्रयोग आदिवासी लोगों द्वारा आज भी किया जाता है-

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

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