12 जुलाई 2018

सूखा रोग होने के कारण तथा लक्षण

Causes and Symptoms of Rickets


आजकल के आधुनिक युग में भी भारत भर में होने वाले ज्यादातर बालमृत्यु का कारण सूखा रोग (Rickets) या कुपोषण जन्य बीमारियां ही है इसमें मुख्य कारण गरीबी या पोषण का अभाव नहीं लेकिन माताओं या प्रसूताओं में गर्भावस्था से बच्चे के जन्म या प्रसूति तथा प्रसूति के बाद की जाने वाली बच्चों की योग्य देखभाल के ज्ञान का अभाव व लापरवाही ही है-

सूखा रोग होने के कारण तथा लक्षण

ऐसी कई समस्याएं हैं जो योग्य देखभाल तथा कुछ आसान से नुस्खों से टाली जा सकती है आज हम आपको बच्चों में होने वाले सूखा रोग (Rickets) के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे तथा सूखा रोग के कारण, लक्षण तथा सूखा रोग के उपचार के बारे में इस लेख में जानेंगे-

सूखा रोग (Rickets) को सुखंडी, सूक्तान, सुखा रोग, बालशोथ, अंगशोष जैसे नामों से भी जाना जाता है हालांकि आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख नहीं मिलता है लेकिन मध्यकाल के बाद याने 200 से 300 साल पहले लिखे हुए ग्रंथों में इसका उल्लेख तथा उपचार का विवरण मिलता है इसी से हम यह समझ सकते हैं कि यह रोग अयोग्य खानपान तथा पोषण की कमी से होने वाले रोगों में से ही एक है-

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे पोषक तत्वों की कमी बताकर उसके उपचार में पोषण बढ़ाने वाले पाउडर या दवाइयां देते हैं लेकिन अगर हम गहराई से आयुर्वेद के सूत्रों या नियम का अभ्यास करें तो हमें इस रोग के होने के पीछे के मुख्य कारण समझ में आ सकते हैं जैसे कि-

सूखा रोग (Rickets) होने के कई कारण है लेकिन विद्वान वैध्य जन बताते हैं कि अगर कोई स्त्री कृष काया की है तथा वजन में कम है, शरीर में पोषण की या पौष्टिक तत्व की कमी है या किसी बड़े गंभीर रोग से ग्रस्त हैं तो ऐसे में अगर स्त्री गर्भ धारण करती है तो उसके शरीर की अवस्था इतनी सुदृढ़ नहीं होती है की गर्भ के बालक को उचित पोषण मिलता रहे ऐसे में गर्भाशय में पल रहा भ्रूण उचित पोषण के अभाव से कमजोर शरीरदृष्टि या कमजोर शारीरिक बल तथा क्षीण सहज बल लिए पैदा होता है यही नहीं ऐसे बच्चों की जीवन शक्ति कमजोर होती है तथा रोगप्रतिकारक शक्ति भी कमजोर होती है इसी वजह से बच्चे किसी भी तरह के रोग की चपेट में जल्दी आ जाते हैं-

दूसरे मुख्य कारणों में से जिन स्त्रियों को प्रदर या श्वेत प्रदर जैसी बीमारियां होती है और इनका योग्य उपचार करें बिना ही अगर स्त्री गर्भ धारण कर लेती है और गर्भावस्था के दरमियान भी प्रदर की समस्या बनी रहे तो गर्भ में पल रहे बच्चे को योग्य पोषण नहीं मिलता है और बच्चे कमजोर तथा कुपोषित ही पैदा होते हैं-

यह तो हुई जन्म के पहले की बात लेकिन बच्चे के  के जन्म के बाद भी बच्चों को आजकल आधुनिकता के चलते माताएं अपना दूध पिलाना पसंद नहीं करती है ऐसे में बच्चे को मां के शरीर में से कुदरती रूप से आने वाला पौष्टिक तत्वों से भरपूर व सत्व गुणों से भरपूर दूध नहीं मिल पाता है मजबूरन उनको डिब्बे का या गाय का दूध पीना पड़ता है  ऐसे दूध में मिलावट, बांसीपन तथा प्रिजरवेटिव डाले हुए होते हैं जो बच्चे को पूरा स्वाभाविक पोषण नही दे सकते और पोषण की कमी से ही सूखा रोग (Rickets) होने की शुरुआत होती है-

जो माताएं बहने बच्चों को अपना दूध पिलाती है लेकिन अगर वह पांडु रोग, प्रदर रक्त की कमी, खांसी और क्षय रोग जैसी समस्या या बीमारियों से ग्रस्त हो तब भी उनके दूध में बच्चे को पोषण देने वाले तत्वों का अभाव पाया जाता है जिससे बच्चों को सूखा रोग (Rickets) होता है-

सूखा रोग होने के कारण तथा लक्षण

बच्चे को योग्य देखभाल के अभाव से अगर निमोनिया या ब्रोंकाइटिस जैसी तकलीफें हो तथा कमजोरी या जीर्ण ज्वर लागू होता है तब ईसकी वजह से भी फेफड़ों में कमजोरी उत्पन्न होकर सूखा रोग (Rickets) लागू पड़ता है लंबे समय तक बच्चों को कफ रहने से फेफड़े कमजोर बनते हैं जिससे बच्चे की रोग प्रतिकारक शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है और उनको सुखा रोग लागू पड़ता है-

छोटे बच्चों को खाने पीने का या दूध पीने का अथवा आहार का ज्ञान नहीं होता है तब कई माताएं बहने अधिक लाड प्यार की वजह से बच्चों को कुछ ना कुछ खिलाती रहती है आजकल बच्चों को बाजारु चॉकलेट, नमकीन, बिस्किट, केंडी, ज्यूस, आइसक्रीम  जैसी बाजारु चीजे खिलाने का प्रचलन काफी बढ़ गया हैं लेकिन बाजारू पदार्थ में मिलाए हुए केमिकल्स या प्रिजर्वेटिव्स बच्चे की पेट की आंतरिक क्रियाओं में गड़बड़ी पैदा कर देते हैं जिससे उनकी धातु पुष्ट होने की बजाय क्षीण हो जाती है जिससे कब्ज, अतिसार, हरे रंग की टट्टी होना जैसे विकार उत्पन्न होते हैं व बच्चे का पेट फूल जाता है और हाथ पाव सूखकर पतले हो जाते हैं तथा बच्चा धीरे-धीरे सूखने लगता लगता हैं-

सूखा रोग के लक्षण-


1- यह रोग नवजात शिशुओं से लेकर 3 से 5 साल के बच्चों तक भी हो सकता है-

2- सुखा रोग (Rickets) में बच्चों को बार बार कभी अतिसार, कब्ज, कभी आमातिसार, पतले दस्त जैसी समस्याएं होती है-

3- शरीर में थोड़ा थोड़ा बुखार भी रहता है बच्चे की प्रतिकारक शक्ति कमजोर हो जाती है जिससे बच्चे को छोटी मोटी तकलीफ होती ही रहती हैं-

4- बच्चे कमजोर दिखते हैं उनका वजन सामान्य से कई ज्यादा कम दिखने लगता है-

5- बच्चे चिडचिडे हो जाते हैं और हमेशा बेचैन रहते हैं व बार-बार रोते रहते हैं जिसकी वजह से उनका चेहरा व आँखे निस्तेज लगती है-

6- जिन बच्चों को सूखा रोग होता है उनके कानों को दबाने से उन्हें जरा भी दर्द नहीं होता (कान दबाने से बच्चा रोता नहीं) अगर यह लक्षण बालक में दिखाई दे तो इसे निश्चित ही सूखा रोग समझा जाता है ऐसे बच्चों का शरीर दिन-ब-दिन क्षीण होते जाता है तथा खाया पीया कुछ भी अंग नही लगता हैं-

सूखा रोग का उपचार-


जैसे की इस लेख में हमने जाना की सुखा रोग पोषण की कमी तथा रोग प्रतिरोधक शक्ति या बालक सहज बल के अभाव से उत्पन्न होने वाला रोग है इसीलिए इसमें बच्चों को योग्य पौष्टिक आहार दिया जाए तथा योग्य देखभाल की जाए और बच्चों का सहजबल प्राकृतिक तरीके से बढ़ाया जाए तो इस रोग से मुक्ति पाना संभव है-

अगली पोस्ट-  सूखा रोग के अनुभूत उपचार

प्रस्तुती- Chetna Kanchan Bhagat-Mumbai

Upcharऔर प्रयोग की सभी पोस्ट का संकलन
loading...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Tags Post

Information on Mail

Loading...