अलसी कैंसर को रोकने में भी सहायक है

जर्मन डाॅक्टर योहाना बुडविज (नोबल पुरस्कार के लिए नामांकित) ने 1952 में ठंडी विधि से निकले अलसी के तेल व पनीर के मिश्रण तथा कैंसर रोधी फलों व सब्जियों के साथ कैंसर रोगियों के भोजन द्वारा उपचार उपचार का तरीका विकसित किया जो, बुडविज प्रोटोकोल के नाम से विख्यात हुआ।



इस उपचार से कैंसर रोगियों को बहुत लाभ मिलने लगाा था। इस सरल, सुगम उपचार से कैंसर के रोगी ठीक हो रहे थे। इस उपचार से 90 प्रतिशत रोगियों का कैंसर ठीक होता रहा है।


डाॅ. बुडविज- आहार में प्रयुक्त खाद्य पदार्थ ताजा , इलेक्ट्रोन्स युक्त और जैविक होने चाहिए। इस आहार में अधिकांश खाद्य पदार्थ सलाद और रसों के रूप में लिये जाते हैं, जिन्हें ताजा तैयार किया जाना चाहिए ताकि रोगी को भरपूर इलेक्ट्रोन्स मिले। डाॅ. बुडविज ने अन्य इलेक्ट्रोन्स युक्त खाद्यान्न भी ज्यादा से ज्यादा लेने की सलाह दी है। इस उपचार में  छोटी-छोटी बातें भी महत्वपूर्ण है। और जरा सी असावधानी इस आहार के औषधीय प्रभाव को प्रभावित करती है।


प्रातः एक ग्लास साॅवरक्राॅट (खमीर की हुई पत्ता गोभी) का रस या एक गिलास छाछ लें। साॅवरक्राॅट में कैंसररोधी तत्व और भरपूर विटामिन-सी होता है और यह पाचन शक्ति भी बढ़ाता है। लेकिन यह हमारे देश मे उपलब्ध नहीं है परन्तु इसे घर पर पत्ता गोभी को खमीर करके बनाया जा सकता है।



नास्ते  से आधा घंटा पहले बिना चीनी की गर्म हर्बल या हरी चाय लें। मीठा करने के लिए एक चम्मच शक्कर स्टेविया (जो डाॅ. स्वीट के नाम से बाजार में उपलब्ध है) का प्रयोग कर सकते हैं। यह पिसी अलसी के फूलने हेतु गर्म तरल माध्यम का कार्य करती है।


अब आपको ‘‘ऊँ खंड’’, जो अलसी के तेल और घर पर बने वसा रहित पनीर या दही से बने पनीर को मिला कर बनाया जायेगा, लेना है। दही को एक घंटे तक कपड़े की गाठ बांद कर लटका देगें ताकि अधिकांश पानी निकल जाएं। पनीर बनाने के लिए गाय या बकरी का दूध सर्वोत्तम रहता है। इसे एकदम ताजा बनायें, तुरंत खूब चबा चबा कर आनंद लेते हुए सेवन करें।


3 बड़ी चम्मच यानी 45 एम. एल. अलसी का तेल और 6 बड़ी चम्मच यानी 90 एम. एल. पनीर को बिजली से चलने वाले हेन्ड ब्लेंडर से एक मिनट तक अच्छी तरह मिक्स करें। तेल और पनीर का मिश्रण क्रीम की तरह हो जाना चाहिये और तेल दिखाई देना नहीं चाहिये। तेल और पनीर को ब्लेंड करते समय यदि मिश्रण गाढ़ा लगे तो 2 चम्मच अगूंर का रस या दूध मिला लें। अब 2 बड़ी चम्मच अलसी ताजा पीस कर मिलायें। अलसी को पीसने के बाद पन्द्रह मिनट के अन्दर काम मंे ले लेना चाहिए। मिश्रण में स्ट्राबेरी, रसबेरी, चेरी, जामुन आदि फल मिलायें। बेरोें में एलेजिक एसिड होते हैं जो कैंसररोधी हैं। आप चाहें तो आधा कप कटे हुए अन्य फल भी मिला लें। इसे कटे हुए मेवे खुबानी, बादाम, अखरोट, किशमिश, मुनक्के आदि सूखे मेवों का प्रयोग करें। मेवों में सल्फर युक्त प्रोटीन,वसा और विटामिन होते हैं। फल, मेवे और मसाले बदल कर प्रयोग करें। ओम खण्ड को बनाने के दस मिनट क भीतर ले लेना चाहिए । स्वाद के लिए वनिला, दाल चीनी, ताजा काकाओ, कसा नारियल या नींबू का रस मिला सकते हैं। इसमें मूंगफली मिलाना वर्जित है।


दिन भर में कुल शहद 3-5 चम्मच से ज्यादा न लें। याद रहे शहद प्राकृतिक व मिलावट रहित हो। डिब्बा बंद या परिष्कृत कतई न हो। दिन भर में 6 या 8 खुबानी के बीज अवश्य ही खायें। इनमें विटामिन बी-17 होता हैं जो कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है।


यदि और खाने की इच्छा हो तो टमाटर, मूली, ककड़ी आदि के सलाद के साथ कूटू, ज्वार, बाजरा आदि साबुत अनाजों के आटे की बनी एक रोटी ले लें। कूटू को बुडविज ने सबसे अच्छा अन्न माना है। गैहू में ग्लेटून होता है और पचने में भारी होता है अतः इसका प्रयोग तो कम ही करें। नाश्ते के एक घंटे बाद घर पर ताजा गाजर, मूली, लौकी, पालक, करेला, टमाटर, चुकंदर गेहूं के जवारों आदि का ताजा रस लें। गाजर और चुकंदर यकृत को ताकत देते हैं और कैंसर रोधी होेते हैं।


दोपहर का खानाः-
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दोपहर के खाने के आधा घंटा पहले एक गर्म हर्बल चाय लें। कच्ची सब्जियां जैसे चुकंदर, शलगम, मूली, गाजर, गोभी, हरी गोभी,, शतावर आदि के सलाद को घर पर बनी सलाद ड्रेसिंग या आॅलियोलक्स के साथ लें। डेसिंग को 1-2 चम्मच अलसी के तेल व 1-2 चम्मच पनीर के मिश्रण में एक चम्मच सेब का सिरका या नीबू के रस और मसाले डाल कर बनाएं।


सलाद को मीठा करना हो तो अलसी के तेल में अंगूर, संतरे या सेब का रस या शहद मिला कर लें। यदि फिर भी भूख है तो आप उबली या भाप में पकी सब्जियों के साथ एक दो मिश्रित आटे की रोटी ले सकते हैं। सब्जियों व रोटी पर आॅलियोलक्स (इसे नारियल, अलसी के तेल, प्याज, लहसुन से बनाया जाता है) भी डाल सकते है। मसाले, सब्जियों व फल बदल-बदल कर लेवें। रोज एक चम्मच कलौंजी का तेल भी लें। भोजन तनाव रहित होकर खूब चबा-चबा कर खाएं।


‘‘ऊँ खंड’’ की दूसरी खुराकः-
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अब नाश्ते की तरह ही 3 बड़ी चम्मच अलसी के तेल व 6 बड़ी चम्मच पनीर के मिश्रण में ताजा फल, मेवे और मसाले मिलाकर लें। यह अत्यंत आवश्यक हैं। हां पिसी अलसी इस बार न डालें।

दोपहर बादः-
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अन्नानास, चेरी या अंगूर के रस में एक या दो चम्मच अलसी पीस कर मिलाएं और खूब चबा कर, लार में मिला कर धीरे धीरे चुस्कियां ले लेकर पियें। चाहें तो आधा घंटे बाद एक गिलास रस और ले लें।

तीसरे प्रहरः-
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पपीता या ब्लू बेरी (नीला जामुन) रस में एक या दो चम्मच अलसी को ताजा पीस कर डालें खूब चबा-चबा कर, लार में मिला कर धीरे-धीरे चुस्कियां ले लेकर पियें। पपीते में भरपूर एंजाइम होते हैं और इससे पाचन शक्ति भी ठीक होती है।


सांयकालीन भोजः-
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शाम को बिना तेल डाले सब्जियों का शोरबा या अन्य विधि से सब्जियां बनायें। मसाले भी डालें। पकने के बाद ईस्ट फ्लेक्स और आॅलियोलक्स डालें। ईस्ट फ्लेक्स में विटामिन-बी होते हैं जो शरीर को ताकत देते हैं। टमाटर, गाजर, चुकंदर, प्याज, शतावर, शिमला, मिर्च, पालक, पत्ता गोभी, गोभी, हरी गोभी (ब्राकोली) आदि सब्जियों का सेवन करें। शोरबे को आप उबले कूटू, भूरे चावल, रतालू, आलू, मसूर, राजमा, मटर साबुत दालें या मिश्रित आटे की रोटी के साथ ले सकते हैं।


यदि रोगी को स्थिति बहुत गंभीर हो या ठीक से भोजन नहीं ले पा रहा है तो उसे अलसी के तेल का एनीमा भी देना चाहिए। डाॅ. बुडविज ऐेसे रोगियों के लिए ‘‘ अस्थाई आहार’’ लेने की सलाह देती थी। यह अस्थाई यकृत और अग्नाशय कैंसर के रोगियों को भी दिया जाता है क्योंकि वे भी शुरू में सम्पूर्ण बुडविज आहार नहीं पचा पाते हैं। अस्थाई आहार में रोगी को सामान्य भोजन के अलावा कुछ दिनों तक पिसी हुर्द अलसी और पपीते, अंगूर व अन्य फलों का रस दिया जाता है। कुछ दिनों बाद जब रोगी की पाचन शक्ति ठीक हो जाती है उसे धीरे-धीरे सम्पूर्ण बुडविज आहार शुरू कर दिया जाता है।
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