अतिबला के क्या फायदे हैं

अतिबला यानी इसे खिरैटी(Kirati) भी कहा जाता है ये पौष्टिक गुणों से भरपूर है ये आयुर्वेद में बाजीकरण के रूप में भी प्रयुक्त की जाती है धातु सम्बंधित रोग में इसका प्रयोग कारगर है ये यौन दौर्बल्य-धातु क्षीणता- नपुंसकता तथा शारीरिक दुर्बलता(Physical infirmity) दूर करने के अलावा अन्य व्याधियों को भी दूर करने की अच्छी औषीधी है-


Atibala


इसकी और भी कई जातियां हैं पर बला- अतिबला- नागबला- महाबला- ये चार जातियां ही ज्यादा प्रचलित हैं बला चार प्रकार की होती है चारों प्रकार की बला शीतवीर्य-मधुर रसयुक्त-बलकारक-कान्ति-वर्द्धक-वात रक्त पित्त-रक्त विकार और व्रण को दूर करने वाली होती है इसके जड़ और बीज को उपयोग में लिया जाता है-

उपयोग(Use)-

1- शुक्रमेह के लिए खरैटी की ताजी जड़ का एक छोटा टुकड़ा लगभग 5-6 ग्राम एक कप पानी के साथ कूट-पीस और घोंट-छानकर सुबह खाली पेट पीने से कुछ दिनों में शुक्र धातु गाढ़ी हो जाती है और शुक्रमेह होना बंद हो जाता है-

2- महिला को श्वेत प्रदर(Leukorrhea) रोग हो तो बला के बीजों का बारीक पिसा और छना चूर्ण एक एक  चम्मच सुबह-शाम शहद में मिलाकर कर दे और फिर ऊपर से मीठा दूध हल्का गर्म पी लें-

3- शरीरिक कमजोरी के लिए आधा चम्मच की मात्रा में इसकी जड़ का महीन पिसा हुआ चूर्ण सुबह-शाम मीठे हल्के गर्म दूध के साथ लेने और भोजन में दूध-चावल की खीर शामिल कर खाने से शरीर का दुबलापन दूर होता है शरीर सुडौल बनता है सातों धातुएं पुष्ट व बलवान होती हैं तथा बल वीर्य तथा ओज बढ़ता है-

4- खरैटी के बीज और छाल समान मात्रा में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण कर लें तथा  एक चम्मच चूर्ण घी-शकर के साथ सुबह-शाम लेने से वस्ति और मूत्रनलिका की उग्रता दूर होती है और मूत्रातिसार होना बंद हो जाता है-

5- बवासीर के रोगी को मल के साथ रक्त भी गिरे तो इसे रक्तार्श यानी खूनी बवासीर कहते हैं बवासीर रोग का मुख्य कारण खानपान की बदपरहेजी के कारण कब्ज बना रहना होता है बला के पंचांग को मोटा-मोटा कूटकर डिब्बे में भरकर रख लें और प्रतिदिन सुबह एक गिलास पानी में दो चम्मच यानी कि लगभग 10 ग्राम यह जौकुट चूर्ण डालकर उबालें और जब चौथाई भाग पानी बचे तब उतारकर छान लें फिर ठण्डा करके एक कप दूध मिलाकर पी पाएं- इस उपाय से बवासीर का खून गिरना बंद हो जाता है-

6- अतिबला की जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना बंद हो जाता है-

7- अतिबला के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन तीन से चार बार कुल्ला करें ये प्रयोग  रोजाना करने से मसूढ़ों की सूजन व मसूढ़ों का ढीलापन खत्म होता है-

8- जिनको मासिक धर्म रुक जाता है या अनियमित आता है उनको खिरैटी+ चीनी+मुलहठी+ बड़ के अंकुर+ नागकेसर+ पीले फूल की कटेरी की जड़ की छाल लेकर इनको दूध में पीसकर घी और शहद में मिलाकर कम से कम 15 दिनों तक लगातार पिलाना चाहिए- इससे मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है-

9- अतिबला+कंटकारी+बृहती+वासा (अड़ूसा) के पत्ते और अंगूर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लेते हैं फिर इसे 15 से 30 मिलीमीटर की मात्रा में 5 ग्राम शर्करा के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी ठीक हो जाती है-

10- अतिबला(खिरैटी) के साथ नागकेसर को पीसकर ऋतुस्नान  के बाद दूध के साथ सेवन करने से लम्बी आयु वाला (दीर्घजीवी) पुत्र उत्पन्न होता है-


गोक्षुरादि चूर्ण चूर्ण बनाए-

नागबला+अतिबला+कौंच के शुद्ध छिलकारहित बीज+ शतावर+तालमखाना और गोखरू इन सब द्रव्य को बराबर वजन में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण करके मिला लें और छन्नी से तीन बार छान लें ताकि सब द्रव्य अच्छी तरह मिलकर एक जान हो जाएं-

प्रयोग -

यह चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-शाम या रात को सोते समय मिश्री मिले कुनकुने गर्म दूध के साथ पीने से बहुत बलवीर्य और यौनशक्ति की वृद्धि होती है शीघ्रपतन के रोगी पुरुषों के लिए यह योग आयुर्वेद के वरदान के समान है यह योग बना-बनाया बाजार में आयुर्वेदिक दवा विक्रेता के यहां इसी नाम से मिलता हैं-

Upcharऔर प्रयोग-

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