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4 मार्च 2016

इमली के कुछ अदभुत प्रयोग

इमली का नाम आते ही मुंह में पानी आना स्वाभाविक है इमली से सभी लोग परिचित है जहाँ तक जो लोग चाट या पानी-पूरी के शौकीन है उनको पता है इसमें इमली(Tamarind)का इस्तेमाल किया जाता है आज आपको इमली के ओषीधि गुणों से परिचित कराते है जो शायद कम लोग ही जानते है-


इमली के कुछ अदभुत प्रयोग

लू-लगना-


गर्मी शुरू होगई है और आने वाले समय में आपको दो-चार होना पड़ेगा तो आपको लू भी लग सकती है तो आप पहले ये उपाय जान ले-पकी हुई इमली के गूदे को हाथ और पैरों के तलओं पर मलने से लू का प्रभाव समाप्त हो जाता है-यदि इस गूदे का गाढ़ा धोल बालों से रहित सर पर लगा दें तो लू के प्रभाव से उत्पन्न बेहोसी दूर हो जाती है इमली के गूदे का पानी पीने से वमन, पीलिया, प्लेग, गर्मी के ज्वर में भी लाभ होता है-

बहुमूत्र(Urinary disorders)या महिलाओं का सोमरोग-


इमली का गूदा 5 ग्राम रात को थोड़े जल में भिगो दे तथा  दूसरे दिन प्रातः उसके छिलके निकालकर दूध के साथ पीसकर और छानकर रोगी को पिला दे-इससे स्त्री और पुरुष दोनों को लाभ होता है-मूत्र- धारण की शक्ति क्षीण हो गयी हो या मूत्र अधिक बनता हो या मूत्रविकार(Urinary disorders)के कारण शरीर क्षीण होकर हड्डियाँ निकल आयी हो तो इसके प्रयोग से लाभ होगा-

खांसी(Cough)-


टी.बी. या क्षय की खांसी हो (जब कफ़ थोड़ा रक्त आता हो) तब इमली के बीजों को तवे पर सेंके इसके बाद ऊपर से छिलके निकाल कर कपड़े से छानकर चूर्ण रख ले-इसे 3 ग्राम तक घृत या मधु के साथ दिन में तीन-चार बार चाटने से शीघ्र ही खांसी का वेग कम होने लगता है और कफ़ सरलता से निकालने लगता है और रक्तस्राव  एवं पीला कफ़ गिरना भी समाप्त हो जाता है-

अण्डकोशों(Andkosh)में जल भरना -


लगभग 30 ग्राम इमली की ताजा पत्तियाँ को ताजे गौमूत्र में औटाये फिर एकबार मूत्र जल जाने पर पुनः गौमूत्र डालकर पकायें- इसके बाद गरम -गरम पत्तियों को निकालकर किसी अन्डी या बड़े पत्ते पर रखकर सुहाता-सुहाता अंडकोष पर बाँध कपड़े की पट्टी और ऊपर से लगोंट कस दे-सारा पानी निकल जायेगा और अंडकोष पूर्ववत मुलायम हो जायेगें-

गले की सूजन(Throat Swelling)-


इमली 10 ग्राम को एक किलो जल में अध्औटा कर(आधा जलाकर)छाने और उसमें थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर रोगी को गरारे या कुल्ला करायें तो गले की सूजन में आराम मिलता है -

ह्रदय में जलन(Heart Burning)-


ह्रदय की दाहकता या जलन को शान्त करने के लिये पकी हुई इमली के रस(गूदे मिले जल)में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहियें-

नेत्रों में गुहेरी(Hordeolum)होना-


इमली के बीजों की गिरी पत्थर पर घिसें और इसे गुहेरी(Hordeolum)पर लगाने से तत्काल ठण्डक पहुँचती है -

चर्मरोग(Skin diseases)-


लगभग 30 ग्राम इमली(गूदे सहित)को एक गिलास पानी में मथकर पीयें तो इससे घाव, फोड़े-फुंसी आदि में लाभ होगा -

उल्टी(Vomiting)होने पर-


पकी इमली को पाने में भिगोयें और इस इमली के रस को पिलाने से उल्टी आनी बंद हो जाती है -

खूनी बवासीर(Emerods)-


इमली के पत्तों का रस निकालकर रोगी को सेवन कराने से रक्तार्श में लाभ होता है -

शराब एवं भांग का नशा(Intoxication)उतारने में-


नशा समाप्त करने के लिए पकी इमली का गूदा जल में भिगोकर, मथकर और छानकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पिलाना चाहिए-लगभग 50 ग्राम इमली+लगभग 500 ग्राम पानी में दो घन्टे के लिए भिगोकर रख दें उसके बाद उसको मथकर मसल लें- इसे छानकर पी जाने से लू लगना, जी मिचलाना, बेचैनी, दस्त, शरीर में जलन आदि में लाभ होता है तथा शराब व् भांग का नशा उतर जाता है- मुंह का जायेका ठीक होता है -

चोट-मोच लगना-


इमली की ताजा पत्तियाँ उबालकर,मोच या टूटे अंग को उसी उबले पानी में सेंके या धीरे -धीरे उस स्थान को उँगलियों से हिलाएं ताकि एक जगह जमा हुआ रक्त फ़ैल जाए -

पीलिया या पांडु रोग -


इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भस्म 10 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से पान्डु रोग ठीक हो जाता है -

आग से जल जाने पर-


इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भस्म गाय के घी में मिलाकर लगाने से जलने से पड़े छाले व घाव ठीक हो जाते है -

पित्तज ज्वर-


इमली 20 ग्राम 100 ग्राम पानी में रात भर के लिए भिगो दे फिर उसके निथरे हुए जल को छानकर उसमे थोड़ा बूरा मिला दे - 4-5 ग्राम इसबगोल की फंकी लेकर ऊपर से इस जल को पीने से लाभ होता है -

सर्प-बिच्छू आदि का विष-


इमली के बीजों को पत्थर पर थोड़े जल के साथ घिसकर रख ले और दंशित स्थान पर चाकू आदि से छत करके एक या दो बीज चिपका दे-वे चिपककर विष चूसने लगेंगे और जब गिर पड़े तो दूसरा बीज चिपका दें -विष रहने तक बीज बदलते रहे -

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Upchar और प्रयोग -

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