कान की श्रवण तंत्रिका का पक्षाघात होना

Auditory Nerve Paralysis


एक रात 2 बजे मुझे अपने जीजाजी को देखने के लिये बुलाया गया उन्है बहुत तेज बुखार और उल्टियाँ हो रही थी मेरे एक शिष्य चिकित्सक का क्लीनिक उसी-मोहल्ले में था वह गायत्री परिवार के शिविर में हरिद्वार गया हुआ था तथा क्लीनिक की चाबी मुझे दे गया था कि कोई इमर्जेंन्सी का केस हो तो मैं अटेण्ड कर लूँ  तो दुकान खोल कर मैँने दवाइयां निकाल कर उन्हें दी और थोडी ही देर में उनकी उल्टियाँ बन्द हो गई, बुखार कम हो गया और वे गहरी नीद में सो गये मैं भी अपने घर चला गया अगले दिन उन्होंने किसी ऐलापैधिक डॉक्टर को दिखा कर उनका इलाज ले लिया-

कान की श्रवण तंत्रिका का पक्षाघात होना

15-20 दिन बाद किसी ने मुझे बताया कि जीजाजी को तो कानों से बिलकुल सुनाई नहीं देता तब तो मेरा भी माथा ठनका और मुझे ध्यान मेँ आया कि कहीं तेज वाइरल बुखार के कारण उनकी कानों की आडीटरी नर्व का पैरालिसिस तो नहीं हो गया है फिर तुरन्त उनके घर गया ओर उनके पुत्र को बताया कि इनको कानो के डॉक्टर को दिखा कर होम्योपैथिक इलाज करवाओ क्यों कि ऐलोपैथी में इसका कोई इलाज नही है लेकिन उन्होंने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया औंर इस तरह लगभग डेढ साल का समय निकल गया-

एक दिन मैं उनके घर बैठा था वही उनके एक प्रोफेसर मित्र भी बैठे थे जो बॉटनी मै एम.एससी.पी.एच.डी. थे-वे बोले पापाजी के कानो में मुलियन आयल डालो तो मैं भरा हुआ तो बैठा ही था-मैंने उनसे कहा कि आप पेड-पोघों के डॉक्टर हैं और पेड-पौधों के कान तो होते नहीं है तो आप कान की बीमारी में क्या जान सकते  हैं?

हमारे भानजे साहब भी वहां बैठे थे जो खुद भी बाँटनी में प्रोफेसर है मुझे नाराज देख कर सोच में पड़ गए दूसरे ही दिन उन्होंने जीजा जी को कानों के डॉक्टर के पास जाकर कानों की जाँच कराई तो श्रवण शक्ति में 100 प्रतिशत की क्षति पाई गई तब उन्होंने बार-बार मुझसे इलाज करने के लिए कहना शुरू किया तो मै सोच में पड़ गया कि लकवा लगे डेढ़ साल हो चुका है जबकि इसका इलाज उसी समय तुरंत चालू हो जाना चाहिए था और इसमें सबसे बड़ी आशंका यह थी कि यदि Auditory Nerve (श्रवण तंत्रिका) खत्म हो चुकी होगी तो फिर किसी भी प्रकार की चिकित्सा व्यर्थ ही सिद्ध होगी फिर मैने सोचा कि कोशिश की जाय जो होना होगा सो होगा- "कास्टीकम1000" से शुरुवात की न्युफरल्यूटियम, जेल्सीमियम, काली फाँस, केल्केरिया फ्लोर, इन्फुल्युजीनम आदि औषिधियां लक्षणों के अनुसार दी गई और लगभग आठ माह तक इसी प्रकार इलाज चलता रहा-

इसी समय दिल्ली में हमारे भतीजे का विवाह था तो विवाह के कार्य से निपट कर जीजा जी को आल इन्डिया इंस्टीट्यूट आफ़ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में दिखाया तो जाँच में पाया गया कि अब उनकी सुनने की शक्ति में केवल 50 प्रतिशत  की हानि है मुझे ये जानकार प्रसन्नता हुई तो एम्स के डॉक्टर से मैने बात की-यह तो सामन्यत; सभी का अनुभव है कि एम्स के डॉक्टर बहुत ऊँची योग्यता तथा ज्ञान रखते है तथापि वे अपने को खुदा से कम नहीं समझते-पहिले तो वे मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं हुए तब मैने बताया कि मै भी एक डॉक्टर हूँ और मैने इनका इलाज किया है-मैने उनसे कहा कि आठ माह पाहिले इनकी श्रवण शक्ति में 100 प्रतिशत क्षति थी जिसकी रिपोर्ट आपके सामने है-अब आपकी जाँच के अनुसार ये केवल 50 प्रतिशत है-आपके कहने के अनुसार विश्व में वाइरल इन्फेक्शन से पेरालाइज्ड हुई आडिटरी नर्व  के ठीक होने का अब तक कोई रिकार्ड नहीं है क्युकि आपके यहाँ इसका कोई इलाज है ही नहीं-हम आपके पास इसका इलाज कराने आये भी नहीं है-हम तो आप से केवल इतना जानना चाहते है कि इस अवस्था में आप हमारी क्या मदद कर सकते है-

तब एम्स के डॉक्टर ने बताया कि 50 प्रतिशत क्षति की दशा में यदि कोई अच्छी किस्म का श्रवण यन्त्र मिल सके तो ये सुन सकते है-उन्होंने हमें एक कानों की मशीन के इंजीनियर का पता भी दे दिया उन्होंने कहा कि आप लोग इनसे लिख कर बात न करे नहीं तो ये बोलना भी भूल जायेगे-

फिर उन्होंने मुझ से कहा कि यदि हम आपके पास ऐसे केस भेजे तो क्या आप उनका इलाज करेगे तब मैने उनसे कहा कि मै लोक निर्माण विभाग में सिविल इंजिनियर हूँ सुबह घर से निकलता हूँ दिन भर कामों का निरिक्षण और निर्माण कार्य देखने के बाद रात को ही घर आ पाता हूँ ऐसे में मरीज आप कहाँ भेजेगे-वैसे दो वर्ष बाद रिटायर हो रहा हूँ तब भेजिए अवश्य इलाज करूँगा-मुझे इंजीनियर जानकर तो उनको बहुत आश्चर्य हुआ -

हम कान की मशीन वाले इंजीनियर के पास पंहुचा तो उन्होंने भी यह कह कर बात करने से इनकार कर दिया कि क्या मै कोई डॉक्टर हूँ ? मैने जब उनसे यह कहा आप इंजीनियर है और मै भी एक इंजीनियर ही हूँ-मेरा आपसे केवल यह निवेदन है कि आप मुझे केवल पाँच मिनट का समय दे और हमारी बात सुन ले-जब हमने केस के बारे में बताया तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ फिर उन्होंने स्वयं अपनी मशीन से आडियोग्राफ बनाया तो क्षति 50 प्रतिशत ही ही निकली जबकि 100 प्रतिशत की क्षति की पुरानी रिपोर्ट उनके सामने रक्खी हुई थी-

मैने उनसे कहा कि यदि आपके पास कोई अच्छी किस्म की मशीन हो तो लगा कर देख लीजिये-शायद काम कर जाए-

उन्होंने चेकोस्लोवाकिया की बनी हुई एक मशीन निकाली और जीजा जी के कानों में लगाईं-लगभग पांच फुट की दूरी से उन्होंने सामान्य आवाज में जीजा जी से पूँछा कि क्या आप खाना खायेगे ? जीजा जी ने तुरंत उत्तर दिया कि यह कोई खाने का समय है, खाने का समय होगा तब खाना खायेगे-उन्होंने पूछा आप क्या काम करते है ? उत्तर मिला मै एक रिटायर्ड फौजी हूँ, मै अब कोई काम नहीं करता हूँ-उस समय सामान्य कान की मशीन 800 रूपये में आ जाती थी परन्तु यह महँगी थी जो 2100 रुपयों की थी किन्तु यह कोई बड़ी समस्या नहीं थी-

इसे आप दुर्भाग्य ही समझिये कि कुछ समय बाद उन्होंने वह मशीन लगाना छोड़ दिया-कभी कही गिरे थे इसलिए पीठ के दर्द के कारण मेरा इलाज भी बंद कर दिया-मुझे निराशा तो बहुत हुई किन्तु परिश्रम कभी बेकार नहीं जाता है इस केस से प्राप्त ज्ञान और अनुभव से मैने अनेक रोगियों को लाभ पंहुचाया-

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प्रस्तुत सभी लेख और प्रयोग मेरे जीवन काल के सत्य अनुभव से जुड़े है उनका उल्लेख किया है कथा या कहानी पे आधारित नहीं है-

मेरा सम्पर्क पता-

कृपया रोगी ही फोन करे ताकि उसके लक्षण (Symptoms) को जाना जा सके केवल सिर्फ जानकारी मात्र के लिए डिस्टर्व न करे-आप यहाँ फोन कर सकते है-


KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23-Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :-  09977423220 (फोन करने का समय-दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob :- 09826392827 (फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

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