शंख कितने प्रकार के होते है

शंख(Shankh)कई प्रकार के होते हैं और सभी प्रकारों की विशेषता एवं पूजन-पद्धति भिन्न-भिन्न है उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका एवं भारत में पाये जाते हैं शंख की आकृति(उदर)के आधार पर ही इसके प्रकार माने जाते हैं-


शंख कितने प्रकार के होते है

शंख तीन प्रकार के होते हैं-


दक्षिणावृत्ति शंख
मध्यावृत्ति शंख
वामावृत्ति शंख

जो शंख(Shankh)दाहिने हाथ से पकड़ा जाता है वह दक्षिणावर्ती शंख कहलाता है और जिस शंख का मुँह बीच में खुलता है वह मध्यावर्ती शंख होता है तथा जो शंख बायें हाथ से पकड़ा जाता है वह वामावर्ती शंख कहलाता है-

शंख का उदर दक्षिण दिशा की ओर हो तो दक्षिणावर्ती और जिसका उदर बायीं ओर खुलता हो तो वह वामावर्ती शंख है मध्यावर्ती एवं दक्षिणावर्ती शंख(Shankh)सहज रूप से उपलब्ध नहीं होते हैं-इनकी दुर्लभता एवं चमत्कारिक गुणों के कारण ये अधिक मूल्यवान होते हैं- 

इनके अलावा लक्ष्मी शंख,गोमुखी शंख,कामधेनु शंख,विष्णु शंख,देव शंख,चक्र शंख,पौंड्र शंख,सुघोष शंख,गरुड़ शंख,मणिपुष्पक शंख,राक्षस शंख,शनि शंख,राहु शंख,केतु शंख,शेषनाग शंख,कच्छप शंख(Shankh)आदि प्रकार के भी होते हैं वैसे हिन्दुओं के 33 करोड़ देवता हैं और सबके अपने-अपने शंख हैं देवासुर संग्राम में अनेक तरह के शंख निकले है इनमे कई सिर्फ़ पूजन के लिए होते है-

समुद्र मंथन के समय देव-दानव संघर्ष के दौरान समुद्र से 14 अनमोल रत्नों की प्राप्ति हुई थी जिनमें आठवें रत्न के रूप में शंखों(Shankh)का जन्म हुआ-

गणेश शंख(Ganesh shankh)-

शंख कितने प्रकार के होते है



सर्वप्रथम पूजित देव गणेश के आकर के गणेश शंख का प्रादुर्भाव हुआ जिसे गणेश शंख(Ganesh shankh)कहा जाता है आप इसे प्रकृति का चमत्कार कहें या गणेश जी की कृपा की इसकी आकृति और शक्ति हू-ब-हू गणेश जी जैसी है गणेश शंख प्रकृति का मनुष्य के लिए अनूठा उपहार है तथा निश्चित रूप से वो व्यक्ति परम सौभाग्यशाली होते हैं जिनके पास या घर में गणेश शंख का पूजन दर्शन होता है भगवान गणेश सर्वप्रथम पूजित देवता हैं इनके अनेक स्वरूपों में यथा-विघ्न नाशक गणेश,दरिद्रतानाशक गणेश,कर्ज़ मुक्तिदाता गणेश, लक्ष्मी विनायक गणेश,बाधा विनाशक गणेश,शत्रुहर्ता गणेश,वास्तु विनायक गणेश,मंगल कार्य गणेश आदि-आदि अनेकों नाम और स्वरुप गणेश जी के जन सामान्य में व्याप्त हैं गणेश जी की कृपा से सभी प्रकार की विघ्न- बाधा और दरिद्रता दूर होती है-

दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग केवल और केवल लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किया जाता है वही श्री गणेश शंख का पूजन जीवन के सभी क्षेत्रों की उन्नति और विघ्न बाधा की शांति हेतु किया जाता है इसकी पूजा से सकल मनोरथ सिद्ध होते है गणेश शंख(Ganesh shankh)आसानी से नहीं मिलने के कारण दुर्लभ होता है तथा सौभाग्य उदय होने पर ही इसकी प्राप्ति होती है-

आर्थिक, व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ उपाय श्री गणेश शंख है अपमान जनक कर्ज़ बाधा इसकी स्थापना से दूर हो जाती है इस शंख की आकृति भगवान गणपति के सामान है तथा शंख में निहित सूंड का रंग अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त है प्रकृति के रहस्य की अनोखी झलक गणेश शंख के दर्शन से मिलती है-

विधिवत सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित गणेश शंख की स्थापना चमत्कारिक अनुभूति होती ही है किसी भी बुधवार को प्रातः स्नान आदि से निवृत्ति होकर विधिवत प्राण प्रतिष्ठित श्री गणेश शंख को अपने घर या व्यापार स्थल के पूजा घर में रख कर धूप- दीप पुष्प से संक्षिप्त पूजन करके रखें ये अपने आप में चैतन्य शंख है इसकी स्थापना मात्र से ही गणेश कृपा की अनुभूति होने लगती है इसके सम्मुख नित्य धूप-दीप जलना ही पर्याप्त है किसी जटिल विधि-विधान से पूजा करने की जरुरत नहीं है बस एक बार किसी योग्य विद्धवान से आप इसकी स्थापना करा ले -

महालक्ष्मी शंख(Mahalakshmi shankh)-


शंख कितने प्रकार के होते है

इसका आकार श्री यंत्र क़ी भांति होता है तथा इसे प्राक्रतिक श्री यंत्र भी माना जाता है जिस घर में इसकी पूजा विधि विधान से होती है वहाँ स्वयं लक्ष्मी जी का वाश होता है इसकी आवाज़ सुरीली होती है विद्या क़ी देवी सरस्वती भी यही शंख धारण करती है वे स्वयं वीणावादनी इसी शंख कि पूजा करती है माना जाता है कि इसकी पूजा वा इसके जल को पीने से मंद बुद्धि व्‍यक्ति भी ज्ञानी हो जाता है-

दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti shankh)-

शंख कितने प्रकार के होते है

स्वयं भगवान विष्णु अपने दाहिने हाथ में दक्षिणावर्ती शंख(Dkshinavarti shankh)धारण करते है पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय यह शंख निकला था जिसे स्वयं भगवान विष्णु जी ने धारण किया था लेकिन यह ऐसा शंख है जिसे बजाया नहीं जाता है लेकिन इसे सर्वाधिक शुभ माना जाता है-

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