मिलावटी वस्तुओं से आप कैसे बचे

पिछली पोस्ट में हमने आपको बताया था कि कैसे "आपका भोजन धीमे जहर में बदल रहा है" और ये मिलावट से लोग असमय लोग बुढापे की ओर अग्रसर हो रहे है कई लोगो के सवाल थे कि हम आखिर कैसे अपने आप को सुरक्षित करे और इसकी क्या पहचान है कि खरीदी गई वस्तु में क्या मिलावट है-

मिलावटी वस्तुओं से आप कैसे बचे

आइये आपको अपनी मानसिकता के अनुसार आपको इससे बचने के कुछ उपाय और सुझाव देने का प्रयत्न करेगें-क्युकि वैसे जाँच का सही तरीका तो लैब ही है लेकिन सभी टेस्ट आप लैब में नहीं करा सकते है इसलिए घर में कैसे टेस्ट करते है इस पर हम कुछ प्रकाश डालेगे-

क्या और कैसे जाने-


1- सबसे पहले हम रोज-मर्रा की आवश्यकता है कि जाने हमारा खाए जाने वाला आटा कैसा है-मिलावटी आटे का स्वाद फीका होता है और ताज़ी बनी रोटी के कौर को चबा कर खाने से उसमे कोई मिठास नहीं होती है जबकि शुद्ध आटे की रोटियां गुधने में पानी अधिक लगता है तथा इन रोटियों में मिठास भी होती है-आप बाजार के आटे की जगह खुद का गेहूं लेकर साफ़ करके अपने सामने भी पिसवा सकते है इसके दो फायदे होगें-एक आपका आटा फाइबर युक्त होगा तथा गेहूं को धो कर साफ़ करने से घर में श्री मती जी की एक्सरसाइज भी होगी जिससे उनका स्वास्थ भी अच्छा होगा-बस कुछ देर के लिए टी.वी का रिमोट छोड़ना पड़ता है-

2- दूसरी खाने की आवश्यक वस्तु है चावल-अच्छा होगा आप बिना पालिश का चावल ले-चावल के कुछ दानों को लेकर अपने हाथों से रगड़ना चाहिए अगर इसमें पीला रंग होगा तो आपके हाथों में लग जाएगा-आप थोड़े चावल को पानी में भिगो दे और उसमे सान्द्र नमक का तेज़ाब की कुछ बुँदे डाले यदि उसमे पीला रंग मिला है तो उसका रंग बैगनी हो जाएगा-

मिलावटी वस्तुओं से आप कैसे बचे

3- सरसों तेल में आजकल राईस ब्रान आयल की मिलावट हो रही है तथा कुछ व्यापारी तेल निकालते वक्त आर्जीमोन के बीज भी मिलाते है-आर्जीमोन सत्यानासी के पेड़ का बीज है-जो सरसों के जैसा ही होता है इसे आपस में मिला देने पर पहचाना मुसकिल हो जाता है ये सत्यानासी का बीज आपकी आँखों को समय से पहले ही चश्मे के लायक बना रहा है-मोतियाबिंद-कम दिखना आदि इसके कारण हो रहे है-जो लोग चावल की भूसी(राइस ब्रान ऑइल)का निकला हुआ तेल मिलाते है इसकी वजह से फेफड़ों और शरीर में सूजन आती है सांस लेने में कठिनाई होती है-आप शुद्ध घानी का निकला तेल प्रयोग करे भले ये महंगा हो आपको कई बीमारियों से बचायेगा-शरीर की शुष्कता भी नहीं रहेगी-ये आपको पातंजली से भी शुद्ध मिल सकता है-

4- सबसे जादा मिलावट देशी घी में की जाती है आज कल नकली घी में घी का ही एसेंस भी मिला कर लोग बेच रहे है सूंघने पर देशी घी की ही महक आती है लेकिन ये घी गली-मुहल्लों में जादा बेचा जाता है एक बार बेचने वाला दुबारा आप नजर नहीं आता है-क्युकि जैसे ही आप इस घी को गर्म करती है सारी महक गायब हो जाती है और रह जाता है सिर्फ पशु चर्बी-इस प्रकार के घी की जाँच के लिए आप किसी कांच के बर्तन में थोडा सा घी ले और उसमे नमक का तेज़ाब(हाइड्रोक्लोरिक अम्ल-HCL)चार-पांच बूंद ही डाले और साथ में कुछ चीनी के दाने डाले और अब इसे गर्म करे-आपको हलके लाल रंग की आभा दिखाई देती है समझ लीजिये ये घी मिलावटी है-

5- अब हम चर्चा करेगे मसालों की हल्दी ,धनिया,पिसी मिर्च ,गरम मसाला आदि आप साबुत खरीदने की आदत डाले आप बाजार से लाकर धो-साफ़ कर कूट-पीस कर घर में ही तैयार करे-ये  शुद्ध भी होंगे और स्वास्थ के लिए भी फायदेमंद होगें बस थोडा सा श्रीमती जी को अवस्य कष्ट होगा एक आधा टी.वी सीरियल छुट सकता है-लेकिन ये घाटे का सौदा नहीं है आपका अतिरिक्त धन भी बचेगा-अगर आप अकेले है और आपकी मज़बूरी है मार्केट से सामान लेने की तो खुली हुई तो बिलकुल न ले आईएसआई,एगमार्क, एफपीओ, आदि के मोनोग्राम अवश्य देख कर ले- 

6- दूध आपके नौनिहाल की और आपकी आवश्यकता के लिए बहुत जरुरी है लेकिन आप अगर सामने का दूध लाते है तो अगर दूध बेचने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगा कर दूध निकाल रहा है तो भूल से उस दूध को न ले ये आपके शरीर में जाकर आपकी काम-वासना को जबरजस्ती बढ़ा देता है और स्वप्नदोष जैसी समस्या भी हो जाती है सिंथेटिक दूध गर्म करने पर हल्का पीलापन ले लेता है-पक्के फर्श पर दूध की बुँदे डाले मिलावट का अनुमान होगा-

7- मावा भी सिंथेटिक बनाया जा रहा है असली मावे को अगुली से मसलने पर बिखरता नहीं है जबकि नकली मावा बिना चिकनाई का होता है और बिखर जाता है-मिठाई प्रतिष्ठित दूकान से खरीदे भले रेट जादा लेता हो वो अपनी प्रतिष्ठा दांव पे नहीं लगाएगा-

8- किसी कांच के बर्तन या प्लेट पे नीबू का रस डाले और लायी हुई चाय की पत्ती का थोडा चूरा डाले अगर रंग नारंगी या किसी और कलर का होता है तो मिलावट है और अगर हरा मिश्रित पीला दिखे तो ये चाय की पत्ती असली है-

9- काली मिर्च में पपीते के बीज की मिलावट खूब की जाती है काली मिर्च को पानी में डाले शुद्ध  काली मिर्च नीचे बैठ जाती है और पपीते के बीज उपर तैरने लगते है-

10- शुद्ध हींग को किसी लौ पे जलाए-चमक के साथ लौ जलेगी तथा पानी में शुद्ध हींग धोने पर रंग सफ़ेद  या दुधिया हो जाएगा-

11- रुई की बत्ती बनाये उस पर थोडा शहद लगा ले फिर माचिस से जलाए यदि शहद में चीनी और पानी की मिलावट है तो बत्ती नहीं जलेगी और शुद्ध शहद है तो आवाज के साथ जल उठेगी-

12- मिलावटी पिसी मिर्च पानी में डालने पर पानी रंगीन हो जाता है अगर ईंट का चूरा मिला है तो पेंदी में बैठ जाएगा-

13- असली केसर घंटों पानी में कोई रंग नहीं छोड़ता है और मकई के टुकड़े को सुखाकर और चीनी मिलाकर कोलतार डाई का बना नकली केसर पानी में डालने पे रंग छोड़ता है-

14- नकली अमचूर यानी कच्चे आम की खटाई-ये चावल की भूसी आम की गुठली और साइट्रिक एसिड से मिलाकर बनाते है-आप खटाई लेकर पीस ले शुद्ध होगा-

15- चांदी वर्क को जलाने पर उसका भार कम नहीं होता है वो जल कर भी इकट्ठा होने पर बराबर वजन की होगी जबकि नकली वर्क को जलाने पर ग्रे रंग का अवशेष बच जाता है -

16- बाजार की सब्जियों को साफ़ पानी में आधे घंटे डालकर फिर रगड कर धो ले तब छीले-इस प्रकार सब्जी में प्रयोग होने वाले रंग पानी में रह जाता है और लौकी, कद्दू, तोरई , हमेशा सबसे छोटी ले बड़ी में इंजेक्शन प्रयोग किया होता है हो सके तो हरी सब्जी का जादा प्रयोग करे-बंद गोभी भी आजकल बाजार में नकली आ गई है जिसे सिंथेटिक से बनाया जा रहा है-

एक रिपोर्ट के अनुसार-


लखनऊ स्थित इंडियन इंस्ट्टियूट आफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च(आईआईटीआर)के एक अध्ययन के मुताबिक बाजार में उपलब्ध चांदी के वर्क में निकल, लेड, क्रोमियम और कैडमियम पाया जाता है जो वर्क के जरिए हमारे पेट में पहुंचकर ये कैंसर का कारण बन सकते हैं-2005 में हुआ यह अध्ययन आज भी प्रासंगिक है क्योंकि वर्क बनाने की प्रक्रिया आज भी जैसे की तैसे है-


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