नारी विश्वास के साथ जिये

आज समाज का परिवेश बदल गया है लेकिन फिर भी Woman-नारी आज भी अधिकतर खुद को असहाय और बेबस पाती है और कारण सिर्फ इतना है कि अपने अंदर हिम्मत नहीं जुटा पाती है नारी(Woman)कोई भी निर्णय नहीं ले पाती है Woman(नारी) आज भी डरी और सहमी सी रहती है Woman अभी भी खुद को पूर्णतया मजबूत नहीं कर पा रही है हमारा उद्देश्य ये कतई नहीं है कि नारी(Woman)बिलकुल बेबस है जबकि नारी अगर मन और आत्मा से चाह ले तो वो सब कुछ कर सकती है फिर भी कुछ कमियां है जिनको आपको अपने अंदर से निकालने की आवश्यकता है नारी को अपने अंदर Confidence-विश्वास लाने की विशेष आवश्यकता है-

Woman-नारी Confidence-विश्वास के साथ जिये


सबसे नारी(Woman)को अपने आपको शंकाओं से खुद को बाहर लाना होगा किसी भी निर्णय को सावधानी व Confidence लेने की हिम्मत जुटानी चाहिए-मान लीजिये आप नौकरी करती है या कोई बिजनेस और वहां पर आपके सामने कई प्रकार की चुनौतियां आती है और आपका विश्वास(Confidence)डगमगाने लगता है तो आप खुद को मानसिक रूप से खुद को मजबूत करे बस अपने अंदर इस बात का विश्वास लाये कि बिना गलती के आप का कोई कुछ नहीं कर सकता है अपने काम पे अधिक तन्मयता से ध्यान दे काम से काम रक्खे-फ़ालतू न किसी के मुंह लगे न ही किसी को आगे बढ़ने का कोई मौका दे जो वो आपका लाभ ले सके-

नारी(Woman)अपने को एक पुरुष के मुकाबले में खुद को कम तर आंकने का प्रयास न करे आप भी वो सब कर सकती है जो पुरुष कर सकता है आवश्यकता है Woman सिर्फ मानसिक रूप से खुद को तैयार करने की-अपने खुद के महत्व को सभी के सामने लाने की आवश्यकता आप में मौजूद है-जरा सोचिये कि जब आप गृहस्थ में सभी की इक्षाए और जरूरतों को आप खुश रखने के लिए पूरा करती है-तो फिर आप अपनी पहचान बनाने के लिए क्यों नहीं कर सकती है-ये जरुरी नहीं है कि शारीरिक मेहनत से ही सब कुछ मिलेगा-आप में टेलेंट है तो आप अपनी कार्य शैली से भी सभी की कृपा के पात्र बन सकती है-

आप खुद के प्रति बस ईमानदार रहे भले ही रास्ता कठिन हो अडिग रह कर काम पे ध्यान दे-ये भी हो सकता है लोग आपका फैसला मानने से इनकार भी करते हो आप महिला(Woman)है ये सोच कर वो लोग आपको इग्नोर भी करे-तब भी आपको नार्मल तरीके से अपने सहकर्मी से अपनी बात को समझाने का गुण अपने अंदर विकसित करना होगा और फिर धीरे-धीरे एक समय ऐसा भी आएगा जब लोग आपकी बात को महत्व देगें-

आपके हर बात के साथ सहमति जताने का एक मतलब है खुद को सीमित करना-कई बार आपको सर्वश्रेष्ठ तक पहुंचने के लिए दूसरे अच्छे विकल्पों को भी ना कहना पड़ता है-घर-परिवार या कार्यस्थल पर काम करते हुए आपको अपनी प्राथमिकताएं हमेशा ध्यान रखनी चाहिए-ऐसे में यदि कोई बात ऐसी है-जो आपको पूरी तरह नामंजूर है या आपकी क्षमता से बाहर है-तो उसे अवश्य बताएं-अन्यथा हर चीज से तालमेल बना लेने के आपके स्वभाव का फायदा उठाने में लोगों को देर नहीं लगेगी-

आप अपनी समस्याओं(problems)से तब तक बाहर नहीं निकलेगी-जब तक आप उनके बारे में शिकायत(complaint)करती रहेंगी-आप क्या चाहती हैं-इस पर अपनी ऊर्जा लगाएं और बजाय इसके कि आप क्या नहीं चाहतीं-इसी तरह आप क्या कर सकती हैं-इस पर ध्यान दें बस दिमाक ये बात अच्छी तरह फिट करे कि पुरुष की तुलना में नारी(Woman)क्या नहीं कर सकतीं-

जितना आप सहती हैं उतना ही आपको सहने के लिए मजबूर किया जाता है यदि ऐसा कुछ है-जो आप सच में कहना या करना चाहती हैं तो अवश्य उन्हें बताएं-जो आपको समझते हैं-अपनी बात रखने से कभी भी पीछे न हटें और निर्भय(Fearless) होकर अपनी बात कहना सीखें-

आप मजबूत इरादों(Strong-willed)के साथ जीना सीखे-आपको अवश्य ही सफलता मिलेगी-एक बात ध्यान रक्खे मुश्किल परिस्थितियाँ आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है आप जितना ही चुनौतियों(Challenges) का सामना करेगी उतना ही सबके सामने खुद को मजबूती से रख सकेगी-
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