17 अप्रैल 2017

समाज में मासिक धर्म और छुआछूत

महिलाओं का मासिक धर्म(Menstruation)या माहवारी एक सहज वैज्ञानिक और शारीरिक क्रिया है किशोरावस्था से शुरू होने वाली यह नियमित मासिक प्रक्रिया सामान्य तौर पर अधेड़ावस्था तक चलती रहती है लेकिन भारत के ज्यादातर हिस्सों में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं पर लगाई जाने वाली सामाजिक पाबंदियों और अछूतों जैसे व्यवहार की वजह से हर महीने महिलाओं के तीन-चार दिनों का यह समय किसी सजा से कम नहीं है-

समाज में मासिक धर्म और छुआछूत-Menstruation and Untouchable

माहवारी(Menstruation)के दौरान महिलाएं न तो खाना पका सकती हैं और न ही दूसरे का खाना या पानी छू सकती हैं उनको मंदिर और पूजा-पाठ से भी दूर रखा जाता है यहाँ तक कई मामलों में तो उनको जमीन पर सोने के लिए मजबूर किया जाता है-

आम धारणा यह है कि इस दौरान महिलाएं अशुद्ध(Untouchable)होती हैं और उनके छूते ही कोई चीज अशुद्ध या खराब हो सकती है महिलाए पूरे जीवन इन पाबंदियों को इसलिए मानती है क्योंकि घर की बड़ों ने उसे ऐसा करने को कहा था-

क्या महिलाएं सचमुच माहवारी(Menstruation)के दौरान अशुद्ध होती हैं-

1- माहवारी के दौरान महिलाओं पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है समाज में सदियों से चली चली रही परंपरा ही इसकी मुख्य वजह है-विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में यह पारंपरिक मान्यता है कि इस दौरान महिला को घर के सामान्य कामकाज से अलग रखना चाहिए लेकिन यह सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है विज्ञान में इस बारे में कोई तथ्य या जवाब नहीं मिलता है -

2- अब बदलते समय के साथ अब कुछ इलाकों में इस हालत में धीरे-धीरे बदलाव आ रहा है इसकी एक वजह महिलाओं का कामकाजी होना है-

3- अब संयुक्त परिवारों का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है ऐसे में कोई महिला अगर तीन-चार दिनों तक खाना नहीं पकाए तो घर का काम कैसे चलेगा छोटे परिवारों में अपने पति और बच्चों के अलावा मेहमानों को खाना खिलाने की जिम्मेवारी महिला पर ही होती है इसलिए यह सवाल उठने लगा कि अगर वह खाना खिला सकती है तो पका क्यों नहीं सकती कामकाजी महिलाओं को तो माहवारी(Menstruation) के दौरान भी दफ्तर जाना पड़ता है अब वे हर महीने तो इसके लिए छुट्टी लेकर घर नहीं बैठ सकतीं है -

4- अब समय के साथ बदलते परिवेश में लोगो की सोच बदल रही है और काफी लोग अब इस पुराने रीत-रिवाजो से निकल कर बाहर आ रहे है -

5- विज्ञान की दृष्टि से देखें तो मासिक धर्म गर्भाशय की आंतरिक सतह एंडोमेट्रियम के टूटने से होने वाला रक्त स्राव है गर्भधारण कर सकने के लिए इस प्रक्रिया का सामान्य होना आवश्यक है और शरीर में हारमोन नियंत्रण में भी इस प्रक्रिया की अहम भूमिका है-

6- इस प्रक्रिया के दौरान तीन से से आठ दिनों के दौरान करीब 35 मिलीलीटर खून बहता है लेकिन बहुत ज्यादा रक्त स्राव की स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए-

7- मासिक धर्म में अनियमितता का एक बड़ा कारण तनाव भी है इसलिए इस दौरान और सामान्य जनजीवन में तनाव खत्म करने के लिए कोशिश करते रहना चाहिए मोटापे और माहवारी(Menstruation) का सीधा संबंध है अगर कोई महिला मोटापे से ग्रस्त है तो माहवारी अनियमित(Irregular) हो जाती है और वजन कम नहीं होता इसके लिए एक्सरसाइज बहुत अच्छा उपाय है-





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