गन्ने और गुड़ से होने वाले उपचार Treetment from Sugarcane and Jaggery

भारतवर्ष में जब से गन्ने(Sugarcane)का उत्पादन प्रारम्भ हुआ था तभी से इसका उपयोग गुड़(Jaggery)उत्पादन के निमित्त किया जाता रहा है वर्तमान में हमारे देश में लगभग 80 लाख टन गुड़ विभिन्न रूपों में प्रतिवर्ष उत्पादित किया जाता है गुड़ को स्वास्थ्य के लिए अमृत जबकि चीनी को सफेद जहर माना गया है आइये आज आपको गन्ने और गुड़ का रोगों के लिए होने वाले उपचार से आपको अवगत कराते है-

Treetment from Sugarcane and Jaggery


गन्ने(Sugarcane)के रस के फायदे-

  1. ईख की पांच से दस ग्राम जड़ को पीसकर कांजी के साथ सेवन करने से स्त्री का दूध बढ़ता है-
  2. गन्ने का रस और अनार का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से रक्तातिसार(खूनी दस्त)में लाभ होता है-
  3. गन्ने को गर्म राख में सेंककर चूसने से स्वरभंग यानि गला बैठने के रोग में लाभ होता है-
  4. गन्ने के रस की नस्य(नाक में डालने)देने से नकसीर में लाभ होता है-
  5. दो से चार ग्राम हरड़ का चूर्ण खाकर ऊपर से गन्ने का रस पीने से गलगण्ड के रोग में लाभ प्राप्त होता है-
  6. गन्ने को चूसते रहने से पथरी चूर-चूर होकर निकल जाती है गन्ने का रस भी लाभदायक है-
  7. गन्ने का रस पीने से पित्तज प्रदर भी मिट जाता है-

गुड़(Jaggery)से होने वाले उपचार-

  1. चरक संहिता और आयुर्वेदाचार्य बागभट्ट ने भी लोगों को खाना खाने के बाद रोजाना थोड़ा सा गुड़ खाने की सलाह दी है यदि आप भोजन के बाद थोडा सा गुड खा ले तो सारा भोजन अच्छे से और जल्दी पच जाएगा-निरोग और दीर्घायु के लिए भोजन के बाद नियमित रुप से 20 ग्राम गुड़ का सेवन किया जाना चाहिए-चीनी की चाय की जगह गुड़ की चाय अधिक स्वास्थ्यकर मानी जाती है-
  2. आयुर्वेद में किये गये शोध के अनुसार गुड़ के मुकाबले चीनी को पचाने में पांच गुणा ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है यदि गुड़ को पचाने मे 100 कैलोरी ऊर्जा लगती है तो चीनी को पचाने में 500 कैलोरी खर्च होती है-
  3. गुड़ में कैल्शियम के साथ फास्फोरस भी होता है जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक माना जाता है जबकि वहीं चीनी हड्डियों के लिए नुकसानदायक होती है क्योंकि चीनी इतने अधिक तापमान पर बनाई जाती है कि गन्ने के रस में मौजूद फास्फोरस भस्म हो जाता है जबकि ये फास्फोरस कफ को संतुलित करने में भी सहायक माना जाता है-
  4. गुड़ गन्ने से तैयार एक शुद्ध,अपरिष्कृत पूरी चीनी है यह खनिज और विटामिन है जो मूल रूप से गन्ने के रस में ही मौजूद हैं यह प्राकृतिक होता है पर इसके लिए ज़रूरी है की देशी गुड लिया जाए जिसके रंग साफ़ करने में सोडा या अन्य केमिकल का प्रयोग न हुआ हो-
  5. गुड़ सुक्रोज और ग्लूकोज जो शरीर के स्वस्थ संचालन के लिए आवश्यक खनिज और विटामिन का एक अच्छा स्रोत है तथा गुड़ मैग्नीशियम का भी अच्छा स्रोत है जिससे मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को थकान से राहत मिलती है-गुड़ सोडियम की कम मात्रा के साथ-साथ पोटेशियम का भी एक अच्छा स्रोत है इससे रक्तचाप को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिलती है-
  6. गुड़ रक्तहीनता से पीड़ित लोगों के लिए बहुत अच्छा है क्योंकि यह लोहे का एक अच्छा स्रोत है यह शरीर में हीमोग्लोबिन स्तर को बढाने में मदद करता है यह रक्त की शुद्धि में भी मदद करता है तथा पित्त की आमवाती वेदनाओं और विकारों को रोकने के साथ-साथ गुड़ पीलिया के इलाज में भी मदद करता है-
  7. गुड़ गले और फेफड़ों के संक्रमण के इलाज में फायदेमंद होता है यह व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में सहायक होता है तथा गुड़ एक उच्चस्तरीय वायु प्रदूषण में रहने वाले लोगों को इससे लड़ने में मदद करता है-
  8. गुड़ जितना पुराना हो उतना अधिक गुणों से युक्त होता है कोई भी आसव, आरिष्ट बिना गुड़ के नहीं बनाए जाते हैं गुड़ में पाया जाने वाला क्षारीय गुण रक्त की अम्लता को दूर करता है-गुड़ हृदय के लिये हितकारक, त्रिदोष नाशक, मल-मूत्र के रोगों को नष्ट करने वाला, खुजली और प्रमेह नाशक, थकान दूर करने वाला एवं पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला है-
  9. प्राचीनकाल से ही हमारे यहाँ गुड़ का हर मांगलिक कार्य में उपयोग होता है बिना गुड़ के मांगलिक कार्य अधूरा माना जाता है शुभ कार्य के प्रारंभ में गुड़ को शगुन माना गया है किसी भी शुभ कार्य के लिये प्रस्थान के समय गुड़ को मूंह में डालकर जाने से सफलता प्राप्त होती है-
  10. प्रसव के पश्चात स्त्रियों को गुड़ देना प्राचीन काल से चला आ रहा है शिशु जन्म के बाद गर्भाशय की पूर्ण रूप से सफाई न होने पर अनेक विकार होने की संभावना बनी रहती है अत: शिशु के जन्म के तीन दिन तक प्रसूता को गुड़ के पानी के साथ सौंठ दी जाती है-
  11. गुड़ और काले तिल के लड्डू बच्चों को देने से बच्चों का बिस्तर में पेशाब करना दूर हो जाता है और यदि छोटा बच्चा यदि गलती से तम्बाकू खा ले तो विशाक्तता से बचने के लिये गुड़ अथवा गन्ने का रस बच्चे को पिलायें-

  12. आपके बढ़ते हुए बच्चों के लिये यह एक अत्यन्त उत्तम खाद्य है यदि बच्चों को उचित मात्रा में दूध न भी मिले तो उन्हें कुछ मात्रा में गुड़ देना चाहिये जो आपके बच्चे दांत के क्षय या कैल्शियम-हीनता आदि दूसरी बीमारियों से पीड़ित हो तो उनको हमेशा चीनी की जगह पर्याप्त गुड़ देना चाहिये-
  13. दमा के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद है-गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा परेशान नहीं करता है चूँकि इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं गुड़ एवं सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से श्वास एवं दमा में लाभ होता है-
  14. REED MORE-
Upcharऔर प्रयोग-

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