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18 दिसंबर 2016

मस्सों का होम्योपैथिक उपचार क्या है

मस्से मुख्य रूप से बीस से पच्चीस साल की उम्र के आसपास होते हैं लेकिन ये तीस से चालीस साल की उम्र में भी उभरकर सामने आ सकते हैं और कुछ मस्सों(Wart)में बाल भी होते हैं पर ज़्यादातर ऐसा नहीं होता है त्वचा का कोई हिस्सा जब अनावश्यक रूप से बड़ा हो जाए तो उसे मस्सा कहते हैं ये मस्से किशोरावस्था एवं गर्भावस्था के दौरान गहरा रंग ले लेते हैं-

मस्सों का होम्योपैथिक उपचार क्या है


कुछ मस्से जन्म से ही होते हैं अगर तीस की उम्र के बाद ये मस्से निकले तो कैंसर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और अगर इन मस्सों से खून निकले या खुजली हो तो फिर तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क कीजिये लेकिन साधारण रूप से आप इन मस्सों का होम्योपैथी उपचार भी कर सकते है-

मस्से(Wart)का होम्योपैथिक उपचार क्या है-


थूजा-

ये एक प्रधान एंटीसाइकोटिक दवा है इस औषधि का प्रयोग किसी भी प्रकार के मस्सों में किया जा सकता है मस्सों के यह सबसे अच्छी औषधि है मस्सों के झुण्ड निकलने,सिर के पीछे मस्से जैसे दाने होने, ठोड़ी पर मस्से होने, लटकने वाले मस्से होने, खूनी मस्से जिससे कभी-कभी खून निकलता रहता है इन सभी प्रकार के मस्सों को ठीक करने के लिए थूजा औषधि की 30 और 200  शक्ति का सेवन करना लाभदायक होता है-इन मस्सों में थूजा औषधि के सेवन के साथ-साथ थूजा Q (मूल अर्क ) को रूई पर लगाकर मस्सों पर लगाना चाहिए- गर्भावस्था के दौरान स्त्री को पहले कुछ दिनों तक सल्फर औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और फिर कुछ दिनों तक थूजा औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और अंत में मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति सेवन कराने से बच्चे को मस्से नहीं होते है यदि त्वचा पर मस्से गोभी की तरह दिखाई दे तो इस औषधि का प्रयोग करना लाभकारी होता है-

नाइट्रिक ऐसिड का प्रयोग-

फूलगोभी की तरह बड़े खुरदरे मस्से,टेढ़े-मेढ़े मस्से एवं ऐसे मस्से जिसे धोने से बदबूदार खून निकलने लगता हो या फिर छूने  पर भी खून निकलने लगता है इस तरह के मस्सों में नाइट्रिक ऐसिड औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है इस औषधि का प्रयोग लटकने एवं होंठों पर मस्से की तरह दाने होने पर भी किया जाता है-

नैट्रम म्यूर-

पुराने ऐसे मस्से जिसमें दर्द हो और मस्से को हल्का सा छू देने पर असहनीय दर्द हो ये मस्से कभी-कभी जख्म में बदल जाता है-हाथ और अंगूठे में अनगिनित मस्से,ऐसे लक्षणों वाले मस्सों का उपचार नैट्रम-म्यूर औषधि की 30 शक्ति से फयदेमन्द होता है यह रक्तहीन,कमजोर और हरित पाण्डु रोग ग्रस्त स्त्रियों की बीमारी में खास रूप से फायदा करती है-

ऐन्टिम टार्ट-

पुरुषों के जननेन्द्रिय की सुपारी के पीछे मस्से हो गए हों तो ऐन्टिम टार्ट औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है-

कॉस्टिकम-

कास्टिकम एक प्रधान बिष-नाशक और फास्फोरस की विरोधिनी दवा है अगर शरीर पर छोटे-छोटे बहुत से ठोस मस्से हो गए हों जिसके जड़ मुलायम एवं ऊपर के मुंह कठोर और नोकदार हो तो ऐसे मस्सों को ठीक करने के लिए कॉस्टिकम औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता है तथा नाखूनों के किनारे, बाहों, हाथों, पलकों एवं चेहरे पर होने वाले मस्सों में भी इस औषधि का उपयोग किया जाता है-

कैलि म्यूर-

हाथों पर मस्से होने पर कैलि म्यूर औषधि का सेवन करने के साथ इस औषधि की 3x मात्रा को एक चम्मच पानी में मिलाकर लोशन बनाकर मस्सों पर लगाना भी चाहिए-

सीपिया-

जननेन्द्रिय की आगे की त्वचा के अगले भाग या शरीर पर बड़े-बड़े कठोर एवं काले मस्से होने पर सीपिया औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है सीपिया के बाद सल्फर की जरूरत पड़ती है-

नैट्रम म्यूर-

हथेलियों पर मस्से होने पर नैट्रम-म्यूर औषधि की 3x से 200  शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है-

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