न्यूमोनिया का प्राथमिक उपचार

फेफड़े में प्रदाह होने की हालत को Pneumonia का नाम दिया गया है यह एक गंभीर ज्वर है इसमें यथाशीघ्र डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी रहता है यदि ऐसा नहीं किया जाता तो मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है मलेरिया रोग फेफड़ों में ठंड लगने के बाद उसमें सूजन आ जाने से होता है ऐसे में रोगी को सांस लेने में अपार कष्ट होता है और धीरे-धीरे कफ बनना शुरू हो जाता है जो फेफड़ों में जम जाता है तथा यदि दोनों तरफ के फेफड़ों में सूजन आ जाती है तो उसे 'डबल न्यूमोनिया' कहते हैं-

न्यूमोनिया का प्राथमिक उपचार


इस रोग में तेज बुखार आता है तथा पसलियों में दर्द होता है और सिर में दर्द, पैरों में दर्द, छाती में हल्का दर्द, बेचैनी, प्यास अधिक लगना, जीभ का सूख जाना, श्वास लेने में तकलीफ, खांसी आदि न्यूमोनिया के प्रमुख लक्षण हैं-

न्यूमोनिया(Pneumonia)होने पर प्राथमिक उपचार-


1- तारपीन के तेल में थोड़ा-सा कपूर मिलाकर रोगी की छाती तथा पसलियों पर मलने से न्यूमोनिया(Pneumonia)रोगी को पूर्ण आराम मिलता है-

2- आप थोड़े-से तुलसी के पत्ते और आठ-दस कालीमिर्च एक कप पानी में औटाएं और जब पानी आधा रह जाए तो छानकर जरा-सा सेंधा नमक डालकर न्यूमोनिया(Pneumonia)को पिलायें-

3- न्यूमोनिया(Pneumonia)रोगी की छाती तथा पसलियों पर शुद्ध शहद का लेप लगाएं तथा शहद को पानी में मिलाकर पिलाने से भी रोगी को काफी लाभ पहुंचता है-

4- न्यूमोनिया(Pneumonia)से ग्रसित बच्चे की पसलियां चल रही हों तो रत्ती भर हींग गरम पानी में घोलकर उसे पिलाएं-

5- अदरक तथा तुलसी का रस शहद में मिलाकर न्यूमोनिया रोगी को दिन में तीन-चार बार चटाएं-

6- न्यूमोनिया रोगी को दो मुनक्कों में रत्ती-रत्ती भर हींग भरकर रोगी को नित्य दो बार तीन-चार दिनों तक खिलाएं-

7- आंवला, जीरा, पीपल, कौंच के बीज और हरड़ - सभी 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर कपड़छन कर लें तथा इसमें से चार-चार ग्राम चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें-

8- तेजपात,बड़ी इलायची और कपूर का काढ़ा बनाकर न्यूमोनिया रोगी सुबह-शाम पिएं-

9- तुलसी के पत्ते, सोंठ, कालीमिर्च तथा काले नमक की चटनी बनाकर सुबह-शाम रोगी को खिलाएं-

न्यूमोनिया रोगी क्या खाएं क्या नहीं-


न्यूमोनिया के रोगी को घी-तेल की चीजें खाने को न दें तथा उनसी जगह सूखी रोटी, मूंग की दाल, तरोई, टिण्डे, लौकी चौलाई, मेथी, पालक आदि की उबली हुई सब्जियां दें और गेहूं की रोटी मोटे आटे की बनाकर खिलाएं तथा दोपहर को गाय के दूध में अदरक डालकर दें साथ में पीने को पानी उबला हुआ देना चाहिए-

रोगी को निर्देश दें की वह पानी एक साथ न पीकर घूंट-घूंट पिए तथा भोजन के बाद उसे आठ-दस कदम अवश्य चलाएं तथा दूध में चीनी की जगह गुड़ या शहद प्रयोग करें-

खटाई, मिठाई, तरबूज, अमरूद, सेब, केला आदि का सेवन न करें रोगी को पपीते का रस दें सकते हैं-

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