चेचक के उपचार के लिए क्या करें

Treatment for Smallpox


चेचक (Smallpox) की इस समस्या में मरीज को तली-भुनी-खट्टी नमक वाली चीजें खाने के लिए नहीं देनी चाहिए चिकनपॉक्स वेरीसेला जोस्टर नामक वायरस से होने वाली समस्या है यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है जो खांसने, छींकने, छूने या रोगी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है-

चेचक के उपचार के लिए क्या करें

चेचक (Smallpox) के लिए उपचार-


चेचक के रोग को घरेलू भाषा में ‘माता’ या ‘शीतला’ भी कहते हैं यह रोग अक्सर उन बच्चों को होता है जिनके शरीर में शुरू से ही गर्मी अधिक होती है तथा उनकी उम्र दो से चार वर्ष तक की होती है चेचक (Smallpox) से अधिकतर पीडित बच्चे नवजात से लेकर 10-12 साल की उम्र के बच्चों को चिकनपॉक्स की समस्या ज्यादा होती है लेकिन कई मामलों में ये इससे अधिक उम्र के लोगों को भी हो सकती है-

चेचक के उपचार के लिए क्या करें

चेचक (Smallpox) रोग होने और इसका पूरा इलाज लेने के बाद इसके दोबारा होने की आशंका कम हो जाती है लेकिन 50 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण यह बीमारी फिर से हो सकती है इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, लंबे समय से किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति और चिकनपॉक्स से पीडित मरीज के सीधे संपर्क में आने से भी यह रोग हो सकता है-

चेचक (Smallpox) क्या लक्षण है-


सिरदर्द, बदनदर्द, बुखार, कमजोरी, भोजन में अरूचि, गले में सूखापन और खांसी आदि होने के बाद दूसरे दिन से ही त्वचा पर फुंसियां उभरने लगती हैं-

चेचक (Smallpox) के साथ बैक्टीरिया का संक्रमण, मेनिनजाइटिस (दिमाग का बुखार), इनसेफिलाइटिस (दिमाग में सूजन) गुलेन बेरी सिंड्रोम (कमजोर इम्युनिटी से नर्वस सिस्टम का प्रभावित होना), निमोनिया, मायोकारडाइटिस (ह्रदय की मांसपेशियों को क्षति), किडनी और लिवर में संक्रमण हो जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए वर्ना स्थिति गंभीर हो सकती है-

आमतौर पर लोग इन्हें माता समझकर झाड़ा या घरेलू उपचार कराने लगते हैं जो कि गलत है इसके लिए डॉक्टर को दिखाना जरूरी होता है चेचक (Smallpox) में शरीर पर उभरे दाने यानी पानी वाली फंसियां एंटीवायरल दवाओं और एहतियात बरतने से दो हफ्ते में ठीक होने लगती हैं लेकिन ध्यान रहे कि मरीज के सीधे संपर्क मे आने वाले लोग स्वयं भी पूरी तरह से सावधानी बरतें-

गर्मियों की शुरूआत से ही चेचक (Smallpox) के वायरस ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और रोग का कारण बनते हैं ऎसे में ज्यादा सावधानी बरतना जरूरी है-

चेचक (Smallpox) से कैसे बचाव करे-


चेचक (Smallpox) से बचाव के लिए बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण होना चाहिए-ये वैक्सीनेशन दो डोज में दी जाती हैं इसकी पहली डोज बच्चे के 12-15 माह के होने पर और दूसरी डोज 4-5 साल की उम्र में दी जाती है इस बीमारी के दौरान मरीज को वेलसाइक्लोवीर और एसाइक्लोवीर जैसी एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं-

चेचक (Smallpox) के मरीज की देखभाल-


1- चेचक (Smallpox) होने पर मरीज को अलग कमरे में रखें तथा उसके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों को घर के अन्य लोग प्रयोग में न लें-

2- यदि टीका लिये हुए व्यक्ति को अगर यह रोग होता है तो सामान्यतया हल्के लक्षण दिखते हैं तथा टीके से चेचक के कारण होने वाले दूसरे रोगों से भी बचाव संभव है जैसे-इससे दाद से बचाव होता है जो त्वचा की दर्दनाक स्थिति हो सकती है अगर आपने इसका टीका नहीं लगवाया और आप इस रोग से ग्रस्त होते हैं तो डॉक्टर से परामर्श लें और उचित इलाज करवाएं-

3- चेचक (Smallpox) के मरीज की देखभाल करने वाले लोग मुंह पर मास्क लगाकर रखें इस दौरान रोगी को ढीले और सूती कपड़े पहनाएं व इन्हें रोजाना बदल दें -

4- चेचक (Smallpox) में मरीज को खट्टी, मसालेदार, तली-भुनी और नमक वाली चीजें खाने के लिए न दें क्योंकि इससे फुंसियो में खुजली बढ़ सकती है तथा उसके खाने में सूप, दलिया, खिचड़ी और राबड़ी जैसी हल्की व ठंडी चीजों को शामिल करें इस बीमारी के बाद व्यक्ति कमजोरी महसूस करने लगता है जिसके लिए उसे पौष्टिक आहार, फल व जूस, दूध, दही, छाछ जैसे तरल पदार्थ दें -

5- इसमें होने वाले बुखार का इलाज किया जा सकता है लेकिन एस्पिरिन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और खासकर बच्चों के मामले में क्योंकि यह गंभीर प्रतिक्रियात्मक स्थिति बना सकती है-इस बारे में जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें-

6- आयुर्वेद में चिकनपॉक्स को "लघुमसूरिका" कहते हैं यह रोग शरीर की मेटाबॉलिक दर मे गड़बड़ी से होता है जिसके लिए संजीवनी और मधुरांतक वटी तुरंत राहत के लिए दी जाती है तथा गिलोय की 5-7 इंच लंबी बेल को कूटकर इसका रस निकाल लें या गर्म पानी में उबालकर, ठंडा होने पर इसे मसल लें और छानकर सुबह और शाम को प्रयोग करें -

7- तुलसी के 5 पत्ते, 5 मुनक्का, 1 बड़ी पीपली (छोटे बच्चों को 1/4 पीपली व बड़े बच्चों को 1/2 पीपली) को कूटकर रस निकाल लें या सिल पर पीसकर पेस्ट बना लें-छोटे बच्चों को 1/2 चम्मच व बड़े बच्चों को एक चम्मच सुबह-शाम को दें-

8- यदि फुंसियों में ज्यादा खुजली हो तो छोटे बच्चों को 1/4 चम्मच और बड़े बच्चों को 1/2 चम्मच हल्दी को 1/2 गिलास दूध में मिलाकर दिन मे दो बार देने से लाभ होगा-तुलसी के 5 पत्तों को चाय बनाते समय उबाल लें और छानकर पीने से दर्द, खुजली में राहत मिलती है-

9- नीम के पेड़ की डाल से मरीज़ को हल्के से हवा करना भी एक तरीका है इस डाल की पत्तियां हल्के से मरीज़ के शरीर को छुआने से खुजली में राहत मिलती है त्वचा को न रगड़कर और अपने नाखून छोटे रखकर भी आप त्वचा के संक्रमणों से बच सकते हैं-

10- इसके अलावा मरीज को खाने में नमक वाली और गर्म चीजें देने की बजाय राबड़ी व ठंडे तरल पदार्थ दें -

चेचक रोग (Smallpox) होने पर सावधानियाँ-


1- आप रोगी को जब भी नहलाये उस पानी में नीम की पत्तियों को अवश्य ही उबाले-

2- चेचक के रोग से ग्रस्त रोगी के घर वालों को खाना बनाते समय सब्जी आदि में छोंका नहीं लगाना चाहिए-

3- चेचक के रोगी के चारो तरफ साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखे तथा दरवाज़े पर और चेचक रोगी के बिस्तर के चारो और नीम के पत्तों की टहनी लटका देनी चाहिए-

4- चेचक से ग्रसित बच्चे को अन्य लोगों से दूर रखें तथा ध्यान रखें कि रोगी के शरीर पर आए छालों या फोड़े को खरोंचे नहीं वरना ये व फैल सकते है व दर्द भी हो सकता है बच्चे के नाखून छोटे रखें व फोड़ों को ढंके नहीं-

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