हिस्टीरिया क्या है

हिस्टीरिया(Hysteria)अवचेतन अभिप्रेरणा का परिणाम है अवचेतन अन्तर्द्वंध से चिंता उत्पन्न होती है और यह चिंता विभिन्न शारीरिक,शरीरक्रिया संबंधी एवं मनोवैज्ञानिक लक्षणों में परिवर्तित हो जाती है इस रोग लक्षण में बह्य लाक्षणिक अभिव्यक्ति पाई जाती है एक प्रकार से आप इसे इसे दिमागी बीमारी भी कह सकते हैं वैसे हिस्टीरिया(Hysteria)का रोग ज़्यादातर स्त्रियों को होने वाला एक दिमागी रोग होता है इसको स्त्रियों का मानसिक रोग भी कहा जाता है-

हिस्टीरिया क्या है


यह रोग पन्द्रह से पच्चीस साल की युवतियों में अधिक होता है हिस्टीरिया(Hysteria)रोग में स्त्रियों को मिर्गी के समान ही बेहोशी के दौरे आते हैं-

जब हिस्टीरिया((Hysteria)होता है तो इसमें रोगी अचेत अवस्था में पहुंच जाता है हिस्टीरिया रोग में सिर्फ रोगी को बेहोशी के दौरे ही नहीं पड़ते बल्कि कभी-कभी दूसरे लक्षण भी सामने आते हैं जैसे - हिस्टीरिया का दौरा पड़ने पर कुछ समय के लिए देखना और सुनना बन्द हो जाना या मुंह से आवाज़ ना निकलना और हाथ-पैरों का कांपना, शरीर का कोई भी हिस्सा बिल्कुल सुन्न पड़ जाना जैसा लकवे मे होता है- इसमें रोगी विभिन्न प्रकार की कुचेष्टायें यानी अजीब कार्य करने लगता है-

स्त्री-पुरुषों में अपने आप होती है अर्थात ऐसे स्त्री-पुरुष जिनमें यौन का आवेश दमित होता है-जैसे विवाह में विलंब होना या पति की पौरुषहीनता, तलाक, मृत्यु, गंभीर आघात, धन हानि, मासिक धर्म विकार, संतान न होना, गर्भाशय की बीमारियां, पति की अवेहलना या दुर्व्यवहार आदि कई कारणों से स्त्रियां इस रोग में ग्रस्त हो जाती हैं

इस रोग का वेग या दौरा सदा किसी दूसरे व्यक्ति की उपस्थिति में होता है एक बात सत्य है कि कभी किसी अकेली स्त्री को हिस्टीरिया(Hysteria)का दौरा नहीं पड़ता है- जिन स्त्रियों को यह विश्वास होता है कि उनका कोई संरक्षण, पालन, परवाह एवं देखभाल करने वाला है बस उन्हें ही यह रोग होता है- 

यदि इसके विपरीत,रोगी को विश्वास हो जाए कि किसी को उसकी चिंता नहीं है और कोई उसके प्रति सद्भावना-सहानुभूति नहीं रखता है और न कोई देखभाल करने वाला है तो उस स्त्री का यह रोग अपने आप ठीक हो जाता है-

आयुर्वेद के अनुसार ज्ञानवाही नाड़ियों में तमोगुण एवं वात तथा रूखेपन की वृद्धि हो कर चेतना में शिथिलता, अथवा निष्क्रियता आ जाने से यह रोग होता है- इस रोग की शुरुआत से पूर्व या रोग होने पर किसी अंग विशेष, स्नायु, वातवाहिनी में या अन्य कहीं क्या विकार हो गया है यह पता नहीं चलता-

हिस्टीरिया(Hysteria)के लक्षण-

1- हिस्टीरिया रोग के होने पर रोगी स्त्री का जी मिचलाने लगता है तथा सांस कभी धीरे और कभी तेज चलने लगती है तथा बेहोशी छा जाती है और पीड़ित स्त्री के हाथ-पैर अकड़ने लगते हैं और उसके चेहरे की आकृति बिगड़ने लगती है-इस रोग से पीड़ित स्त्री अपने दिमाग पर काबू नहीं रख पाती है और अचानक हंसने लगती है और अचानक ही रोने लगती है-वह बिना किसी कारण से चिल्लाने लगती है और कोई-कोई रोगी इसमें मौन या चुप भी पड़ा रहता है-इस रोग से पीड़ित स्त्रियां कुछ बड़बड़ाने लगती है और दूसरों को मारने-पीटने लगती है और कभी चीख के साथ ज़मीन पर गिर जाती है-कभी बैठे-बैठे बेहोश होकर गिर पड़ती है-रोगी स्त्री को ऐसा लगता है कि वो कितनी ताकतवर है लेकिन दूसरे ही पल ऐसा महसूस होता है कि उसके शरीर में जान ही नहीं है-उसको परेशान करने वाली डकारें और हिचकी शुरू हो जाती है आवाज़ में ख़राबी पैदा हो जाती है पेशाब बन्द हो जाता है-

2- इस रोग में पूरी तरह से बेहोश नहीं होती है तथा बेहोशी की हालत समाप्त हो जाने पर स्त्री को खुलकर पेशाब आता है- इस रोग की उत्पत्ति से पूर्व या आरम्भ में हृदय में पीड़ा, जंभाई, बेचैनी आदि लक्षण भी होते हैं- इस रोग से पीड़ित स्त्री को सांस लेने में कठिनाई, सिर, पैर, पेट और छाती में दर्द, गले में कुछ फंस जाने का आभास, शरीर को छूने मात्र से ही दर्द महसूस होता है, आलसी स्वभाव, मेहनत करने में बिल्कुल भी मन ना करना, रात में बिना बात के जागना, सुबह देर तक सोते रहना, भ्रम होना, पेट में गोला सा उठकर गले तक जाना, दम घुटना, थकावट, गर्दन का अकड़ना, पेट में अफारा होना, डकारों का अधिक आना और हृदय की धड़कन बढ़ जाना, साथ ही लकवा और अंधापन हो जाना आदि हिस्टीरिया के लक्षण हैं-

3- इस रोग से पीड़ित स्त्री को प्रकाश की ओर देखने में परेशानी होने लगती है जब स्त्री को इस रोग का दौरा पड़ता है तो उसका गला सूखने लगता है और वह बेहोश हो जाती है-

4- इस रोग के कोई निश्चित लक्षण नही होते जिससे यह कहा जा सके कि रोग हिस्टीरिया ही है-अलग-अलग समय अलग-अलग लक्षण होते हैं किन्हीं दो रोगियों के एक से लक्षण नहीं होते-रोगी जैसी कल्पना करता है वैसे ही लक्षण दिखाई पड़ते हैं-

5- साधारणतः रोगी बिना कारण या बहुत मामूली कारणों से हंसने या रोने लगता है प्रकाश या किसी प्रकार की आवाज उसे अप्रिय लगते हैं सिर, छाती, पेट, शरीर की संधि, रीढ़ तथा कंधों की मांसपेशियों में काफी वेदना होने लगती है प्रायः दौरे से पहले रोगी चीखता ,किलकारी भरता है तथा उसे लगातार हिचकियां आती रहती हैं और  मूर्च्छा में रोगी के दांत भी भिंच सकते है-

6- हिस्टीरिया रोग कई कारणों की वजह से होता है-हिस्टीरिया के रोग का कारण अधिक चिंता और मानसिक तनाव होता है- स्त्रियों को हिस्टीरिया का रोग किसी तरह के सदमे, चिन्ता, प्रेम में असफलता, मानसिक दु:ख और किसी दुख का गहरा आघात होने से अधिक होता है-

7- स्त्रियों की यौन-उत्तेजना बढ़ने के कारण भी हिस्टीरिया(Hysteria)रोग के लक्षण पैदा हो जाया करते हैं बहुत सी स्त्रियों को जरायु (गर्भावस्था) में विकार या गर्भाशय या डिम्बकोष में गड़बड़ी होने के कारण भी हिस्टीरिया रोग हो जाया करता है स्नायु-मंडल की क्रिया में किसी तरह के विकार(स्नायुविक कमज़ोरी) उत्पन्न होने के कारण से भी यह रोग हो सकता है किसी तरह के अपने मनोभावों को व्यक्त न कर पाने के कारण भी यह गुल्मवायु या हिस्टीरिया रोग हो जाता है-

8- मासिक स्राव का सही समय पर न होना या मासिक स्राव होने के समय बहुत अधिक कष्ट(दर्द)होना, विवाह के लिए उम्र हो जाने पर भी युवती की शादी न होने पर,सेक्स क्रिया करते समय पूरी तरह से संतुष्ट न होने पर, योनि और गर्भाशय के अंदर सूजन आदि के रोग होने से तथा डर, दिमागी आघात, शोक और शरीर की कमज़ोरी की वजह से भी हिस्टीरिया का रोग अधिकतर स्त्रियों को हो जाता है तथा यह रोग उन स्त्रियों को भी हो जाता हो, जो विधवा हो जाती है तथा उन शादीशुदा स्त्रियों को भी यह रोग हो जाता है जिनके पति विदेश चले जाते हैं-

9- अगर हिस्टीरिया(Hysteria)रोगी के साथ कोई बड़ी दुर्घटना हुई है और वह उसे भुलाने की कोशिश कर रहा हो पर न भुला पाए तो भी उसे हिस्टीरिया का रोग हो सकता है अगर किसी युवती को संभोग करने की इच्छा होती है और बार-बार किसी कारण से उसे अपनी इस इच्छा को दबाना पड़ता हो तथा जिनकी संभोग(सेक्स की इच्छा पूरी नहीं होती)के प्रति इच्छा पूर्ण नहीं होती है और वह हीनभावना से ग्रस्त हो जाती है तो उसे हिस्टीरिया का रोग हो सकता है-

10- हिस्टीरिया रोग दूसरे कई रोगों के के कारण भी हो सकता है जैसे- कब्ज बनना, मासिक धर्म संबन्धी कोई आदि-इसके अलावा वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के बीच अक्सर नोक-झोंक लगी रहना भी हिस्टीरिया रोग का कारण हो सकता है तथा जो अपने पति से कलेश या नफरत करती है-

11- लोग हिस्टीरिया और मिर्गी के दौरे मे अन्तर नहीं समझ पाते है मिर्गी के दौरे में रोगी को अचानक दौरा पड़ता है-रोगी कहीं पर भी रास्ते में, बस में, घर पर गिर जाता है, उसके दांत भिंच जाते हैं जिससे उसके होठ और जीभ भी दांतों मे आ जाते हैं जबकि हिस्टीरिया रोग मे ऐसा नहीं होता है रोगी को हिस्टीरिया का दौरा पड़ने से पहले ही महसूस हो जाता है और वो कोई सुरक्षित सा स्थान देखकर वहां पर लेट सकता है उसके दांत भिचने पर होठ और जीभ दांतों के बीच मे नहीं आती है पर हाथ-पैरों का अकड़ना दोनों ही मे एक ही जैसा होता है लेकिन मिर्गी के दौरे का समय अनिश्चित नहीं होता है हिस्टीरिया में ये कम या ज़्यादा हो सकता है-

12- हिस्टीरिया में लक्षण भी बदलते रहते हैं हिस्टीरिया के रोगी को अमोनिया आदि सुंघाने पर दौरा खुलकर दुबारा भी आ सकता है लेकिन रोगी को दौरा आने पर ज़्यादा परेशान करना या छेड़ना ठीक नहीं है यह दौरा खुलकर दोबारा भी आ सकता है रोगी को दौरे के समय ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहिए तथा दौरा पड़ने पर रोगी के कपड़े ढीले कर देने चाहिए और उसके शरीर को हवा लगने दें-जैसे-जैसे दौरा खत्म होगा तो रोगी खुद ही धीरे-धीरे खड़ा हो जाएगा और कमज़ोरी महसूस होने पर रोगी को गर्म चाय या कॉफी पिला सकते हैं पर ये इलाज कुछ समय के लिए ही होता है-
Upcharऔर प्रयोग-

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी जानकारी दी है आपने इससे काफी हद तक मदद मिलेगी, और ये जानकारी दूसरों को भी मदद पहुंचाने का काम करेगी

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