तुलसी और रोग का उपचार

मनुष्य पर बुखार का हमला कभी भी हो सकता है मौसम बदलना शुरू हुआ नहीं कि आपको बुखार ने आ घेरा तथा कभी-कभी मच्छरों का आक्रमण भी मलेरिया जैसे जानलेवा बुखार को आमिन्त्रत कर देता है ऐसे में आवश्यकता होती है हम घरेलू तुलसी(Tulsi)के प्रयोग से अपने आपको इन रोगों से कैसे बचायें तो हम आपको नीचे तुलसी के प्रयोग की कुछ जानकारी दे  रहे है-

तुलसी और रोग का उपचार

सामान्य ज्वर(General fever)का उपचार-


सामान्य बुखार में शरीर का तापमान 102-103 डिग्री हो जाता है और बैचैनी, शरीर में दर्द, प्यास का अधिक लगना, सिर-हाथ-पैरों में पीड़ा आदि की शिकायत हो जाती है ये गर्मी या धूप में अधिक घूमना, थकावट, पेट में दर्द, सर्दी-गर्मी के प्रभाव से भी यह रोग हो सकता है तो आप दस तुलसी के पत्ते, बीस काली मिर्च, पांच लौंग, थोड़ी-सी सोंठ पीसकर ढाई सौ मिलीलीटर पानी में उबाल लें और शक्कर मिलाकर रोगी को पिला दें और अगर रोगी को ज्वर के कारण घबराहट महसूस होती हो तो तुलसी के रस में शक्कर डालकर शरबत बना लें और रोगी को पिला दें इससे रोगी को शीघ्र आराम मिलता है-

मौसमी बुखार(Seasonal flu)काउपचार-


बरसात या मौसम बदलने से रक्त संचार पर भला-बुरा असर पड़ता ही है और ज्वर के रूप में हमारे अंदर घंटी बजा देता है-तो मौसमी बुखार(Seasonal flu)में तुलसी की दस ग्राम जड़ लेकर पानी में उबालिए और इसे गुनगुना ही पी जाइए बस दो-तीन दिन सुबह-शाम इस उपचार से रक्त-साफ स्वच्छ हो जाएगा-

पुराना बुखार(Old fever)का उपचार-


यदि पुराना बुखार हो तो फेफड़े कमजोर होने लगते हैं और खांसी उठती रहती है तथा छाती में दर्द भी होता है-तो आप तुलसी रस में मिश्री घोलकर तीन-तीन घंटे बाद तीन दिन तक रोगी को पिलाए इससे ज्वर भी उतर जाएगा और खांसी व दर्द भी जाते रहेंगे-

सर्दी बुखार(Cold Fever)उपचार-


सर्दी बुखार(Cold Fever)होने पर रोगी को पांच तुलसी-दल और पांच काली मिर्च पानी में पीसकर पिलाएं या फिर तुलसी-मिर्च का वह चूर्ण ढाई सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से तुरन्त असर होता है इसे आप आधे-आधे घंटे बाद दो बडे़ चम्मच पिलाते रहे  इससे निश्चित लाभ होता है-

खांसी बुखार(Cough fever)उपचार-


1- दस ग्राम तुलसी-रस, बीस ग्राम शहद और पांच ग्राम अदरक का रस मिलाकर एक बड़ा चम्मच भर कर पिला दे ये एक अद्भुत योग है आजमाकर देख लें-

2- ग्यारह पत्ते तुलसी और ग्यारह दाने काली मिर्च, दोनों को पानी में पीसकर छान लें फिर आप आग पर मिट्टी का खाली सकोरा पकाकर लाल कर दें और उसमें तुलसी काली मिर्च का घोल छौंक दें यह घोल गुनगुना रह जाने पर काला नमक मिलाकर पिला दें-खांसी बुखार समूल निकल भागेंगे-

3- दो ग्राम तुलसी पत्ते, दो ग्राम अजवायन पीसकर पचास ग्राम पानी में घोलकर पिला दें ये आप सुबह-शाम पिलाएं-

मलेरिया बुखार(Malaria fever)का उपचार-


1- मलेरिया बुखार के लक्षण हैं कि ठंड लगकर बुखार आना, कंपकपी लगना, शरीर में दर्द, घबराहट, भोजन में अरुचि, आंखों में लाली, मुंह सूख जाना-मौसमी बुखार, बदहजमी, पेट के विकार, कब्ज लू लगने आदि विकारों से ग्रस्त रोगियों का खून जब मच्छरों द्वारा फैलता है तो अच्छे-अच्छों को चारपाई पर पटक देता है इसी को मलेरिया कहते हैं-

2- तुलसी का रस, मंजरी, तुलसी-माला, तुलसी के पौधे और तुलसी-बीज मलेरिया को काटकर फेंक देते हैं आप तुलसी-रस दस ग्राम और पिसी काली मिर्च एक ग्राम मिलाकर रोगी को दिन में पांच-छह बार दो-दो घंटे बाद पिलाते रहें यदि आप इस परेशानी से पहले से ही बचना चाहें तो तुलसी के दो सौ ग्राम रस में सौ ग्राम काली मिर्च मिलाकर रख दें-सुबह-दोपहर-शाम एक-एक चम्मच पिलाएं-

पुराना मलेरिया(Old Malaria)का उपचार-


अगर आपको पुराना मलेरिया है तो तुलसी-दल और सात काली मिर्च दोनों दाढ़ के नीचे रखकर चूसते रहें दिन में तीन-चार बार यही प्रक्रिया दोहराने से महीनों पुराना मलेरिया भी भाग जाएगा-

लगातार बुखार रहने का उपचार-


1- जलकुम्भी के फूल, काली मिर्च और तुलसी-दल, तीनों समान मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें और प्रातः-सायं पिलाएं-

2- तुलसी-दल दस ग्राम लेकर पांच दाने काली मिर्च के साथ घोट लें और दिन में तीन बार सेवन कराएं शरीर की आन्तरिक सफाई होते ही बुखार का नामोनिशान भी नहीं रहेगा-

सन्निपात ज्वर(Typhus fever)का उपचार-


ज्वर इतने जोर का बढ़ जाए कि आदमी बड़बड़ाने लगे तो ऐसी स्थिति में तुलसी, बेल (बिल्व) और पीपल के पत्तों का काढ़ा उबालें और जब पानी ढाई-तीन सौ ग्राम बच जाए तो आप इसे शीशी में भर लें तथा दस-दस ग्राम दो-दो घंटे बाद रोगी का पिलाते रहें इसमें निश्चित ही लाभ होगा-

लू लगने(Sunstroke)का उपचार-


एक चम्मच तुलसी-रस में देशी शक्कर मिलाकर एक-एक घंटे बाद देते रहें-यह न समझें कि तुलसी-रस गर्म होने से हानि पहुंचाएगा-संजीवनी शक्ति जिस कन्दमूल में भी होगी वह गर्म ही होगा-आराम आने के बाद भी धूप में निकलना हो तो तुलसी रस में नमक मिलाकर पीएं इससे लू लगने की आशंका ही नहीं रहेगी-प्यास भी कम लगेगी और चक्कर भी नहीं आएंगे-

टूटा-टूटा बदन-


तुलसी दल की चाय बनाकर पीएं आपके बदन में ताजगी की लहरें दौड़ने लगेंगी यदि आप घर में अगर चाय की पत्ती की जगह तुलसी दल सुखाकर रख लें तो कफ, सर्दी, जुकाम, थकान और बुखार या सिर-दर्द पास भी नहीं फटकेंगे-

जुकाम(Common cold)का उपचार-


1- जुकाम के लक्षण हैं-नाक में खुश्की या श्लेष्मा अधिक बहना, खांसी के साथ कफ का निकलना, कान बंद हो जाना, छींक आना, आंखों से पानी आना, सिरदर्द-यह ऋतु के बदलने, अत्यधिक ठण्डे पेय पदार्थों के प्रयोग, पानी में भीगने, अत्यधिक मदिरापान, धूम्रपान तम्बाकू-गुटखे का सेवन करने से हो जाता है-

2- छोटी इलायची के कुल दो दाने और एक ग्राम तुलसी बौर(मंजरी)डालकर काढ़ा बनाएं और चाय की तरह दूध-चीनी डालकर पिला दें यदि दिन में चार-पांच बार भी पिला देंगे तो खुश्की नहीं करेगी मगर सर्दी-जुकाम को जड़ से ही गायब कर देगी-

3- तुलसी के पत्ते छः ग्राम सोंठ और छोटी इलायची छः-छः ग्राम, दालचीनी एक ग्राम पीसकर चाय की तरह उबाल लें अब थोड़ी-सी शक्कर डाल लें तथा दिन में इस चाय का चार बार बनाकर पीएं-कुछ खाएं नहीं जुकाम कैसा भी हो ठीक हो जाएगा-

4- यदि जुकाम के साथ बुखार भी हो तो चाय के अलावा तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर दिन में चार बार सेवन करें-जुकाम के कारण होने वाला ज्वर शान्त हो जाएगा-

5- दालचीनीं, सोंठ और छोटी इलायची, कुल एक ग्राम, तुलसी-दल, छह ग्राम, इन्हें पीसकर चाय बनाएं और पीएं-दिन में ऐसी चाय चार बार भी ले सकते हैं तथा उस रात पेट भरकर खाना न खाएं फिर अगली सुबह आराम आ जाएगा-

शीघ्रपतन(Premature Ejaculation)एवं वीर्य की कमी-


शीघ्रपतन एवं वीर्य की कमी की समस्या तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से दूर होती है-

नपुंसकता(Impotence)-


तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढोतरी होती है-

मासिक धर्म(Menstrual)में अनियमियता-


1- जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो भी ठीक होती है-

2- तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा(तुलसी के बीज)शीतल होता है इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है इसे भिगाने से यह जेली की तरह फुल जाता है इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां दाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है यह पित्त घटाता है ये त्रीदोषनाशक, क्षुधावर्धक भी है-


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