लक्षणों को देखकर ग्रहों की प्रतिकूलता जाने

Symptoms of Planetary Disorientation


मनुष्य के जीवन पर ग्रहों की स्थिति (Planets) का असर अक्सर ही देखने को मिलता है कब कौन सा ग्रह अनुकूल है और कब कौन सा ग्रह प्रतिकूल है ये आपके जीवन में होने वाली रोजाना की घटनाओं के आधार पर भी पता लगाया जा सकता है आप स्वयं कुछ ख़ास लक्षण द्वारा जान सकते है कि किस ग्रह की अशुभ स्थिति आपको अशुभ फल दे रही है-

लक्षणों को देखकर ग्रहों की प्रतिकूलता जाने

लेकिन ये लक्षण बताने से पहले ये भी अवगत करना आवश्यक समझता हूँ कि ये जरुरी नहीं है कि लक्षण होने पर सिर्फ ग्रहों (Planets) का प्रभाव ही होगा ये भी हो सकता है कि आपके शरीर में भी आवश्यक विटामिन या खनिज का अभाव के कारण भी लक्षण हो-अत: मिली जुली स्थिति को आप अपनी मानसिकता के अनुसार जानने का भी प्रयास अवश्य करें क्युकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है-

ग्रहों (Planets) अनुकूलता-प्रतिकूलता आधरित लक्षण-


सूर्य (Sun Planet) की अशुभता के लक्षण-


यदि आपको अधिक आलस आता है तो सूर्य की स्थिति अशुभ हो सकती है या अगर आपके चेहरे पर तेज का अभाव है और आप हमेशा खुद को थका-थका महसूस करते हैं किसी काम को करने में आप आलस्य महसूस करते हैं या फिर हृदय के आसपास कमजोरी का आभास होता है अथवा सूर्य के अशुभ होने पर पेट, आँख, हृदय का रोग हो सकता है साथ ही सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न होती है तो समझ लीजिए सूर्य की स्थिति अशुभ है-

चूँकिू सूर्य पिता, आत्मा समाज में मान, सम्मान, यश, कीर्ति, प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा का करक होता है इसके लक्षण यह है कि मुँह में बार-बार बलगम इकट्ठा हो जाता है सूर्य अशुभ होने पर सामाजिक हानि, अपयश, मनं का दुखी या असंतुस्ट होना, पिता से विवाद या वैचारिक मतभेद सूर्य के पीड़ित होने के सूचक है-

क्या उपाय करें-

लक्षणों को देखकर ग्रहों की प्रतिकूलता जाने

यदि सूर्य अशुभ है तो आप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करे तथा सूर्य को आर्घ्य दे व गायत्री मंत्र का जाप करे और ताँबा, गेहूँ एवं गुड का दान करें आप हमेशा प्रत्येक कार्य का प्रारंभ मीठा खाकर करें-

ताबें के एक टुकड़े को काटकर उसके दो भाग करें तथा एक को पानी में बहा दें तथा दूसरे को जीवन भर साथ रखें-

             ॐ रं रवये नमः या ॐ घृणी सूर्याय नमः

इस उपरोक्त मन्त्र का 108 बार (एक माला) जाप नित्य करे-

चंद्रग्रह (Moon Planet) की अशुभता के लक्षण-


चन्द्रमा माँ का सूचक है और मनं का करक है शास्त्र कहता है की "चंद्रमा मनसो जात:" इसकी कर्क राशि है कुंडली में चंद्र अशुभ होने पर माता को किसी भी प्रकार का कष्ट या स्वास्थ्य को खतरा होता है या दूध देने वाले पशु की मृत्यु हो जाती है तथा स्मरण शक्ति भी कमजोर हो जाती है गाँव के घर में पानी की कमी आ जाती है या नलकूप, कुएँ आदि सूख जाते हैं-

अगर आप अक्सर निराश और दुखी रहते हैं और बात-बात पर रोने लगते हैं तो समझ लीजिए आपका चंद्रमा अशुभ फल दे रहा है मानसिक तनाव, मन में घबराहट, तरह-तरह की शंका मनं में आती है और मनं में अनिश्चित भय व शंका रहती है और सर्दी बनी रहती है व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार बार-बार आते रहते हैं इस प्रकार मानसिक असंतुलन और गुमसुम रहना भी चंद्रमा के अशुभ होने के लक्षण है अधिक भावनाओं को प्राथमिकता देना ये बताता है कि आपका चंद्रमा प्रतिकूल स्थिति में है-

क्या उपाय करें-

यदि आपका चन्द्र ग्रह प्रतिकूल है तो आपको सोमवार का व्रत करना चाहिए तथा माता (शक्ति) की सेवा करना, शिव की आराधना करना, मोती धारण करना चाहिए-

आप दो मोती या दो चाँदी का टुकड़ा लेकर एक टुकड़ा पानी में बहा दें तथा दूसरे को अपने पास रखें-यदि कुंडली के छठवें भाव में चंद्र हो तो दूध या पानी का दान करना मना है और यदि चंद्र बारहवाँ हो तो धर्मात्मा या साधु को भोजन न कराएँ और ना ही दूध पिलाएँ-

सोमवार को सफ़ेद वास्तु जैसे दही, चीनी, चावल, सफ़ेद वस्त्र, एक जोड़ा जनेऊ, दक्षिणा के साथ दान करना चाहिए-

          ॐ सोम सोमाय नमः 

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मंगलग्रह (Mars) की अशुभता के लक्षण-


मंगल सेनापति होता है तथा ये भाई का भी द्योतक और रक्त का भी करक माना गया है इसकी मेष और वृश्चिक राशि है कुंडली में मंगल के अशुभ होने पर भाई, पट्टीदारो से वाद-विवाद होता है तथा रक्त सम्बन्धी समस्या-नेत्र रोग-उच्च रक्तचाप-क्रोधित होना-उत्तेजित होना-वात रोग और गठिया हो जाता है-व्यक्ति क्रोधी स्वभाव का हो जाता है खून की कमी, पीलिया जैसे रोग या आंखें कमजोर हों तो समझें मंगल की स्थिति अशुभ है-

क्या उपाय करें-

मंगल की अनुकूलता के लिए आप ताँबा, गेहूँ एवं गुड, लाल कपडा, माचिस का दान करें तथा तंदूर की मीठी रोटी दान करें अथवा बहते पानी में रेवड़ी व बताशा बहाएँ तथा मसूर की दाल दान में दें-

हनुमद आराधना करना, हनुमान जी को चोला अर्पित करना, हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करना, बंदरो को चने खिलाना, हनुमान चालीसाबजरंग बाण, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड का पाठ करना लाभप्रद है-

          ॐ अं अंगारकाय नमः 

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बुधग्रह (Mercury Planet) की अशुभता के लक्षण-


बुध व्यापार व स्वास्थ्य का करक माना गया है यह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है बुध वाक् कला का भी द्योतक है विद्या और बुद्धि का सूचक है यदि आप जादा ही कन्फ्यूज रहते हैं तो आपका बुध अशुभ है तथा हकलाकर बोलना, बार-बार हिचकी आना या किसी भी प्रकार का वाणी दोष बुध की अशुभ स्थिति का लक्षण है कुंडली में बुध की अशुभता पर दाँत कमजोर हो जाते हैं सूँघने की शक्ति कम हो जाती है गुप्त रोग हो सकता है इसके अलावा, कर्ज में पड़ना, पड़ोसियों से अनबन नर्वस सिस्टम का कमजोर पड़ना भी कमजोर बुध के लक्षण हैं-

क्या उपाय करें-

बुधग्रह अशुभ होने पर आप को गौ सेवा करनी चाहिए तथा काले कुत्ते को इमरती देना लाभकारी होता है और नाक छिदवाएँ-

ताबें के प्लेट में छेद करके बहते पानी में बहाएँ तथा अपने भोजन में से एक हिस्सा गाय कोएक हिस्सा कुत्तों को और एक हिस्सा कौवे को दें या अपने हाथ से गाय को हरा चारा या हरा साग खिलाये और आप उड़द की दाल का सेवन करे व दान करे-

बालिकाओं को भोजन कराएँ, किन्नरो को हरी साडी, सुहाग सामग्री दान देना भी बहुत चमत्कारी है भगवान गणेश व माँ दुर्गा की आराधना करे-पन्ना धारण करे या हरे वस्त्र धारण करे यदि संभव न हो तो हरा रुमाल अपने साथ रक्खे-

              ॐ बुं बुद्धाय नमः 

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वृहस्पतिग्रह (Jupiter) की अशुभता के लक्षण-


वृहस्पति की भी दो राशि है धनु और मीन-गुरु के अशुभ प्रभाव में आने पर सिर के बाल झड़ने लगते हैं तथा परिवार में बिना बात तनाव, कलह-क्लेश का माहोल होता है यदि आपको बिना वजह आपको अपयश मिलता हो या बिना वजह आपके उपर दोष मढ़े जा रहे हों तथा बुरे सपना आना बृहस्पति की अशुभ स्थिति बताता है सोना खो जाता या चोरी हो जाता है शिक्षा में बाधा आती है तथा वाणी पर सयम नहीं रहता है अथवा आप श्वास दोष के शिकार हों या फिर धन का चोरी होना, बुरे सपने आना और असफल प्रेम भी कमजोर बृहस्पति के लक्षण हैं-

क्या उपाय करें-

ब्रह्मण का यथोचित सामान करे तथा माथे या नाभी पर केसर का तिलक लगाएँ और कलाई में पीला रेशमी धागा बांधे यदि संभव हो तो पुखराज धारण करे अन्यथा पीले वस्त्र या हल्दी की खड़ी गांठ साथ रक्खे तथा कोई भी अच्छा कार्य करने के पूर्व अपना नाक साफ करें-

दान में हल्दी, दाल, पीतल का पत्र, कोई धार्मिक पुस्तक, एक जोड़ा जनेऊ, पीले वस्त्र, केला, केसर,पीले मिस्ठान, दक्षिणा आदि देवें- विष्णु आराधना लाभदायक है-

              ॐ व्री वृहस्पतये नमः

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शुक्रग्रह (Venus) की अशुभता के लक्षण-


शुक्र भी दो राशिओं का स्वामी है-वृषभ और तुला-शुक्र तरुण है ये किशोरावस्था का सूचक है मौज मस्ती, घूमना फिरना, दोस्त मित्र इसके प्रमुख लक्षण है कुंडली में शुक्र के अशुभ प्रभाव में होने पर मनं में चंचलता रहती है और एकाग्रता नहीं हो पाती है-

खान पान में अरुचि, भोग विलास में रूचि और धन का नाश होता है तथा अंगूठे का रोग हो जाता है अँगूठे में दर्द बना रहता है-चलते समय अगूँठे को चोट पहुँच सकती है-स्वप्न दोष की श‍िकायत रहती है-आप हर समय पराई स्त्री की इच्छा करते हैं तो भी शुक्र की अशुभ स्थिति का लक्षण है यदि आप त्वचा रोग या चर्मरोग से पीड़ित है तो भी शुक्र की अशुभ स्थिति हो सकती है-

क्या उपाय करें-

माँ लक्ष्मी की सेवा आराधना करे-श्री सूक्त का पाठ करे-खोये के मिस्ठान व मिश्री का भोग लगाये-ब्रह्मण ब्रह्मणि की सेवा करे तथा स्वयं के भोजन में से गाय को प्रतिदिन कुछ हिस्सा अवश्य दें और कन्या भोजन कराये-

ज्वार दान करें-गरीब बच्चो व विद्यार्थिओं में अध्यन सामग्री का वितरण करे तथा नि:सहाय, निराश्रय के पालन-पोषण का जिम्मा ले सकते हैं-अन्न का दान करे-

           ॐ सुं शुक्राय नमः

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शनिग्रह (Saturn Planet) की अशुभता के लक्षण-


शनिदेव की भी दो राशिया है, मकर और कुम्भ-शनि की गति धीमी है इसके दूषित होने पर अच्छे से अच्छे काम में गतिहीनता आ जाती है शनि के अशुभ प्रभाव में होने पर मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता या क्षतिग्रस्त हो जाता है शरीर में विशेषकर निचले हिस्से में (कमर से नीचे) हड्डी या स्नायुतंत्र से सम्बंधित रोग लग जाते है अंगों के बाल झड़ जाते हैं वाहन से हानि या क्षति होती है काले धन या संपत्ति का नाश हो जाता है या अचानक आग लग सकती है या दुर्घटना हो सकती है अथवा मान-सम्मान में हानि का सामना करना पड़ता है तो इसका कारण आपका अशुभ शनि है अचानक मृत्यु या दुर्घटना आदि भी अशुभ शनि के लक्षण हैं-

क्या उपाय करें-

हनुमद आराधना करना, हनुमान जी को चोला अर्पित करना, हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करना, बंदरो को चने खिलानाहनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड का पाठ तथा  नाव की कील या काले घोड़े की नाल धारण करे यदि कुंडली में शनि लग्न में हो तो भिखारी को ताँबे का सिक्का या बर्तन कभी न दें यदि देंगे तो पुत्र को कष्ट होगा-यदि शनि आयु भाव में स्थित हो तो धर्मशाला आदि न बनवाएँ-कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाएँ-तेल में अपना मुख देख वह तेल दान कर दें (छाया दान करे)-

लोहा, काली उड़द, कोयला, तिल, जौ, काले वस्त्र, चमड़ा, काला सरसों आदि दान दें-

                ॐ हन हनुमते नमः 

इस उपरोक्त मन्त्र का 108 बार (एक माला) जाप नित्य करे-

राहु ग्रह (Rahu Planet) की अशुभता के लक्षण-


राहु के अशुभ होने पर हाथ के नाखून अपने आप टूटने लगते हैं आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर आपा खोना, वाणी का कठोर होना व आप्शब्द बोलना, मानसिक तनाव, आर्थिक नुक्सान, स्वयं को ले कर ग़लतफहमी तथा राजक्ष्यमा रोग के लक्षण प्रगट होते हैं-वाहन दुर्घटना, उदर कस्ट, मस्तिस्क में पीड़ा आथवा दर्द रहना, भोजन में बाल दिखना, अपयश की प्राप्ति, सम्बन्ध ख़राब होना, दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है, शत्रुओं से मुश्किलें बढ़ने की संभावना रहती है जल स्थान में कोई न कोई समस्या आना तथा किसी काम में मन न लगना यानि काम में अरुचि होना या बुरे स्वप्न आना-नींद न आना-बेमतलब की बदनामी अथवा घर से निकाला जाना आदि राहु की कमजोर स्थिति के लक्षण हैं-

क्या उपाय करें-

राहू अशुभ होने पर आप गोमेद धारण करे तथा दुर्गा, शिव व हनुमान की आराधना करे और तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करे या जौ या अनाज को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएँ, कोयले को पानी में बहाएँ, मूली दान में देवें, भंगी को शराब, माँस दान में दें तथा सोते समय सर के पास किसी पात्र में जल भर कर रक्खे और सुबह किसी पेड़ में डाल दे आप यह प्रयोग 43 दिन करे-इसके साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, सुंदरकांड का पाठ करें-

                   ॐ रं राहवे नमः

इस उपरोक्त मन्त्र का 108 बार (एक माला) जाप नित्य करे-

केतु ग्रह (Ketu Planet) की अशुभता के लक्षण-


केतु के अशुभ प्रभाव में होने पर चर्म रोग, मानसिक तनाव, आर्थिक नुक्सान, स्वयं को ले कर ग़लतफहमी, आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर आपा खोना, वाणी का कठोर होना व अपशब्द बोलनाजोड़ों का रोग या मूत्र एवं किडनी संबंधी रोग हो जाता है या फिर संतान को पीड़ा होती है वाहन दुर्घटना, उदर कस्ट, मस्तिस्क में पीड़ा आथवा दर्द रहना, अपयश की प्राप्ति, सम्बन्ध ख़राब होना, दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है, शत्रुओं से मुश्किलें बढ़ने की संभावना रहती है अथवा अचानक कर्ज बढ़ने लगे या लड़ाई-झगड़े होंने लगे अथवा आग से नुकसान हो जाए या आपका दुश्मन आपको नुकसान पहुंचाने में कामयाब हो तो समझिए केतू कि स्थिति अशुभ है-

क्या उपाय करें-

दुर्गा, शिव व हनुमान की आराधना करे-तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करे-कान छिदवाएँ-सोते समय सर के पास किसी पत्र में जल भर कर रक्खे और सुबह किसी पेड़ में डाल दे,यह प्रयोग 43 दिन करे-इसके साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, सुंदरकांड का पाठ करें-

आप अपने खाने में से काले कुत्ते-कौव्वे को हिस्सा दें तथा तिल व कपिला गाय दान में दें-पक्षिओं को बाजरा दे-चीटिओं के लिए भोजन की व्यवस्था करना भी केतु के अशुभ लक्षण को कम करता है-

              ॐ कें केतवे नमः

इस उपरोक्त मन्त्र का 108 बार (एक माला) जाप नित्य करे-

नोट-

कभी भी किसी भी उपाय को 43 दिन करना चहिये तब ही फल प्राप्ति संभव होती है मंत्रो के जाप के लिए रुद्राक्ष की माला सबसे उचित मानी गई है आप इन उपायों का गोचरवश प्रयोग करके कुण्डली में अशुभ प्रभाव में स्थित ग्रहों को शुभ प्रभाव में लाया जा सकता है सम्बंधित ग्रह के देवता की आराधना और उनके जाप, दान उनकी होरा, उनके नक्षत्र में अत्यधिक लाभप्रद होते है-

अगली पोस्ट- ग्रह की अनुकूलता के लिए कौन सा प्राणायाम करें

प्रस्तुती- Satyan Srivastava

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