अपान मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ हैं

अपान का स्थान स्वास्थ्‍य और शक्ति केन्द्र है योग में इसे मूलाधर चक्र कहा जाता है अपान मुद्रा(Apana Mudra)का कार्य मल, मूत्र, वीर्य, गर्भ और रज को शरीर से बाहर निकालना है यह सोना, बैठना, उठना, चलना आदि गतिशील स्थितियों में सहयोग करता है जैसे भोजन का अर्जन जीवन के लिए जरूरी है ठीक वैसे ही मल-मूत्र-वीर्य-रज आदि का विसर्जन भी जीवन के लिए उतना ही अनिवार्य है-

अपान मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ हैं

विर्सजन के माध्यम से शरीर स्वयं अपना शोधन करता है यदि शरीर विर्सजन की क्रिया किसी कारण से दो-तीन दिन बंद हो जाये तो मनुष्य का स्वस्थ रहना मुश्किल हो जाता है अत: स्वास्थ्य की द्रष्टिकोण अपान मुद्रा(Apana Mudra)बहुत महत्वपूर्ण क्रिया है स्वस्थ शरीर की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता-विसर्जन क्रिया को नियमित करती है और शरीर को निर्मल बनाती है अपान मुद्रा अशुचि और गंदगी का शोधन करती है-

सबसे पहले आप सुखासन या अन्य किसी आसन में बैठ जाएँ तथा आप दोनों हाथ घुटनों पर और  हथेलियाँ उपर की तरफ एवं रीढ़ की हड्डी सीधी रखें फिर मध्यमा(बीच की अंगुली)एवं अनामिका(रिंग फिंगर)अंगुली के उपरी पोर को अंगूठे के उपरी पोर से स्पर्श कराके हल्का सा दबाएं तथा तर्जनी अंगुली एवं कनिष्ठा(सबसे छोटी)अंगुली सीधी रहे-

अपान मुद्रा(Apana Mudra)में सावधानी-


अपान मुद्रा के अभ्यास काल में मूत्र अधिक मात्रा में आता है क्योंकि इस मुद्रा के प्रभाव से शरीर के अधिकाधिक मात्रा में विष बाहर निकालने के प्रयास स्वरुप मूत्र ज्यादा आता है परन्तु आप इससे घबड़ाए नहीं वैसे अपान मुद्रा(Apana Mudra)को दोनों हाथों से करना अधिक लाभदायक है यथासंभव इस मुद्रा को दोनों हाथों से करना चाहिए-

अपान मुद्रा(Apana Mudra)करने का समय व अवधि-


इस मुद्रा को दिन में कुल 48 मिनट तक कर सकते हैं या फिर आप अपान मुद्रा को प्रातः,दोपहर,सायं क्रम से सोलह-सोलह मिनट भी कर सकते है-

अपान मुद्रा(Apana Mudra)से होने वाले लाभ-


1- अपान मुद्रा से प्राण एवं अपान वायु सन्तुलित होती है इस मुद्रा में इन दोनों वायु के संयोग के फलस्वरूप साधक का मन एकाग्र होता है एवं वह समाधि को प्राप्त हो जाता है अपान मुद्रा के अभ्यास से स्वाधिष्ठान चक्र और मूलाधार चक्र जाग्रत होते है-

2- अपान मुद्रा(Apana Mudra)बबासीर रोग के लिए अत्यंत लाभकारी है इसके नियमित प्रयोग से बबासीर समूल नष्ट हो जाती है-

3- अपान मुद्रा मधुमेह(diabetes)के लिए लाभकारी है  इसके निरंतर प्रयोग से रक्त में शर्करा का स्तर सन्तुलित हो जाता है-

4- अपान मुद्रा शरीर के मल निष्कासक अंगों-त्वचा,गुर्दे एवं आंतों को सक्रिय करती है जिससे शरीर का बहुत सारा विष पसीना,मूत्र व मल के रूप में बाहर निकल जाता है फलस्वरूप शरीर शुद्ध एवं निरोग हो जाता है-

5- अपान मुद्रा के नियमित अभ्यास से कब्ज,गैस,गुर्दे तथा आंतों से सम्बंधित समस्त रोग नष्ट हो जाते हैं-

6- अपान मुद्रा करने से दांतों के दोष एवं दर्द दूर होते है तथा पसीना लाकर शरीर के ताप को दूर करती है शरीर और नाड़ियों की शुद्धि होती है मल और दोष विसर्जित होते है तथा निर्मलता प्राप्त होती है ये यूरीन संबंधी दोषों को भी दूर करती है-


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