अपान वायु मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ हैं

हम आपको पहले ये बता दें कि इस मुद्रा को अपान वायु मुद्रा(Apanu Vayu Mudra)इसलिये कहते है क्योंकि इसमे दो मुद्रा लगती है एक वायु मुद्रा जो कि पेट की बड़ी हुई गैस को कम करती है और दूसरी अपान मुद्रा मे मध्यमा और अनामिक अंगूलीयों से जुड़ी नाड़ियो का सम्बंध हृदय से होता है इसलिये यह मुद्रा हदय को भी मजबूत करती है और पाचन शक्ति को भी बढाती है इसलिये इसे मृत-संजीवनी मुद्रा भी कहते है-

अपान वायु मुद्रा कैसे करें इससे क्या लाभ हैं

अपान वायु मुद्रा(Apanu Vayu Mudra)को ह्रदय मुद्रा के नाम से जाना जाता है ह्रदय के विभिन्न रोग जैसे ह्रदय की अचानक तेज या मन्द गति होजाना, ह्रदय का धीरे-धीरे बैठ जाना और घवराहट होने पर अपान वायु मुद्रा के प्रयोग से तुरन्त लाभ होता है अचानक आये हार्ट अटैक के समय इस मुद्रा का प्रयोग करने से रोगी को तत्काल ही लाभ होता है-

ब्लड प्रेशर और ह्र्दय रोग है तो आप चिन्ता मत कीजिये और विश्वास कीजिये ध्यान और कुछ मुद्राये आपको सदा के लिये रोग से मुक्त कर देंगी ध्यान इस संसार की सबसे कीमती विध्या है इतना नहीं ये बहुत ही ज्यादा कीमती है और सदा ही स्वस्थ और आन्नद में रहने का एक मात्र उपाय भी है इसलिए आप दवाओं और दुआओं के भरोसे नही रहिये बस हो सके तो ध्यान सीख लीजिये अपने जीवन में यदि आप रोगों से मुक्ति चाहते है तो बस आप तीन मुद्राओं को जीवन में उतार ले-वायु मुद्रा,अपान वायु मुद्रा और प्राण मुद्रा-

यदि आप इन तीनो मुद्राओं को ध्यान के साथ करेंगे तो फिर इनके लाभ कई गुना बढ जायेंगे और आप यकीन कीजिये ये मुद्रायें इस दुनिया की सबसे तेज दवायें हैं आप मेरी बात मत मानिये-हम तो आपको कहते है कि आप इन्हें बस करके देख लीजिये तब आप स्वयं निर्णय करियेगा यदि आप एक बार आप ध्यान करना ठीक से जान लेंगे तो फ़िर मेरा वादा है कि जिन्दगी भर आप नहीं छोड सकते क्योंकि आपको वास्तविक आनंद इतना ज्यादा मिलता है कि फिर आपके लिए इसे छोडना नामुमकिन है-

अपान वायु मुद्रा(Apanu Vayu Mudra)करने के लिए आप सबसे पहले सुखासन या अन्य किसी ध्यानात्मक आसन में बैठ जाएँ और दोनों हाथ घुटनों पर रखें तथा हथेलियाँ आपकी उपर की तरफ रहें एवं रीढ़ की हड्डी सीधी रहे फिर हाथ की तर्जनी(प्रथम)अंगुली को मोड़कर अंगूठे की जड़ में लगा दें तथा मध्यमा(बीच वाली अंगुली)व अनामिका(तीसरी अंगुली)अंगुली के प्रथम पोर को अंगूठे के प्रथम पोर से स्पर्श कर हल्का दबाएँ और आपकी कनिष्ठिका(सबसे छोटी अंगुली)अंगुली सीधी रहे ये अपान वायु मुद्रा कहलाती है-इस मुद्रा को चलते­फिरते उठते­ बैठते और किसी भी स्थिति मे की जा सकती है-

अपान वायु मुद्रा(Apanu Vayu Mudra)में सावधानी-


अपान वायु मुद्रा एक शक्तिशाली मुद्रा है इसमें एक साथ तीन तत्वों का मिलन अग्नि तत्व से होता है इसलिए इसे निश्चित समय से अधिक बिलकुल भी नही करना चाहिए-

अपान वायु मुद्रा((Apanu Vayu Mudra)करने का समय व अवधि-


अपान वायु मुद्रा करने का सर्वोत्तम समय प्रातः,दोपहर एवं सायंकाल है इस मुद्रा को दिन में कुल 48 मिनट तक कर सकते हैं दिन में तीन बार 16-16 मिनट भी कर सकते हैं-

अपान वायु मुद्रा(Apanu Vayu Mudra)से होने वाले लाभ-


1- यह मुद्रा करने से शरीर के तीनो दोषो वात पित्त और कफ ठीक होते है जिसके फल स्वरूप रक्त और पाचन प्रणाली के सभी प्रकार के दोष ठीक होते है-

2- अपान वायु हदय रोग मुद्रा या मृत-संजीवनी मुद्रा अपान वायु मुद्रा का हमारे हदय पर विशेष प्रभाव पड़ता है क्योंकि वायु के शरीर में बढ़ जाने के कारण हृदय कि रक्त वाहिनियां शुष्क हो जाती है और उनमे सिकूड़न आने लगती है लेकिन वायु मुद्रा से हदय कि सिकुड़न दूर हो जाती है और मध्यमा और अनामिक अंगली का समबन्ध हृदय से जुड़ी नाड़ियो से है और अंगूठे के द्वारा बाहर कि तरफ बहते हुये प्राणो को वापस इन नाड़ियो मे भेज दिया जाता है जिस के फल स्वरूप हृदय के सभी रोग, हृदय शूल दूर होता है-

3- उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप दोनों ही ठीक होते हैं यदि दिल की धड़कन बढ़ जाए या धीमी हो जाए तो दोनों ही स्थितियों में ये दिल की धड़कन सामान्य करती है तथा हृदया धात होने पर यह मुद्रा तत्काल ही लाभ पहुचाती है और अपान विशेष प्रभाव दिखाती है क्योकि यह मुद्रा अपना प्रभाव बस कुछ घडी मे दिखा देती है और व्यक्ति को लाभ प्राप्त होता है-

4- जिन लोगो का दिल कमजोर है उन लोगो को यह मुद्रा प्रतिदिन करनी चाहिये और दिल का दौरा पड़ते ही यह मुद्रा करने पर आराम मिलता है-

5- पेट की गैस, ह्रदय और पेट में बेचैनी होने पर इस मुद्रा के प्रयोग से दूर हो जाती है इस मुद्रा का प्रतिदिन 20 से 30 मिनट प्रयोग किया जा सकता है-

6- हमारे पेट मे गैस होने से पेट की वायु, गैस, पेटदर्द, गैस से हृदय मे जलन, सिर दर्द, आधे सिर का दर्द और एसिडिटी आदि पेट के रोग होने पर यह मुद्रा करने से बढ़ती वायु शरीर से बाहर निकल जाती है और बढ़ी हुई वायु के कारण जो घबराहट होती है वो भी इस मुद्रा के करने से ठीक हो जाती है-

7- जिन लोगों के फेफड़ो के अस्वस्थ होने और घुटनों में दर्द के कारण सीढ़ियां चढ़ने मे तकलीफ होती है और अगर आप सीढ़ी चढ़ाने से पाँच­ दस मिनट पहले यह मुद्रा करें और इस मुद्रा को करते हुए सीढ़ी चढ़े तो आपके घुटनो में दर्द नहीं होगा और ना ही आपका श्‍वास फूलेगा-

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